Friday, June 26, 2026

Greek_Lesson 13

 Το γκαρσόν - Waiter 

το μενού - Menu 

ξέρω - to know 

ότι / πώς - that ( Conj)

φρέσκος , φρέσκια , φρέσκο - Fresh 

το ψαρί - Fish 

το κοτόπουλο - chicken 

νόστιμος , η , ο - Tasty 

το κρέας - Meat 

το ούζο - Greek alcholic drink

η ρετσίνα - a kind of resinated wine

δηλαδή - That is to say 

νά πώ - That I say 

νά πήτε - That you say 

έθνικός , η , ο - National 

το ποτό - Beverage , drink 

το αρνάκι - The lamb

το φαι / φαγητό - Food 

τα φαγιά / φαγητά  - Food Pl.

Βεβαίως / Βέβαια - certainly / of course

το σουβλάκε - Sheeshkebab

τα σουβλάκια  - Pl.

ο μουσακάς - Musaka

όπως - as 

όπως έπίσης - as well as 

και τα λοιπά / κ.τ.λ. - etc.

δοκιμάζω - to taste 

άμεσως - Right away 

περίφημος , η , ο - famous 

η όρεξις / όρεξι - The appetite 

καλή όρεξι - Enjoy your meal / Have a good appetite 

άμέσως  - Right away 

Tuesday, June 23, 2026

Greek_Lesson_12

 Το πιάτο - plate 

το μαχαίρι - knife 

το κουτάλι - spoon 

το πηρούνι - fork 

το άλάτι - Salt

το πιπέρι - Pepper

η πετσέτα - Napkin

το γλυκό - sweet

το παγωτό - ice cream 

η πάστα - pastry 

ο πάγος - ice

η μπριζόλα - steak 

οί πατάτες - Potatoes

τα λαχανικά - vegetables 

η σούπα  - soup 

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γιατί -  Why 

Μου αρέσει το ποδόσφαιρο - I like football 


πως και ; How come 


Εδώ και πέντε χρόνια είμαι στην Αθήνα 

for 5 years now I am in Athens 


για ποιο λόγο ; For what reason 


δεν τρώω κρέας - I do not eat meat 


Για ποιο λόγο δεντρως κρέας . -

For what reason you do not eat meat 



Monday, June 22, 2026

SAAT SUR

 कुछ अश'आर 

 

१- घड़ी तो हाथ में सबके है लेकिन

     पकड़ में एक    भी लम्हा  नहीं है

२- 

ज़रा सी बात थी और कशमकश ऐसी कि मत पूछो

भिखारी मुड़ गया पर जेब से सिक्का नहीं निकला 


३- उनको तो मंदिर- मस्जिद से वोट की खेती करनी थी

हम आपस में लड़ना सीखे, लेना एक न देना दो 


४-

भूल जाएगा किसी दिन अपने पाँवों का वजूद

किसने दे रक्खी हैं उसके हाथ में बैसाखियाँ


      ओमप्रकाश यती


मैं भी दालान की कुर्सी को  हटा कर ख़ुश हूं,

वो भी है चैन से,खिड़की के बदल कर शीशे।

.                           -----अनुज अब्र

Thursday, June 18, 2026

Sufia Shaikh

Ms Sufia Shaikh

d/o Shekh Muhammed Selim

154/1 D

LINTON Street, Ladies Park , Entally 

Kolkata 

West Bengal - 700014


Ms Sufia Shaikh

LINTON Street, Ladies Park , Entally 

Kolkata ,West Bengal - 700014


Sub : Appointment as Communication Consultant 


Dear Sufia , 

We are pleased to inform you that SANAD FOUNDATION has appointed you as " Communication Consultant " with immediate effect i.e. 19-06-2026  initially for a period of  one year .You will be working remotely and assisting in social media platforms and curating future constructive projects as and when required .

Please note that Sanad Foundation will not be able to give you any Salary / Wages for your work done for Sanad Foundation . 


Thanks & regards


Indu Kant Sharma 

Managing Trustee 

SANAD FOUNDATION 


Monday, June 15, 2026

Sarita_Jain_Ghazals

 जागती आँखों से देखी थी किसी ख़्वाब की धुन 

दिल की धक् धक् पे छिड़ी इश्क़ के मिज़राब की धुन 


नाव तो नाव वहां जान के लाले पड़ गए 

शौक़ उठ्ठा था चलो सुनते हैँ गिरदाब की धुन 


रात के वक़्त मेरे साथ तुम्हारी यादें 

और दरीचे से चमकती हुई महताब की धुन 


हाय वो फूल से चेहरे कि लरज़ उठता है दिल 

कुछ दरिंदो ने जहाँ लिख दी है तेज़ाब की धुन 


आज के दौर मे खूशबु से भरा ये लहजा 

जैसे पतझड़ मे महकती गुले शादाब की धुन 


रोज़े अव्वल से नहीं  मिलते किसी से भी ख़याल 

मुख्तलिफ रहती है मुझ से मेरे अहबाब की धुन 


रक़्स करती हैँ मेरे साथ पुरानी यादें 

रोज़ सुनती हूं मैं  तेरे दिले बेताब की धुन


****


ज़हन ओ दिल पर एक उदासी छाई है, तन्हाई है

बीनाई हर मंज़र से उकताई है, तन्हाई है 


जाने क्या था जिसकी ख़ातिर मैंने सब मंज़ूर किया 

वरना, इश्क़ में ज़िल्लत है, रुसवाई है, तन्हाई है


बाद तुम्हारे ऊब गया है दिल, दुनिया की रौनक से 

मेरे ख़ालीपन की जो भरपाई है तन्हाई है 


दीवारों से लिपटी बेलें कब से देख रही हूँ मैं 

शाम ढले जब याद तुम्हारी आई है, तन्हाई है


खुली किताबें भीगा तकिया सिमटी चादर बिखरी मैं

और वीरानी मुझ पर हँसने आई है, तन्हाई है 


अपने मुँह मोड़ गए हैं रिश्ते सारे तोड़ गए हैं 

रुख़सत का पैगाम क़ज़ा जब लाई है, तन्हाई है


यूँ तो मेरी वहशत से ये दुनिया भी घबराती है 

पर मेरी वहशत जिससे घबराई है, तन्हाई है

***


दर्द का इख़्तिताम चाहता है 

हिज्र भी अब विराम चाहता है


ख़ाली बैठे हैं इश्क़ ही कर लें 

दिल भी कुछ कामधाम चाहता है 


ये नए दौर का है इश्क़ मियां 

ये बहुत ताम झाम चाहता है


हाल तेरा भी हो मेरे जैसा

दिल यही इंतिक़ाम चाहता है 


जुरअतें देखिए दिवाने की 

इश्क़ में एहतराम चाहता है 


उसका भी आज फोन आ ही गया 

किस्से सारे तमाम चाहता है 


ऐश ओ इशरत में मुब्तिला है दिल

नित  नया  इक  ग़ुलाम   चाहता  है


जानता है हुनर तिजारत का 

सो वफ़ाओं का दाम चाहता है


***


ज़हनी बीमारियों ने काट दिया 

फूल को आरियों ने काट दिया 


जाने कितनी ज़रूरतों का गला 

मेरी खुद्दारियों ने काट दिया 


आज फिर उसकी याद का सब वक़्त 

घर की अलमारियों ने काट दिया


ज़िन्दगी नाम का हसीन दरख़्त 

घर की दुशवारियों ने काट दिया 


वो मेरे इश्क़ का सुहाना भरम 

उसकी मक्कारियों ने काट दिया 


पक्की कॉलोनीयों से कच्चा घर 

मिलके  पटवारियों ने काट दिया 


इक हकीकत भरी कहानी को 

कुछ अदाकारियों ने काट दिया


***


Sunday, June 14, 2026

Greek_Lesson_11_Plural

 ο  μαθητής   - οι μαθητές - Student

ο επιβάτης - οι επιβάτες - Passenger

ο ναύτης - οι ναύτες  - Sailor

ο άντρας - οι άντρες - Man

ο πατέρας - οι πατέρες - Father


ο άνθρωπος -  οι άνθρωποι - Man

ο ουρανός  - οι ουρανοί - Sky

ο δρόμος - οι δρόμοί - Road

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η γυναίκα - οι γυναίκες - Woman

