Thursday, November 14, 2024

Kutya - macska barátság :कुत्ते - बिल्ली की दोस्ती

 

 Kutya - macska  barátság

कुत्ते - बिल्ली  की दोस्ती 


एक बार कुछ कुत्तों ने शादी की दावत का आयोजन किया।  बोदरी नामक कुत्ते ने के प्रकार के पकवान पकाए  और उन पकवानों को  चखने के लिए अपने मित्र शायो नामक कुत्ते को बुलाया।  शायो ने मालपुआ चखा , लेकिन उसमे न कोई स्वाद था न कोई ज़ायका क्योंकि  उसमे दही नहीं डाला गया था।  बोदरी दही ढूँढने लगा लेकिन घर पर दही नहीं था।  उसने सोचा कि कसी को जल्दी से दूकान पर भेजना पड़ेगा। 

लेकिन कौन जाएगा ? कुत्ते ने अभी तक पकाना समाप्त नहीं किया था। उसने बिल्ली को देखा और उसे दही लाने भेज दिया। बिल्ली दही लेने दुकान की और भागी। जब दुकानदार ने दही तोल दिया  तो बिल्ली घर की और भागी।   बिल्ली भूखी थी इसलिए उसने उसमे से थोड़ा सा दही चाट लिया। एक क्षण सोचा फिर और दही खा लिया।  अब डिब्बे मैं बहुत ही थोड़ा दही बचा था। कुत्तों का घर आने वाला था , इतना थोड़ा दही ले जाने मैं बिल्ली को संकोच हुआ और उसने बचा - खुचा दही भी चट  क्र डाला।  कुत्ते उसका इन्तिज़ार कर रहे थे , उसको देखते ही भागते हुए आये और पूछा - " दही लायी हो बिल्ली ?" 

बिल्ली ने झूठ कह दिया कि दुकानदार ने दही दिया ही नहीं। लेकिन कुत्तों ने बिल्ली कि दही से सनी मूंछें देख ली। 

कुत्ते उसे पकड़ने के लिए दौड़े लेकिन बिल्ली भाग कर पेड़ पर चढ़ गयी और वहां से कुत्तों पर गुर्राने लगी। जब कुत्तों ने देखा कि  बिल्ली पेड़ से नीचे उतरने को तैयार नहीं है , तो वे घर लौट गए।और बिना दही के ही मालपुआ खाने लगे। 

तभी से कुत्तों को बिल्ली फूटी आँख नहीं सुहाती और यह दुश्मनी आज तक चल रही है 

Ghazal - Lesson - 9

 मित्रों ,

नमस्कार

हर्फे रबी, हर्फे रिद्फ, हर्फे रिद्फ मुफरद, हर्फे रिद्फ मुरक्कब, और हर्फे कैद के विषय में जाना। आगे हर्फे दखील के बारे में जानेंगे

 हर्फे दखील

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हर्फे दखील- 

हर्फे रबी के पहले यदि कोई व्यंजन अर्थात पूर्ण अक्षर हो और उसके पहले कोई दीर्घ मात्रा हो तो यह व्यंजन हर्फे दखील कहलाता है। हर्फे दखील तभी होगा जब व्यंजन के पहले दीर्घ मात्रा हो वरना दखील नहीं कहलायेगा। 

जैसे- काजल । यहां ल हर्फे रबी है और  ल केपहले पूर्ण व्यंजन ज है लेकिन उससे पहले अर्थात ज के पहले दीर्घ मात्रा आ है तो ज व्यंजन हर्फे दखील होगा।

इसी प्रकार साजन में न हर्फे रबी है ज हर्फे दखील हैं क्योंकि इसके पहले आ की दीर्घ मात्रा है।

एक और उदाहरण देखिये-

शब्द कोमल मे ल हर्फे रबी म हर्फे दखील क्योंकि इसके पहले ओ की मात्रा है।

अब ऐसा काफिया जिसमें  हर्फे दखील है तो आगे के काफिये में दखील तो बदल सकता है लेकिन उसके पहले की मात्रा नहीं बदल सकते हैं । जैसे-

कोमल, के साथ बोतल, ओझल, तो आ सकता है लेकिन ओ की मात्रा नहीं बदल सकते। हम कोमल के साथ काजल , बादल , चीतल आदि काफिये नहीं ले सकते


हर्फे दखील के अन्य उदाहरण देखें।

शीतल - हर्फे रबी ल है

      इसके पहले पूर्ण व्यंजन त है

और चूँकि त के पहले दीर्घ मात्रा ई है इसलिए त हर्फे दखील है।

यौवन - न हर्फे रबी है

   इसके पहले पूर्ण व्यंजन व है

लेकिन इस व व्यंजन के पहले  दीर्घ मात्रा औ की है इसलिए व हर्फे दखील है।

हर्फे दखील तभी होगा जब हर्फे रबी के पहले पूर्ण व्यंजन हो और इसके भी पहले दीर्घ मात्रा होना जरूरी है। यदि दीर्घ मात्रा नहीं है तो पूर्ण व्यंजन हर्फै दखील नहीं कहलायेगा। जैसे

बदन में न हर्फे रबी है

द पूर्ण व्यंजन है

लेकिन द के पहले दीर्घ मात्रा नहीं   है इसलिए द हर्फै दखील नहीं होगा।

इसी प्रकार कमर में र हर्फे रबी है

म पूर्ण व्यंजन है लेकिन इसके पहले दीर्घ मात्रा नहीं है तो म को हर्फे दखील नहीं कहेंगे।

Ghazal - Lesson - 8

 [11:53, 14/11/2024] Ram Awadh Vishvkarma 2: दोस्तो अभी तक अरूज पर  चर्चा के दौरान निम्न बातें हमारे समझ में आईं।

1. हर्फे रबी - मूल शब्द का अंतिम अक्षर

जैसे- कमल मूल शब्द काअंतिम अक्षर "ल" हर्फे रबी है

        दाम मूल शब्द काअंतिम अक्षर "म"

         समन्दर मूल शब्द काअंतिम अक्षर "र"

2. हर्फे रिद्फ - हर्फे रबी के पहले आना वाली दीर्घ मात्रा

जैसे - राज़ मे हर्फे रबी के पहले आ की मात्रा

          दहलीज में हर्फे रबी ज के पहले ई की मात्रा

          फूल में हर्फे रबी ल के पहले  ऊ की मात्रा

           क्लेश में हर्फे रबी श के पहले ए की मात्रा

           दौड़ मे हर्फे रबी ड़ के पहले औ की मात्रा

नोट - काफिया मे हर्फे रिद्फ बदला नहीं जा सकता है

         मतलब काम के साथ दाम ही आयेगा रोम नहीं

 हर्फे रिद्फ के दो प्रकार होते हैं 

1. हर्फे रिद्फ मुफ्रद

2. हर्फे रिद्फ मुरक्कब


 हर्फे रिद्फ मुफ्रद - 

हर्फे रबी के पहले जो दीर्घ मात्रा आये वो हर्फे रिद्फ मुफरद कहलायेगा। जैसे- 

काल मे ल हर्फे रबी है और आ की मात्रा हर्फे रिद्फ मुफ्रद कहलायेगा

इसी प्रकार शोर में र हर्फे रबी है और ओ की मात्रा हर्फे मुफ्रद।

 हर्फे रिद्फ मुरक्कब- 

यदि हर्फे रबी के पहले अर्ध ब्यंजन आये और उसके बाद दीर्घ मात्रा आये तो यह अर्ध ब्यंजन अर्थात आधा अक्षर हर्फे रिद्फ मुरक्कब कहलायेगा और अर्ध ब्यंजन के पहले आने वाली दीर्घ मात्रा हर्फे रिद्फ मुफ्रद कहलायेगा।

जैसे- दोस्त मे त हर्फे रबी है आधा स हर्फे रिद्फ मुरक्कब है और ओ की मात्रा हर्फे रिद्फ मुफ्रद है

नोट -  हम जब भी कोई काफिया बाधेंगे जिसमें रिद्फ मुरक्कब और रिद्फ मुफ्रद है तो हर्फे रबी के साथ हर्फे मुरक्कब और हर्फे रिद्फ मुफ्रद आना अनिवार्य होगा

जैसे- दोस्त के साथ पोस्त आयेगा  न कि कास्त। कहने का तात्पर्य है कि ओ की मात्रा आधा स और त सभी काफिये में आयेंगे।

[11:56, 14/11/2024] Ram Awadh Vishvkarma 2: हर्फे कैद - हर्फे रबी के पहले यदि आधा अक्षर आता है            तो वह आधा अक्षर हर्फे रबी के साथ कैद हो जायेगा और हर काफिये में वह अनिवार्य रूप से आयेगा

जैसे - दस्त के साथ मस्त आयेगा वक्त नहीं आयेगा

          सख्त के साथ लख्त , कमबख्त,  आयेगा

Tuesday, November 12, 2024

Ghazal Lesson 7

 [17:39, 12/11/2024] Ram Awadh Vishvkarma 2: मित्रों, 

नमस्कार

आप सबने हर्फे रिद्फ के विषय में पढ़ा और गुना लेकिन हर्फे रिद्फ के विषय में अभी कुछ जानकारी शेष रह गई है। उसका वर्णन इस प्रकार हैः