η ώρα  -  οι ώρες - Time

η δραχμή - οι δραχμές - Currency

η αδερφή - οι αδερφές - Sister


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το παιδί  - τα παιδιά - Child

το κρασί  - τα κρασιά - Wine

το δέντρο - τα δέντρα - Tree

το βουνό - τα βουνά - Mountain 

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ο σκύλος   - Dog

η σκύλα 

το σκυλί


ο γάτος  - Cat 

η γάτα - Female cat 

το γατί 


το αγόρι  - Boy 

το κορίτσι - Girl 

Το ξενοδοχείο - Hotel 

πολύς , πολλή  , πολύ - Many 

κάθε  - each , every 

το δωμάτιο - room 

το μπάνιο - bath 

όλος ,όλη ,όλο - all 

το σύστημα κλιματισμού - air conditioning 

το ισόγειο - ground floor 

το εστιατόριο - restaurant 

η καφετιρία - cafeteria 

το προσωπικό - staff

φιλικός , φιλική , φιλικό - friendly 

το περιβάλλον - atmosphere , environment 

ευχάριστος , ευχάριστη , ευχάριστο  - Pleasant 

Friday, June 12, 2026

Greek _ Polite _ Expressions

 Δεν μου λέτε παρακαλώ - Please tell me 

Χαιρετίσματα - Greetings 

Χρόνα πολλά - Many Happy returns 

Επίσης - Same to you 

Αντίο σας - Good Bye 

Καλή αντάμωσι - Good bye till we meet again 

Συγχαρητήρια - Congratulations 

Περαστικά σας - Get well soon 

Περάστε - After You 

Στήν υγειά σας  - To your health 

Αυ έχετε τήν καλωσύνη - would you be so kind 

Μου κάνετε μία χάρι - Do me a favour 

Εύχαρίστως - Gladly 

Καλή έπιτυχία - Good luck 

Άσφαλώς - Certainly 

Καλό ταξίδι - Have a Nice trip 

Greek_Lesson_10



Personal Pronouns 


αυτά - It all εγώ - I 

εσύ - You

αυτός - He 

αυτή - She 

αυτό - It 

εμείς - We 

εσείς - You all 

αυτοί - He All 

αυτές - She all 




Κανένα -  any / some / nobody /none 

Το χιλιόμετρο - The Kilometer 

Το εστιατόριο - Restaurant 

Το λεωφορείο - Bus

Το φλυτζάνι - The cup  

σκέτος - η -ο  - unsweetened  / plain 

χωρίς - without 

Το γαλα - Milk

Το τσαι - Tea 

Το  λεμόνι - Lemon 

η φρυγανιά - The toast 

Το μέλι - The honey 

κρύος - α-ο

διψω - I am thirsty 

η δραχμή - Singular 

οί δραχμές - Plural 

κρίμα - It's pity 

διότι - Because 

Το κουλούρι - The doughnut

Το ψωμί - Bread 

η μαρμελάδα - Marmalade - Jam 

η δραχμή - Singular

οί δραχμές - Plural

Το πουρμπουάρ - Tip 

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Αυτό είναι πολύ ακριβό . - It is very expensive .


Αυτός  θέλγει καφέ . - He wants coffee .


Η ώρα είναι δύο . -  It is 2' o clock .


Που είναι το λεωφορείο ; Where is the bus ?





Thursday, June 11, 2026

Testimonial

आदरणीय इन्दुकान्त आंगिरस : साहित्य, संस्कृति और भाषा के देदीप्यमान हस्ताक्षर


आधुनिक हिंदी और भारतीय साहित्य के आकाश में श्री इन्दुकान्त आंगिरस एक ऐसी विरल साहित्यिक चेतना हैं, जिन्होंने अपनी बहुमुखी प्रतिभा से सारस्वत साधना को नए आयाम दिए हैं। वे एक निष्प्रभ लकीर के फकीर न होकर एक युगांतरकारी लेखक, कालजयी कवि, प्रखर संपादक, सूक्ष्मदृष्टि कहानिकार और सिद्धहस्त अनुवादक हैं।शब्दों के माध्यम से समाज को नई दिशा देने वाले, साहित्यिक शुचिता और बौद्धिक श्रेष्ठता का अनूठा संगम हैंl समृद्ध भाषाओं के अगाध ज्ञाता। 


इन्दुकान्त आंगिरस जी का भाषाई समन्वय उनकी रचनाओं में साफ झलकता है। उनकी लेखनी किसी एक विधा की दासी नहीं, बल्कि उन्होंने काव्य और गद्य दोनों ही क्षेत्रों में अनेकों उत्कृष्ट पुस्तकों की रचना करके मां भारती के भंडार को समृद्ध किया है। एक संपादक के रूप में जहां उन्होंने साहित्यिक मानदंडों को परिष्कृत किया, वहीं एक अनुवादक के तौर पर विभिन्न संस्कृतियों और भाषाओं के सेतु बने हैं। आप समकालीन साहित्य के एक जाज्वल्यमान नक्षत्र हैं जो  बहुआयामी सृजनशीलता के जीवंत प्रतीक हैं l उनकी पुस्तकों की सुदीर्घ श्रृंखला इस बात का प्रमाण है कि वे निरंतर माँ सरस्वती की अनवरत साधना में लीन हैं l अंत में यदि मैं ये लिखूं कि  जहां गद्य की गंभीरता और काव्य की तरलता एक साथ आकर मिलती है उस संगम स्थल का नाम है श्री इंदुकांत अंगिरस तो अतिश्योक्ति नहीं होगी l


डॉ. नीता रानी

नॉएडा , उत्तर प्रदेश 


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एक साहित्यिक नाम  : इन्दुकांत आंगिरस 

इन्दुकांत आंगिरस जी जैसे सहयोगी मित्र के लिए शब्द केवल धन्यवाद नहीं, सम्मान और आत्मीयता से निकलने चाहिए। कुछ लोग जीवन में यूं ही नही आते,वे हमारी यात्रा के सहयात्री बन जाते हैं।मेरी साहित्यिक यात्रा में इन्दुकांत आंगिरस जी का स्थान भी कुछ ऐसा ही है।जब शब्दों को दिशा की आवश्यकता हुई,उन्होंने मार्गदर्शन दिया; जब कदमों में संकोच आया, उन्होंने विश्वास जगाया;और जब मेरी रचनात्मक यात्रा में कोई कठिन मोड़ आया, उन्होंने बिना किसी स्वार्थ के मेरा साथ दिया। साहित्य की राह आसान नहीं होती,यहाँ प्रशंसा से अधिक आवश्यक होता है सच्चा सहयोग, सही सलाह और हौसला देने वाला एक अपना। इन्दुकांत जी ने मुझे ये तीनों चीजें हमेशा दीं। उनका सहयोग मेरे लिए केवल सहायता नहीं, बल्कि मेरी साहित्यिक यात्रा को बल  मिला एक विश्वासपूर्ण अच्छे इन्सान  जिसने मुझे आगे बढ़ने का साहस दिया। इन्दुकांत जी, आपका आभार शब्दों में बाँधना कठिन है, बस इतना कहूँगी मेरी साहित्यिक यात्रा के पन्नों में आपका नाम सदैव सम्मान और आत्मीयता से लिखा रहेगा। 


प्रीति राही

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भाई इंदुकांत आंगिरस जी से मेरी दोस्ती चार दशक से भी ज़्यादा पुरानी है। बंधुवर अनिल 'मीत' के माध्यम से 'परिचय' की   नई दिल्ली स्थित रशियन कल्चरल सेंटर में  आयोजित एक गोष्ठी में इनसे परिचय  हुआ। हमारे दो शौक़ सांझे निकले - एक तो कविता - शायरी और दूसरा फोटोग्राफी। इस कारण यह परिचय मित्रता का रूप ले बैठा। इनकी खनकती हुई आवाज़ में कविताएं सुनना अपने आप में ही आनंददायक है। कविताओं का विषय - वैविध्य और समसामयिक समस्याओं को उजागर करने का इनका अंदाज़, इनकी भाषा शैली सुधी पाठकों के मन को छू जाती है।  इसके साथ -साथ सोशल - मीडिया प्लेटफॉर्मों के द्वारा भी इंदु भाई साहित्य- सेवा कर रहे हैं - समकालीन कलमकारों को एक मंच पर साथ लाने का इनका अनवरत प्रयास सराहनीय है। इनकी ऊर्जा बनी रहे और एक दीर्घावधि तक इनकी साहित्य-साधना निर्बाध चलती रहे, ईश्वर से यही प्रार्थना है🙏-------------------------

Subhash Premi 

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इंदुकांत जी जैसा नान वैसा ही काम 

इंदुकांत जी से मेरी मुलाक़ात एक पब्लिशर के तौर पर हुई थी तब मुझे लगा कि आप शायद केवल एक पब्लिशर ही होंगे किंतु मैंने उनमे ना जाने कितनी विधाओं के गुण देखे मैं अपने बाल गीतों के संकलन को एक बेहतर बुक का रूप देना चाहती थी जिसके लिए मुझे भटकना भी पड़ा किंतु हमारे ग्वालियर शहर के प्रसिद्ध गजल कार श्री राम अवध विश्वकर्मा जी की पुस्तक हाथी दादा देखकर लगा कि अब मुझे भटकना नहीं पड़ेगा मेरी बाल पुस्तक को ही नहीं अपितु अन्य पुस्तकों को भी जैसे उनका घर मिल गया और मैंने श्री इंदुकांत जी से सम्पर्क किया मुझे कुछ और बताने की जरुरत ही नहीं पड़ी उन्होंने मेरे गीतों को इतना सुन्दर कलेवर दिया कि सभी ने तारीफ की दरअसल ये तारीफ श्री इंदुकांत जी की ही थी ज़ब मैने उनके बारे में और अधिक जानना चाहा तो वो गुणों की खान निकले वे एक साहित्यिक परिवार से सम्बन्ध रखते हैं उन्हें कई विदेशी भाषाओं का ज्ञान हैँ और वे इसे लोगों को समर्पित करना चाहते हैँ उन्हें लगता हैँ कि विदेशी भाषा पर सभी की पकड़ हो इससे सीखने वाले को भी विदेशी भाषा के प्रति सरलता का बोध होता हैँ श्री इंदुकांत जी सनद फाउंडेशन से भी जुड़े हैँ जो कई संस्थाओ को कम से कम दाम पर पुस्तकें उपलब्ध कराती है 

मुझे लगता हैँ कि आज के दौर में अभी भी ऐसे लोग विद्यमान हैँ जो इतने अधिक कामों में निपुण होते हुए भी सहजता से किसी के ह्दय में अपना स्थान बना लेते हैँ जबकि आज कल कई ऐसे लोगों की भरमार हैँ जो किसी का भी विश्वास सहज ही तोड़ने में माहिर होते हैँ ऐसे में मैंने सचमुच जाना की इंदुकांत जी इस भ्र्म को तोड़ने में अहम भूमिका निभाते हैँ 

फ्रॉड से भरी इस दुनियाँ में बहुत ही असमंजस का रास्ता भी देखा हैँ मैने 

किंतु जैसे अब मेरी बुक्स को उनका गॉड फादर मिल गया हैँ सो मैं एकदम आश्वस्त हूं कि मेरी बुक्स को उनका मनचाहा रूप मिल सकेगा.


दीपज्योति गुप्ता 

ग्वालियर

Deepjyoti - Gwalior 


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प्रिय श्री इंदुकांत आंगिरस जी को मैं पिछले 30-35 वर्षों से जानता हूं। उनकी पहचान एक संवेदनशील  साहित्यकार और एक श्रेष्ठ अनुवादक के रूप में रही है।  उन्होंने कहानियों पर भी काफी महत्वपूर्ण काम किया है । संपादन से भी वह जुड़े रहे हैं।और उनका जो सबसे बड़ा काम मुझे लगता है कि उनके अंदर साहित्यिक समुदाय को जोड़ने की एक विलक्षण क्षमता है। मुझे याद है कि एक समय जब रशियन कल्चरल सेंटर ने परिचय नाम की एक संस्था शुरू की थी तो इंदुकांत ही उसके मुख्य आयोजक रहे । उनके समय में परिचय ने काफी काम किया । खासकर युवाओं और वरिष्ठ लेखकों को एक मंच पर लाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। सबको एक दूसरे से सीखने का मौका मिलता था। उसके बाद वह कुछ वर्ष विदेश में रहे । वहां से आने के बाद उन्होंने राष्ट्रभाषा और साहित्य की सेवा के माध्यम से साहित्यिक मित्रों को जोड़ना शुरु किया। मैं देख रहा हूं कि वह सनद जैसी संस्था के संस्थापक हैं। वह ikangiras.in जैसी वेबसाइट और अदबी यात्रा नामक चैनल के माध्यम से साहित्य की सेवा कर रहे हैं। उनकी वेबसाइट है जो उनके व्यक्तिगत वेबसाइट है जिस पर साहित्यिक लेखन के साथ,साहित्यिक कार्यक्रमों के आयोजन, साहित्य से जुड़ी चर्चाओं को स्थान दिया जाता है । अदबी यात्रा में नाम वह साहित्यकारों से पाठकों का परिचय कराते हैं। और मैं देखता हूं कि बहुत ही सरल ,-सहज भाव से वह अपना काम किये जा रहे हैं । उन्हें किसी से कुछ पाने की अपेक्षा भी नहीं रहती । वह सिर्फ चरैवति चरैवति यानी चलते रहो  के सिद्धांत पर पूरी तरह अमल करते हैं । मैं हिंदी के इस सेनानी को प्रणाम करता हूं ।

- Subhash Chander 

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2007 में बेटे बहू के पास बंगलुरु आते जाते रहने और  वहाँ की साहित्यिक संस्था 'साहित्य साधक मंच'  के कार्यक्रमों में जाने के कारण भाई इंदुकांत से परिचय हुआ जो आज भी कायम है । इस दौरान मैनें पाया कि वे निहायत ही सरल, सीधे और विनम्र इंसान हैं जो किसी का दिल नहीं दुखा सकते । कभी भी अपने बारे में बड़ी बातें नहीं करते और सदैव सक्रिय रहते हैं  ।

Ramesh Joshi 

Chief editor - VISHWA 

International Hindi Magazine 

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कवि • साहित्यकार • अनुवादक संस्थापक-अध्यक्ष, सनद फाउंडेशन


श्री इन्दुकांत आंगिरस से मेरा परिचय उनके बचपन के दिनों से है। बचपन से ही उनमें हिंदी भाषा और कविता के प्रति गहरा अनुराग और शब्दों के प्रति असाधारण संवेदनशीलता दिखाई देती थी।कम उम्र में ही वे कविताएँ लिखने लगे थे और उनमें सहज काव्य-बोध तथा कल्पनाशीलता स्पष्ट दिखाई देती थी।समय के साथ यही बाल-सुलभ रुचि एक गंभीर और निरंतर साहित्य-साधना में विकसित हुई।उनकी रचनात्मकता का संसार मानवीय संवेदनाओं, प्रकृति, स्मृतियों, जीवन की विडंबनाओं और सामाजिक सरोकारों से समृद्ध है। उनके कविता-संग्रह ‘शहर और जंगल’ में उनकी विशिष्ट काव्य-दृष्टि के विविध आयाम दिखाई देते हैं।उनकी साहित्यिक पहचान का एक महत्वपूर्ण पक्ष उनका अनुवाद-कर्म भी है, विशेषकर हंगेरियन साहित्य को हिंदी पाठकों तक पहुँचाने का उनका प्रयास।उनके लिए अनुवाद केवल भाषा-परिवर्तन नहीं, बल्कि भाव, संस्कृति और संवेदना के बीच एक सेतु का निर्माण है।कविता, कहानी और अनुवाद के साथ साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में उनकी सक्रिय भागीदारी उनकी बहुआयामी प्रतिभा को दर्शाती है।साहित्य उनके लिए केवल अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि मनुष्य और समाज को समझने तथा अधिक संवेदनशील बनाने का माध्यम है। इसी साहित्यिक प्रतिबद्धता का विस्तार सनद फाउंडेशन के माध्यम से उनके कार्यों में दिखाई देता है।बचपन में शब्दों से शुरू हुई उनकी यात्रा आज एक परिपक्व और विशिष्ट साहित्यिक पहचान का रूप ले चुकी है।उनकी कलम संवेदना, विचार और सौंदर्य को अभिव्यक्ति देती हुई हिंदी साहित्य को निरंतर समृद्ध कर रही है।