 हर्फे रिद्फ के दो प्रकार होते हैं 

1. हर्फे रिद्फ मुफ्रद

2. हर्फे रिद्फ मुरक्कब


 हर्फे रिद्फ मुफ्रद - 

हर्फे रबी के पहले जो दीर्घ मात्रा आये वो हर्फे रिद्फ मुफरद कहलायेगा। जैसे- 

काल मे ल हर्फे रबी है और आ की मात्रा हर्फे रिद्फ मुफ्रद कहलायेगा

इसी प्रकार शोर में र हर्फे रबी है और ओ की मात्रा हर्फे मुफ्रद।

 हर्फे रिद्फ मुरक्कब- 

यदि हर्फे रबी के पहले अर्ध ब्यंजन आये और उसके बाद दीर्घ मात्रा आये तो यह अर्ध ब्यंजन अर्थात आधा अक्षर हर्फे रिद्फ मुरक्कब कहलायेगा और अर्ध ब्यंजन के पहले आने वाली दीर्घ मात्रा हर्फे रिद्फ मुफ्रद कहलायेगा।

जैसे- दोस्त मे त हर्फे रबी है आधा स हर्फे रिद्फ मुरक्कब है और ओ की मात्रा हर्फे रिद्फ मुफ्रद है

नोट -  हम जब भी कोई काफिया बाधेंगे जिसमें रिद्फ मुरक्कब और रिद्फ मुफ्रद है तो हर्फे रबी के साथ हर्फे मुरक्कब और हर्फे रिद्फ मुफ्रद आना अनिवार्य होगा

जैसे- दोस्त के साथ पोस्त आयेगा  न कि कास्त। कहने का तात्पर्य है कि ओ की मात्रा आधा स और त सभी काफिये में आयेंगे।

[17:41, 12/11/2024] Ram Awadh Vishvkarma 2: नोट - मुफ्रद मतलब शुद्ध

        मुरक्कब मतलब मिश्रित

Friday, November 8, 2024

Ghazal Lesson - 6

 हर्फे रबी के बारे में आप सब  न केवल अच्छी तरह जान चुके हैं बल्कि उसे पहचान भी सकते हैं। क़ाफ़िया में हर्फे रबी होना आवश्यक है। बिना हर्फे रबी के काफिया नहीं हो सकता । क़ाफ़िया के पहले चार अक्षर हो सकते हैं जिन्हें असली कहते हैं और हर्फे रबी के बाद जुड़ने वाले चार अक्षर को वस्ली ( वस्ल माने जुड़ना) कहते हैं।

असली हरूफ हैं

हर्फे रिद्फ

हर्फे कैद

हर्फे दखील

हर्फे तासीस

हर्फे रिद्फ

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हर्फे रबी के पहले जो भी दीर्घ मात्रा होगी  वह हर्फे रिद्फ कहलायेगी। जैसे-

1. राम में हर्फे रबी म है इसके पहले आ की मात्रा है यही आ की मात्रा हर्फे रिद्फ है

2. साज़ में हर्फे रबी ज़ है हर्फे रिद्फ उसके पहले आ की मात्रा है।

3. संगीत - हर्फे रबी त है और हर्फे रिद्फ उसके पहले ई की मात्रा है

4. मंज़ूर - हर्फे रबी र है और हर्फे रिद्फ उसके पहले  ऊ की मात्रा है

5. मेल - हर्फे रबी ल है और हर्फे रिद्फ ए की मात्रा है

6. कसाई - हर्फे रबी ई है और हर्फे रिद्फ आ की मात्रा है ग़रज यह है कि हर्फे रबी के पहले जो भी मात्रा होगी वह हर्फे रिद्फ कहलायेगी।

 यह हर्फे रिद्फ हर्फे रबी के साथ बँध जाता है मतलब क़ाफ़िया मे  हर्फे रबी के बाद आने वाली मात्रा को बदल नहीं सकते हैं जैसे आपने क़ाफ़िया नाक़ाम लिया है तो अगला क़ाफ़िया में म के पहले आ की मात्रा आना आवश्यक है।  काम के साथ राम , नाम , परिणाम आदि आयेगा लेकिन 

क़ाम के साथ सोम , ओम, भीम , धूम आदि काफिया लेंंगे तो गलत होगा क्योंकि हर्फे रबी म के पहले आनेवाली मात्रा हर्फे रिद्फ  फिक्स हो गई है।

इसी प्रकार खीर क़ाफ़िया में हर्फे रबी र के पहले हर्फे रिद्फ ई की मात्रा है तो आगे काफिया मीर , पीर, हीर आदि होगा लेकिन खीर के साथ  हूर , शेर, और आदि लेंगे तो काफ़िया गलत होगा।