इन्दुकांत आंगिरस जी की साहित्य-साधना उस विश्वास की यात्रा है कि शब्द केवल लिखे नहीं जाते—वे जिए जाते हैं, महसूस किए जाते हैं और फिर पाठक के हृदय तक पहुँचते हैं।


उनकी कलम इसी तरह संवेदना, विचार और सौंदर्य को अभिव्यक्ति देती रहे; हिंदी साहित्य को समृद्ध करती रहे और विभिन्न भाषाओं एवं संस्कृतियों के बीच संवाद का सेतु बनाती रहे—यही मेरी आत्मीय शुभकामना है।

Bharati Paliwal 

Vasant Vihar , Delhi 

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-इन्दुकांत आंगिरस जी के व्यक्तित्व में  बहुसांस्कृतिक सहज तत्व देखे जा सकते हैं। सर्वाधिक रोचक जो तत्व इनमें मुझे आकर्षित करता है वह है इनकी बोल-चाल में, हाव-भाव में रची-बसी मिर्ज़ा ग़ालिब वाली दिल्ली की सादगी और सुगन्ध। अपनी बात को सरल मन से प्रस्तुत करते हैं। प्रायः कुछ न कुछ नया करने की वृत्ति इन्हें असाधारण बनाती है। मेरे पसन्दीदा व्यक्ति हैं। अच्छे मित्र हैं।

डॉ.विनय कुमार सिंघल 'निश्छल'

   गुरुग्राम , हरियाणा 

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इन्दुकांत आंगिरस साहित्य के अध्येता तो हैं ही साहित्य के अच्छे रचनाकार भी हैं।उनके साहित्यिक कार्यों का विस्तार विदेश की कठिन भाषा से हिंदी में सरल अनुवाद प्रस्तुत करने की भी है और दूसरी ओर देश के विभिन्न प्रतिभाओं को आगे लाने में भी उनकी सराहनीय भूमिका रही है। व्यक्ति के रूप में इंदुकांत आंगिरस जी से मैं बहुत प्रभावित रहा हूँ।उन्होंने पुस्तकों का प्रकाशन किया है और हिन्दी साहित्य को समृद्ध बनाने में भी अपना योगदान दिया है।इन्दुकांत आंगिरस दिल्ली और बेंगलुरु के बीच यानी कि उत्तर और दक्षिण के बीच एक समन्वय बिंदु के रूप में हमें दृष्टिगत होते हैं।उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए मंगल कामना।

@ईश्वर करुण, 

महासचिव,तमिलनाडु हिन्दी साहित्य अकादमी,चेन्नै-26

ईमेल ishwarkarunchennai@gmail.com

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श्री इंदुकांत आंगरिस मेरे 25-26 पुराने अन्यतम मित्र हैं। आपके सौजन्य से मेरे पहले उपन्यास मशाल जलती रहे का लोकार्पण रशियन कल्चर सेंटर,नई दिल्ली सभागार में हुआ था।आप पूरी तरह साहित्य के लिए समर्पित हैं। कविता, कहानी और अनुवाद में आपको प्रवीणता प्राप्त है। विदेशी भाषा विशेष रूप से हंगेरियन भाषा के साहित्य को भारत में लोकप्रिय बनाने का आपको श्रेय प्राप्त है।

आकाशवाणी से सेवानिवृत्ति के उपरांत जब मैंने शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार से संबद्ध राष्ट्रीय संस्था नागरी लिपि परिषद, राजघाट नई दिल्ली के महामंत्री पद का दायित्व मैंने संभाला।इंदुकात जी ने नागरी लिपि परिषद द्वारा समय समय पर आयोजित बहुभाषी राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय काव्य गोष्ठियों में सक्रिय भागीदारी निभाई। जब भी आवश्यकता पड़ी, इन्होंने इन काव्य गोष्ठियों का संयोजन और संचालन भी किया। शुद्ध साहित्यिक कविताएं लिखना इनको भाता है।यही कारण है कि यह साहित्य के किसी गुट से परे रहकर एकांत भाव से साहित्य सृजना कर रहे हैं। मूल श्री इंदुकांत आंगरिस मेरे 25-26 पुराने अन्यतम मित्र हैं। आपके सौजन्य से मेरे पहले उपन्यास मशाल जलती रहे का लोकार्पण रशियन कल्चर सेंटर,नई दिल्ली सभागार में हुआ था।आप पूरी तरह साहित्य के लिए समर्पित हैं। कविता, कहानी और अनुवाद में आपको प्रवीणता प्राप्त है। विदेशी भाषा विशेष रूप से हंगेरियन भाषा के साहित्य को भारत में लोकप्रिय बनाने का आपको श्रेय प्राप्त है।

आकाशवाणी से सेवानिवृत्ति के उपरांत जब मैंने शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार से संबद्ध राष्ट्रीय संस्था नागरी लिपि परिषद, राजघाट नई दिल्ली के महामंत्री पद का दायित्व मैंने संभाला।इंदुकात जी ने नागरी लिपि परिषद द्वारा समय समय पर आयोजित बहुभाषी राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय काव्य गोष्ठियों में सक्रिय भागीदारी निभाई। जब भी आवश्यकता पड़ी, इन्होंने इन काव्य गोष्ठियों का संयोजन और संचालन भी किया। शुद्ध साहित्यिक कविताएं लिखना इनको भाता है।यही कारण है कि यह साहित्य के किसी गुट से परे रहकर एकांत भाव से साहित्य सृजना कर रहे हैं। मूल दिल्ली  के वासी होने के नाते आपके व्यक्तित्व में सहजता और सरलता समाहित है।  मैं इनके सुखी, स्वास्थ्यप्रद और समृद्ध जीवन की कामना करता हूं।



डॉ हरिसिंह पाल 

महामंत्री - नागरी लिपि परिषद, राजघाट, नई दिल्ली 

संपादक - न्यूयॉर्क अमेरिका से प्रकाशित वैश्विक हिंदी पत्रिका सौरभ

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To Indukant Angiras Sir,

From Misha


A very courteous man, a lifelong learner, a socially conscious and versatile poet, a polyglot, an inspiring mentor, always ready to help, and a wonderful friend—this is all I can recall at the moment, though there is so much more that words cannot fully capture.

He inspires me through his experiences, his poetry, his ideas, and his aspirations. Every conversation with him leaves me with something new to think about and learn. I genuinely enjoy his company and feel fortunate to have his guidance and friendship.

I am truly grateful for this warm and enriching intergenerational friendship. It is a privilege to know him, and I hope to continue learning from him for many years to come.

Misha Sindhu 

Delhi

 Kalaripayattu Expert

Gold Medalist

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From Alka Soi 


Shri Indukant Angiras,the  founder of  Sanad Foundation is a  man with  so many  qualities. He is a  writer himself  but  he  takes  so much  initiative to  promote  others. 

I can  say that  because  he is  always  there to  help me getting  promotions in  singing and  writing. A big  clapping for  the  great   man with a  loving  heart. God  helps  those who  help  others.

Alka Soi 

Daughter of Devendr Satyarthi 

Delhi 

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 एक मुलाकात साहित्यकार इंदुकांत के साथ - राही राज़, बेंगलुरु। फर्स्ट एडिटर            इंदुकांत अंगिरस मस्त मौला इंसान हैं ।

           जिंदगी में अब तक बहुत दोस्त मिले, बहुत सारे मुझे साहित्यकारों से मेरी मुलाकात हुई,कुछ छूट गए , कुछ साथ चले। कुछ छूटकर भी नहीं छुटे , बेशक बातें कभी कदाल होती है, मगर उनके साथ यादें बहुत रहती हैं,उन्हीं यादों में से एक हमारे अजीज दोस्त हैं इंदुकांत अंगिरस । जिन्हें हम भूलना भी गर चाहें तो नहीं भूल सकते हैं। 

         हमें आज भी याद है उनका चेहरा,जब वो मुझे साहित्य साधक मंच की मासिक गोष्ठी में मिले थे , शेरो शायरी के शौकीन और एक अलग व्यक्तित्व के मालिक , बहुत ही खूबसूरत अंदाज और उनके पढ़ने का तौर तरीका पहली ही नजर में मुझे ना जाने क्यूँ अच्छा लगने लगा ।  

     मस्त मौला इंदुकांत के चेहरे पर हमने कभी भी मायूशी नहीं देखी और ना ही कभी कंजूसी कभी देखी , पैसा रहे ,ना रहे,सदा मग्न में रहते हैं। ओरेकल कंपनी से रिटायरमेंट के बाद, यहीं उन्होंने अपना आशियाना बनाए रखा और अनवरत साहित्य साधक बनकर सेवा आज भी कर रहे हैं। 

      पहले बंगलोर में ही रहते थे, और इसी दरम्यान इनसे बहुत गहरी दोस्ती हो गई, अगर हम सच कहें तो हमदोनों दो जिस्म एक जान हो गए । 

      इनकी पुस्तक की दुकान थी हम प्रायः इनके दुकान पर जाया करते थे और साहित्यिक चर्चा किया करते थे, दक्षिण भारत में हिंदी के प्रचार प्रसार के लिए इंदुकांत का योगदान अभूतपूर्ण है। 

      हमने इनके साथ मिलकर सबसे पहले कारवाँ को खोला ,बाद में इनके ही मदद से हमने कलश कारवाँ फाऊंडेशन, बेंगलूरु संस्था की स्थापना की ,जिसमें इंदुकांत जी का योगदान अभूतपूर्ण रहा , संस्थापक सदस्य आज भी हैं। बंगलोर से बाहर रहने के कारण, थोड़ा सा दिक्कत हमें हो रहा है,मगर ये आज भी हमारे दिल में हैं। और हम आज भी इन्हें हमारे मार्गदर्शक और संरक्षक मानते हैं। 

       हमें याद आ रहा है वर्ष 2021 इनके ही पब्लिकेशन से हमने सर्व प्रथम एक पुस्तक भी निकाली, जो साझा संकलन के रूप प्रकाशित हुई थी, पुस्तक का नाम उगता सूरज है,जिसमें पूरे भारत के नामी गिरामी साहित्यकारों की रचना है।

      हमें याद आ रहा है इनकी जीप जो पूरे बंगलोर अकेली थी ,जिस पर हमलोग बैठकर अक्सर घूमने निकल जाया करते थे, बंगलोर का शायद ही कोई कोना होगा , जहाँ हमलोग नहीं घूमने गए होगे। 

      हमसे अगर सच पूछा जाए तो हम स्पष्ट कहते हैं कि आज राही जिस मुकाम को हासिल किया है उसमें इंदुकांत अंगिरस का जबरदस्त हाथ है, चाहे वह किसी प्रकार का हो न तन, मन और धन तीनों से इंदुकांत अंगिरस ने हमें सहायता की है । 

       हम इनके पिताजी से भी दिल्ली निवास पर मिल चुके हैं,हम इनके साथ राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित परम आदरणीय स्वर्गीय श्याम सिंह शशि जी भी मिल चुके हैं। जिन्होंने पहली मुलाकात में ही हमें बहुत कुछ सिखा दिया था। आज वो नहीं है फिर उनकी स्मृति हमारे साथ है। 

      इंदुकांत अंगिरस को गजल में महारथ हासिल है,कविता  और कहानी गजब की लिखते हैं, आज उनकी गिनती गजलकार रूप में की जाती है तो लघु कथा के जनक कहे जाते हैं।

      इंदुकांत हिंदी अग्रेजी और उर्दू  के अलावा भी फ्रेंच भाषा के भी अनुवादक रहें हैं और जानकर रहें हैं। 

       इंदुकांत की जितनी तारीफ हम करें,कम ही होगा ,क्योंकि सर से पांव तक इनमें तारीफ ही तारीफ हमें दिख रही । ईश्वर इन्हें दीर्घायु रखें,यही कामना करता हूँ। 

राही राज़, बेंगलुरु

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नई सुबह की दस्तक 


साझा संकलनों का चलन पुराना हैं। साझा संकलनों की महत्ता हमेशा से रही है और हमेशा रहेगी क्योंकि साझा संकलनों के ज़रिये पाठकों को एक ही पुस्तक में अनेक लेखकों की रचनाएँ पढ़ने को मिल जाती हैं।  यह हर्ष की बात है कि  बैंगलोर की प्रसिद्ध कवयित्री श्रीमती  प्रीती राही  के सम्पादन में " सुप्रभात " साझा  संग्रह प्रकाशित  हो रहा है जिसमें  कविताएँ , गीत ,ग़ज़ल , लघुकथाएँ और लघु कहानियाँ संकलित हैं।  नारी शक्ति को समर्पित इस संग्रह की सभी रचनाकार बधाई के पात्र हैं।  दुनिया की आधी आबादी के नाम दुनिया की दीगर ज़बानों में बहुत कुछ लिखा जा रहा है।  मुझे आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि इस कड़ी में " सुप्रभात " साझा संग्रह अपनी अलग पहचान अंकित कर पायेगा। प्रीती राही द्वारा प्रज्वलित नारी शक्ति की ये मशाल निश्चय ही  इस संसार के अँधेरे को चीर कर नई रौशनी और नई सुबह को इस धरती पर उतारेगी। अनेकानेक शुभकामनाओं  के साथ..

आपका अपना 

इन्दुकांत आंगिरस 

दिल्ली  

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आदरणीय साहित्यकार, अनुवादक, सम्पादक एवं संस्कृतिसेवी श्री इन्दुकांत आंगिरस ‘रसिक देहलवी’ जी के बारे में कुछ शब्द कहना मेरे लिए अत्यंत हर्ष और सम्मान का विषय है।


मैं नेपाल की निवासी हूँ और साहित्य के माध्यम से अनेक भारतीय साहित्यकारों से परिचित होने का अवसर मिला है। उन्हीं में एक अत्यंत आत्मीय, विनम्र और प्रेरणादायी व्यक्तित्व हैं – श्री इन्दुकांत आंगिरस ‘रसिक देहलवी’ जी।


रसिक जी केवल एक कवि नहीं हैं, बल्कि वे साहित्य, भाषा और संस्कृति को जोड़ने वाले एक सेतु हैं। हिन्दी, अंग्रेज़ी, उर्दू, हंगेरियन, ग्रीक, चेख तथा लिथुआनियन जैसी अनेक भाषाओं का उनका ज्ञान उनके व्यापक अध्ययन और साहित्यिक समर्पण का परिचायक है। कविता, लघुकथा, अनुवाद और संपादन  हर क्षेत्र में उनका योगदान उल्लेखनीय है।


उनके कविता-संग्रहों में संवेदना, प्रेम, स्मृति, जीवन-दर्शन और मानवीय अनुभूतियों की सुंदर अभिव्यक्ति दिखाई देती है। वहीं दूसरी ओर, हंगेरियन, अरबी और लिथुआनियन साहित्य के अनुवादों के माध्यम से उन्होंने विभिन्न देशों की सांस्कृतिक धरोहर को हिन्दी पाठकों तक पहुँचाने का महत्वपूर्ण कार्य किया है। यह केवल साहित्यिक उपलब्धि नहीं, बल्कि संस्कृतियों के बीच संवाद स्थापित करने का एक सराहनीय प्रयास है।


मुझे व्यक्तिगत रूप से उनकी एक विशेषता अत्यंत प्रभावित करती है—वे नए और उभरते हुए लेखकों को खोजते हैं, उन्हें मंच प्रदान करते हैं और निरंतर प्रोत्साहित करते हैं। आज के समय में जब साहित्यिक जगत में मार्गदर्शन की आवश्यकता बढ़ती जा रही है, तब रसिक जी जैसे वरिष्ठ साहित्यकारों का स्नेह और सहयोग अनेक नवोदित रचनाकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनता है।