Tuesday, November 5, 2024

FINAL - GHAZAL BOOK

 मुक्तक :

फाइलातुन फाइलातुन  फाइलातुन फाइलुन

2122   2122   2122  212


ग़म में डूबा साज़ भी कोई  यहां  गाता नहीं 

आँख में ठहरा  हुआ आंसू कही जाता नहीं 

दिल मिरा वीरान फिर आबाद हो सकता है पर

दिलजला  कोई सनम रहने यहां आता नहीं

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 मुक्तक:

( फैलुन फैलुन फैलुन फैलुन

22   22   22   22 )


अधरों की मुस्कान  बना मैं

खुशबू की पहचान बना मैं

किशना की मुरली में ढ़लकर

सूर बना रसखान बना मैं

( फैलुन फैलुन फैलुन फैलुन

22   22   22   22 )

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प्रीत की एक नदी लगती हो

एक लम्हे  की सदी लगती है

आने  वाली है  कयामत अब तो 

आसमानी सी परी लगती हो


फाइलातुन  फइलातुन फैलुन

2122         1122     22

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पत्थर से  शीशा बन जाना सब के बस की बात नहीं 

सीने में ग़म को दफ़नाना सब के बस की बात नहीं 

ग़ैरों के रिसते ज़ख़्मों पर कोई भी हँस लेता है

अपने ज़ख़्मों पर मुस्काना सब के बस की बात नहीं


 फैलुन फैलुन फैलुन फैलुन फैलुन फैलुन फैलुन फा

22  22  22  22 22  22  22 2

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मुस्तफ्इलुन  मुस्तफ्इलुन  मुस्तफ्इलुन
    2212       2212        2212
ठहरे हुये कितने ही पैमाने मिले
गुजरे हुये कितने ही अफसाने मिले
आँखें नहीं गहरी है कोई झील ये
डूबे हुये कितने ही दीवाने मिले
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Ghazal 

जलता हुआ चिराग़ भी बुझता हुआ लगा 
जब आपका  ख़ुमार भी उतरा हुआ लगा 

कुछ रात भी उदास थी दरपन को देखकर
'उस शोख़ का मिज़ाज भी उखड़ा हुआ लगा'

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मुहब्बत को दिल में बसाये तू  रखना 

सदा शम्अ-ए-उल्फ़त जलाये तू  रखना

मिलन दो दिलों का न आसान होगा 

मगर दिल से दिल को लगाए तू रखना

फऊलुन     फऊलुन  फऊलुन फऊलुन
122   122   122   122

Friday, November 1, 2024

Ghazal - Lesson - 5 -RAV

 आज का होम वर्क

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पहले आपको बताया था हर्फे रबी के बारे में। हर्फे रबी मूल शब्द का अंतिम अक्षर होता है जैसे

कबन्द मे  द हर्फे  रबी है

राज़ में  ज़ हर्फे रबी है

किवाड़ में ड़ हर्फे रबी है

किताब में ब

जुस्तजू मे ऊ की मात्रा

गली में ई की मात्रा

वफ़ा में आ की मात्रा

जिज्ञासा में आ की मात्रा

मुड़कर में ड़ क्योंकि मूल शब्द मुड़ है और इसमें कर जोड़कर नया शब्द बना है इसलिए मुड़ का अंतिम अक्षर ड़ लिया गया है

इसी प्रकार

देखकर में ख हर्फे रबी है

समझते में झ हर्फे रबी क्योंकि मूल शब्द समझ है।

करते में र है क्योंकि मूल शब्द कर है और इसका अंतिम अक्षर र है

इसी प्रकार 

बदलने में  ल है

अब काफिया बाँधते समय हर्फे रबी का मिलान जरूरी है

एक शेर देखें

उन्हीं को पीर पयम्बर सभी समझते रहे

धरम के नाम पर जो तीन पाँच करते रहे

यह शेर बहर में है थाट भी अच्छा है। अब आप कहेंगे शेर में कोई कमी नहीं है। 

लेकिन इस शेर का काफिया गलत है

इसमें रदीफ है ' रहे' काफिया है

समझते और.करते

यहां समझ में हर्फे रबी झ है

और करते में हर्फे रबी र है

दोनों काफिये के हर्फे रबी झ और र में कोई मेल नहीं है इसलिए हर्फे रबी का मिलान न होने के कारण काफिया गलत है।

करते के साथ डरते, मरते, चरते , भरते आदि आये तो सही है

इसी प्रकार  समझते के साथ  उलझते काफिया सही होगा।