उन्होंने मेरा भी साक्षात्कार लिया, मेरे विचारों को सुना और साहित्यिक संवाद का अवसर प्रदान किया। यह केवल एक औपचारिक बातचीत नहीं थी, बल्कि साहित्य और मानवीय संबंधों को जोड़ने वाला आत्मीय अनुभव था। उनके व्यवहार में जो विनम्रता, अपनापन और सम्मान का भाव है, वही उन्हें विशेष बनाता है।


‘परिचय साहित्य परिषद्’ और ‘सनद फाउंडेशन’ जैसी संस्थाओं के माध्यम से वे साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों को निरंतर आगे बढ़ा रहे हैं। संपादक, आयोजक, अनुवादक और साहित्यकार के रूप में उनकी बहुआयामी भूमिका साहित्य-जगत के लिए अत्यंत मूल्यवान है।


मेरा मानना है कि किसी भी साहित्यकार की सबसे बड़ी पहचान केवल उसकी प्रकाशित पुस्तकें नहीं होतीं, बल्कि वे लोग होते हैं जिनके जीवन को उसने प्रेरित किया हो। इस दृष्टि से रसिक देहलवी जी अनेक रचनाकारों के लिए प्रेरणा, मार्गदर्शक और आत्मीय साथी हैं।


नेपाल और भारत के बीच सदियों पुराना सांस्कृतिक और साहित्यिक संबंध रहा है। रसिक जी जैसे साहित्यकार इस संबंध को और अधिक सुदृढ़ बनाते हैं। मैं उनके प्रति अपनी हार्दिक श्रद्धा, सम्मान और शुभकामनाएँ व्यक्त करती हूँ। उनके  स्वस्थ, सक्रिय और सृजनशील जीवन तथा आने वाले वर्षों में भी साहित्य, भाषा और संस्कृति की सेवा इसी समर्पण के साथ करते रहें।


आदरणीय रसिक देहलवी जी को मेरा सादर प्रणाम।

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प्रियवर 1956-57 से बाल-चेष्टा के रूप में कुछ ऐसे वैसे ही लिखने की शुरुआत हुई जो सामान्य रूप से विभिन्न विधाओं में कच्चे-पक्के रूप में उस समय के अनेक  पत्र-पत्रिकाओं में छपीं और पोरबंदर से पोर्टब्लेयर तक के आवास-प्रवास में बिलाती भी गईं । कभी स्मरण करके पुस्तकाकार आईं तो वे भी आपके साथ साझा की जाएंगी ।  1990 के उदारीकरण और मुक्त बाजार ने आतंकित किया, जिज्ञासा जगाई और फिर जो कुछ लिखा गया वह पत्र-पत्रिकाओं में छपना  शुरू हुआ और कालांतर में पुस्तकाकार आना भी शुरू हुआ । लेकिन इस लेखन में अपने समय की दैनंदिन ज़िंदगी और उसकी जद्दोजहाद ज्यादा थी । लगा जैसे लेखन ने कहीं प्रतिरोधात्मक पत्रकारिता का रूप ले लिया है जो कभी कुण्डलिया छंद में तो कभी पत्र और कभी एक छाया पात्र तोताराम के साथ संवाद में प्रकट होने लगा ।अपने समय से आँख चुराकर शाश्वत की कल्पना का कोई अर्थ मुझे नहीं लगा ।  इसमें चूँकि सामयिक विडंबनाओं से संघर्ष था तो उसके बरक्स शाश्वत मानवीय मूल्यों को भी प्रकारांतर से आना ही था । इसी तरह चलते-चलते कुण्डलिया छंद, पत्र, तोताराम से संवाद और कुछ फुटकर छंदबद्ध गीतिकाओं के रूप में 25-30 पुस्तकें आ गईं । कुछ पुस्तकें आपको भेज रहा हूँ । मेरे अनुसार आप सकारात्मक विचारों के सुचालक हैं और आपके माध्यम से इन विचारों का किसी न किसी प्रकार समाज में संचरण-संरक्षण भी अवश्य होगा । समय निकालकर पढ़ने का कष्ट करें और उस विचार के साथ जुड़ें जो हमारे समय और समाज की वर्तमान और दीर्घकालिक आवश्यकता है । पढ़ने के बाद अपने सर्किल में साझा करें और अंततः किसी पुस्तकालय में पहुँचा सकते हैं । शायद वहाँ भी कोई पढ़ने वाला बचा हो । जब षड्यन्त्रकारी सहजता से एकजुट हो सकते हैं तो शुभकामी क्यों नहीं । आपका मैं, रमेश जोशी

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जब से परिचय हुआ है इन्दुकांत आंगिरस जी का साहित्यिक व्यक्तित्व मुझे हमेशा सक्रियता की एक ऐसी मिसाल लगा है जो बहुत ही जीवंत और प्रेरणादायी है। अनेक भाषाओं के ज्ञाता और अनेक विधाओं में अपना निरंतर रचनात्मक सहयोग देने वाले ये हमारे प्रिय और महत्वपूर्ण लेखक हैं। अनुवाद और सम्पादन के क्षेत्र में भी इनका उल्लेखनीय योगदान है। अभिव्यक्ति की नयी तकनीक से जुड़े हुए हैं।  मुझे पूरा विश्वास है कि साहित्य के विभिन्न क्षेत्रों में इनका योगदान हमें समृद्ध करता रहेगा। 

दिविक रमेश , दिल्ली।  

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लेखन और पत्रकारिता के क्षेत्र की अज़ीम शख़्सियत  है इन्दुकांत आंगिरस । 
  राजधानी नई दिल्ली में पैदा हुए और पले बड़े हुए ; बैंगलोर को अपनी कर्मभूमि बनाने वाले वरिष्ठ साहित्यकार  इन्दुकांत अंगिरस आज के वैज्ञानिक युग में लेखन, पत्रकारिता, पुस्तक समीक्षा और प्रकाशन के क्षेत्र में अपनी अमित छाप छोड़ रहे हैं। वह पिछले कई वर्षों   से अपने आप को स्थापित करने के लिए कड़े संघर्ष का सामना कर रहे हैं। लेकिन फ़िर भी उन्हें अभी तक अपनी प्रतिभा और अनुभव के अनुसार वह सफलता नहीं मिल पाई है जिसके सही मानों में वह हक़दार है। मैं व्यक्तिगत तौर पर इन्दुकांत आंगिरस जी को पिछले 2-3 साल से जानता हूँ । वह एक अच्छी सूझ - बूझ वाले दूरदर्शी, प्रतिभावान, अनुभवी, परिश्रमी और संघर्षशील व्यक्ति हैं। वह परिचय साहित्य परिषद् , दिल्ली  एवं  सनद फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष और पुस्तकम प्रकाशन  के मालिक  हैं।

डॉ सैयद अली अख़्तर नक़वी 
अध्यक्ष - हिन्दी - उर्दू अदबी संगम , दिल्ली 
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एक कवि, एक शायर और बेमिसाल  के मालिक हैं "इंदुकांत आंगिरस जी".*मैं व्यक्तिगत रूप से उनसे कभी नहीं मिली हूँ पर हाँ, एक दो बार फोन पर उनसे बात ज़रूर हुई है. इंदुकांत जी कवि, लेखक व साहित्यकारों के नि:शुल्क साक्षात्कार लेते हैं और उनको एक नई पहचान देते हैं.*मैने ऐसे ही एक महिला लेखिका, कवयित्री व साहित्यकार का इंटरव्यू देखा था तब मैं इंदुकांत जी से बहुत प्रभावित हुई थी.*ऐसे ही एक चैनल के माध्यम से मेरी आवाज़ उन तक पहुची थी तब उन्होनें मेरी आवाज़ की न केवल प्रशंसा की थी बल्कि मेरा उत्साह/ हौंसला भी बढाया था.फिर एक दो बार कार्यक्रमों के माध्यम से उनसे बात- चीत का सिलसिला शुरू हुआ जो आज भी कायम है. एक अच्छी सोच रखने वाले इंदुकांत आंगिरस जी के बारे में मैं केवल इतना ही कहना चाहूगीं कि..... 

बिना कहे कुछ भी वो सब समझ जाते हैं,
मदद के लिए सभी की हाज़िर वो हो जाते हैं.
एक बार कोई मिल ले उनसे अगर,
चेहरो को याद हमेशा वो रख जाते हैं.
आशाओं से भर देते हैं मिलने वालों/दोस्तों को,
मार्गदर्शन वो फिर सबका कर जाते हैं.
मांगते नहीं कुछ किसी से भी पर, 
अपनी दुआएँ वो सबको दे जाते हैं.
शुक्रिया धन्यवाद आभार 
शाहाना परवीन 'शान'... ✍️
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इंदु कांत मेरी नज़र में -
पुरानी मुलाक़ात तो नहीं कह सकता लेकिन नई भीं तो नहीं है, ऐसे मस्त मौल साहित्यकार कवि और साहित्य प्रेमी कि साहित्य यात्रा सचमुच काबिले तारीफ़ ही है कि ख़ुद को आरो के लिये समर्पित करना जिनकी सब से बड़ी खासियत है. आज के दौर में इंदु कांत जैसे अदब नवाज़ सरफिरो का अलग ही मुकाम है.

- डॉ विजेंद्र ग़ाफ़िल 
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बहुमुखी प्रतिभा की धनी सुश्री मिशा सिंधु एक युवा कवयित्री हैं।  Kalaripayattu  कला में गोल्ड मैडल विजेता।  देश - विदेश में अनेक पुरस्कारों से सम्मानित।  कविता के साथ साथ Kalaripayattu  का शिक्षण ।  दिल्ली में BA की छात्र। 


मिशा सिंधु 

Lifetime  Trustee 

Sanad फाउंडेशन

दिल्ली 

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 श्रुतिकान्त आंगिरस  , दिल्ली में जन्मे श्री श्रुतिकान्त आंगिरस एक समर्पित सामाजिक कार्यकर्त्ता है। समय समय पर सामाजिक संस्थाओं की तन - मन - धन से सेवा करते रहते है। 

 श्रुतिकान्त आंगिरस

Life Time Trustee
Sanad Foundation 

Delhi 


[6:57 PM, 8/18/2026] Savita चढ़ा: हरियाणा गौरव डॉ सविता चड्ढा

[7:00 PM, 8/18/2026] Savita चढ़ा: 1982 से साहित्य सृजन कर रही डॉ सविता चड्ढा की 55 पुस्तकें विभिन्न विषयों पर प्रकाशित हैँ. 1987 में आपको हिंदी अकादमी का साहित्यिक कृति सम्मान,साहित्य अकादमी पंचकुला से  2022 में हरियाणा गौरव सम्मान के आलावा राष्ट्रीय,  अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 80 से अधिक सम्मान प्राप्त हैं. आपका नाम विश्व के 100 हिंदी साहित्यकारों की सूची में शामिल है. आपके लेखन पर कई विश्वविद्यालय में शोध हो चुके हैं,  हो रहे हैं  आपकी पत्रकारिता की कई पुस्तकें विभिन्न विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में संस्तुत हैं.

डॉ सविता चड्ढा

Life Time Trustee 

उपाध्यक्ष 

सनद फाउंडेशन  

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अलीगढ के नज़दीक जलाली कसबे में जन्मे श्री शिवनलाल जलाली हास्य - व्यंग्य के सशक्त हस्ताक्षर है।  इंदुकान्त आंगिरस के साथ मिलकर परिचय साहित्य परिषद् की स्थापना करी। परिचय साहित्य परिषद् का पहला ऐतिहासिक  कार्यक्रम इनके निवास स्थान " टुनिसिअन एम्बेसी " वसंत विहार , दिल्ली में संपन्न हुआ।  कविता संग्रह " विक्रम का इन्तिज़ार " और कहानी संग्रह " मलाल " प्रकाशित। सनद फाउंडेशन , दिल्ली के लाइफ टाइम ट्रस्टी। 

शिवनलाल जलाली

Life Time Trustee 

महासचिव , सनद फाउंडेशन  

सोनिया विहार , दिल्ली 

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परिचय साहित्य परिषद् , दिल्ली और सनद फाउंडेशन ,  दिल्ली के संस्थापक।  लगभग 30 वर्षों तक परिचय साहित्य  परिषद् के महासचिव के पद पर कार्यरत। लगभग 25 वर्षों तक अँगरेज़ी अख़बार " The Statesman " में कार्य किया। 11 वर्षों तक " ORACLE " , Bangalore में कार्य किया। शिक्षा - PGBM , लगभग दर्जन भर एकल और साझा संग्रह प्रकाशित।  ऑनलाइन पत्रिका और ऑनलाइन यूट्यूब चैनल का प्रसारण। वसुधैव कुटुंबकम में विशवास रखते हुए इस संसार को साहित्य कला और संस्कृति के माध्यम से अधिक सुन्दर बनाने में निरंतर प्रयासरत। 

इन्दुकांत आंगिरस 

संस्थापक - अध्यक्ष 

सनद फाउंडेशन 

दिल्ली    

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Tuesday, June 9, 2026

Khusro ki Ghazal

 ज़े-हाल-ए-मिस्कीं मकुन तग़ाफ़ुल दुराय नैनाँ बनाए बतियाँ

कि ताब-ए-हिज्राँ नदारम ऐ जाँ न लेहू काहे लगाए छतियाँ


शबान-ए-हिज्राँ दराज़ चूँ ज़ुल्फ़ ओ रोज़-ए-वसलत चूँ उम्र-ए-कोताह

सखी पिया को जो मैं न देखूँ तो कैसे काटूँ अँधेरी रतियाँ


यकायक अज़ दिल दो चश्म जादू ब-सद-फ़रेबम ब-बुर्द तस्कीं

किसे पड़ी है जो जा सुनावे पियारे पी को हमारी बतियाँ


चूँ शम-ए-सोज़ाँ चूँ ज़र्रा हैराँ ज़ मेहर-ए-आँ-मह बगश्तम आख़िर

न नींद नैनाँ न अंग चैनाँ न आप आवे न भेजे पतियाँ


ब-हक्क-ए-रोज़-ए-विसाल-ए-दिलबर कि दाद मारा ग़रीब 'ख़ुसरव'

सपीत मन के वराय रखूँ जो जा के पाऊँ पिया की खतियाँ


Monday, June 8, 2026

Greek_Lesson_9_Pronouns

 εγώ είμαι στο σπίτι μου .

εσύ είσαι στο σπίτι  σου .

αυτός είναι στο σπίτι του 

αυτή είναι στο σπίτι της 

αυτό είναι στο σπίτι του .

εμείς είμαστε στο σπίτι μας .

εσείς  είστε στο σπιτι σας .

αυτοί είναι στο σπίτι  τους .

αυτές είναι στο σπίτι  τους .

αυτά είναι στο σπίτι τους .


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New Words 


ντύνω  - I dress 

λαμπρός - Bright

έγκρίνω - I approve

τσιγάρο -Cigarette

συγχωρειτε - Excuse 

αύγό - egg

αύρα - Breeze

η πρεσβεία  - embassy 

δεξιά - right 

Μάλιστα - Indeed 

αριστερά - Left

ο σταθμός - Station

κατεύθείαν - straight 

μπροστα - in front of 

κατεύθείαν μπροστα - straight ahead 

πάρα πολύ - very much 

κοντά - Near 

μακρυά - Far 

γστερα - then / afterwards /after 

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Sample sentences 


Είναι ο σταθμός αριστερά ;

Is the station on the left ?

Σας εύχαριστω πάρα πολύ .

Thank You very much .

Πού είναι η πρεσβεία ; 

where is the embassy ?

Η πρεσβεία είναι δεξιά .

The embassy is on the right .

Ο σταθμός είναι κοντά .

The station is near by .

Το προξενείο είναι κοντά άλλα η πρεσβεία είναι μακρυά .

The consulate is nearby but embassy is far .

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Greek_ Accusative /

 Singular 


Nominative / Subject                            Accusative / Object 


M    Ο Φίλος                                              τον φίλο 


η γυναίκαι                                            την γυναίκα 


 TΟ  Παιδί                                              Το Παιδί ( No Change )


σε + τον = στον 

σε+την = στην 

σε+το = στο 


O Καναδάς                        Είμαι από τον Καναδά 

η Ισπανία                           Είμαι από την Ισπανία 

Το Μαρόκο                        Είμαι από το Μαρόκο 


Πού μένεις ;


Μένω στον καναδά                 I live in Canada 


Μένω στην Ισπανία .                I live in Spain 

Μένω στο Μαρόκο .                 i live in Moroco 

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Η Μαρία αγαπάει τον Νικο.  Maria loves Niko .


Η Μαρία αγαπάει τον Κώστα.   Maria Loves Kosta 


Τον Κώστα αγαπάει η Μαρία .   Maria Loves Kosta 


Αγαπάει η Μαρία τον Κώστα .  Maria Loves Kosta .


Ο κώστας αγαπάει την Μαρια .  Kostas Loves Maria 


Την Μαρία αγαπάει Ο κώστας .  Kostas Loves Maria 


Αγαπάει ο Κώστας την Μαρία . Kostas loves  Maria 

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Masculine Nouns : ος - οι 


Singular

Nom -  Ο   - άγγελος       

Gen  του  - άγγελου 

Acc. - τον  - άγγελο 


Plural

Nom  - οι  > άγγελοι

Gen - των > αγγέλων

Acc. - τους > αγγέλους 

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Masculine Nouns : ης - ες


Singular

Nom -  Ο   - μαθητής       

Gen  του  -  μαθητή

Acc. - τον  - μαθητή


Plural

Nom  - οι  > μαθητές

Gen - των > μαθητών

Acc. - τους > μαθητές

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Masculine Nouns : ας- ες


Singular

Nom -  Ο   - πατέρας  

Gen  του  -  πατέρα

Acc. - τον  - πατέρα


Plural

Nom  - οι  > πατέρες

Gen - των > πατέρων

Acc. - τους > πατέρες

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Feminine Nouns : α , ες 



Singular

Nom -  η   - μητέρα

Gen  της   -  μητέρας

Acc. - την   - πατέρα


Plural

Nom  - οι  > μητέρες

Gen - των > μητέρων

Acc. - τις > μητέρες

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Feminine Nouns : η , ες 

Love

Singular

Nom -  η   - αγάμη

Gen  της   -  αγάμης

Acc. - την   - αγάμη


Plural

Nom  - οι  > αγάμες

Gen - των > αγαμών

Acc. -  οι > 'αγαμες

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Feminine Nouns : η , ες 

Word

Singular

Nom -  η   - λέξη

Gen  της   -  λέξης

Acc. - την   - λέξη


Plural

Nom  - οι  > λέξεις

Gen - των > λέξεων

Acc. -  οι > λέξις

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Feminine Nouns : ος , οι

Exit

Singular

Nom -  η   - έξοδος

Gen  της   -  εξόδου

Acc. - την   - έχοδο


Plural

Nom  - οι  > έξοδοι

Gen - των > εξόδων

Acc. -  οι > εξόδους

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Sunday, June 7, 2026

Greek_Lesson_8_New Words

 αεροπλάνο - airplane 

λεμόνι - lemon 

οξυγόνο - Oxygen

μουσική - Music

ράδιο - Radio 

παλάτι - Palace 

ωροσκόπιο - horoscope 

ρύζι - Rice 

πιάνο - Piano 

τρένο - Train 

φιλοσοφία - Philosophy 

υστερία - Hysteria 

φωτογραφία - Photography 

νοστάλγία - Nostalgia 

ψυχολογία - Psycology 

σαλάτα - Salad

χάος - Chaos 

μέθοδος - Method

ιστορία- History 

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Καλό μεσημέρι - Have a nice siesta 


Καλό  απόγευμα - Have a nice afternoon 

Καλό  βράδυ - Have a nice evening 


Saturday, June 6, 2026

Greek Exercises

 Fill correct adjective 


Ο αδερφός είναι καλός .

Ο πατέρας είναι καλός .

Ο μαθητής είναι καλός .


η αδερφή είναι καλή .

η μητέρα είναι καλή .



το βιβλίο είναι καλό .

το παιδί είναι  καλό 

το μάθημα είναι καλό .

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Fill the correct definite article 


η σαλάτα 

ο χάρτης

η ώρα

το παγωτό

ο άντρας 

ο φοιτητής

ο λογαριασμός

το αεροπλάνο 

η μέρα 

η κυριακή

το βούτυρο

η φοιτήτρια

το τσάι

ο δρόμος 

το κρασί

το γράμμα 

η ταβέρνα 

το κοτόπουλο

τα περίπτερο

η πορτοκαλάδα

ο άνθρωπος

ο φούρνος

το ταξί

το παιδί

η πλατεία

το μαθημα

ο Αμερικανός

ο Ελληνας 

ο Γάλλος 

η μπύρα 

ο καφές 

το νερό 

η τράπεζα

ο γιατρός

το λεωφορείο

η γυναίκα

το μουσείο 

το Σάββατο 

το μπάνιο 

το όνομα

το ψωμί

η Αμερικανίδα

η Ελληνίδα

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Match with numbers 


είκοσι 

δεκατρία 

οκτώ 

ένα 

δεκαπέντε 

έξι

σαράντα επτά

εβδομήντα τέσσερα

δέκα 

τριάντα τρία 

ενενήντα

πενήντα πέντε 

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Σημειώστε το σωστό - Check the correct answer 

1 Μιλάς Ελληνικα ; 

α) Χτες

β) Λίγο 

γ ) Αύριο 


2 Γράφεις Ελληνικά ;

α) Σήμερα

β) Πού

γ) Καθόλου


3 Είσαι Έλληνας ;

α) Πέρυσι

β) Καληνύχτα

γ) Όχι , είμαι ξένος 


4 Σου απέσει η Ελλάδα ;

α) Πολύ

β) Ο δάσκαλος

γ) Όμορφα

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Συμπληρώστε το οριστικό άρθρο στην ονομαστική  πτώση 

Fill in the definite article in the nominative case

ο , η , το / οι , οι , τα

Παράδειγμα 


--------μάθημα                  ----------- μαθήματα

Το μάθημα                            τα μαθήματα 

---κινηματογράφος                 ---- κινηματογράφοι 

---- έργο                                ------ έργα

-----ταινία                             ------ταινίες

-----ώρα                                -----ώρες

----βράδυ                              -----βράδια

----σπίτι                              -------σπίτια

----απόγευμα                     -------απογεύματα

---σχολείο                         -----σχολεία

----γυναίκα                         ------γυναίκες

---νύχτα                             -----νύχτες

---άντρας                           -----άντρες

---άσκηση                          -----ασκήσεις

----παιχνίδι                         -----παιχνίδια

----αριθμός                        -----αριθμοί

---μεσημέρι                     -----μεσημέρια

                                        ----μεσάνυχτα

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Συμπληρώστε το αόριστο άρθρο στην ονομαστική  πτώση 

Fill in the indefinite article in the nominative case

ένας , μία , ένα


Παράδειγμα 

-----μαθητής γράφει

Ένας μαθητής γράφει 


1 --------φίλους μου  μαθαίνει ελληνικά.  ένας

2 --------παιδί τρέχει .   ένα 

3 --------κυρία περνάει τη διάβαση.  μία

4--------άγνωστος χτυπά την πόρτα . ένας 

5 ------γάτα ανεβαίνει στο δέντρο . μία 

6 ------αεροπλάνο πετά χαμηλά. ένα

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Greek-New Phrases - 7 / 8 the lesson


Α , ωραια - Ah , Nice 

Χάρηκα - Nice to meet you 


 Τι έγινε ; -  What happened 


Ελα ρε , τι έγινε ;  Come on , What's going on .


Τι γίνεται ; What is happening ?

Για σου Νικο , Τι γίνεται ; Hey Niko , What is happening ?


Τι λέει ; How is it going ? ( Lit - What it says ) 


Τι λέει ρε φίλε ; How is it going my friend ?


Τα παώ καλά - I am doing well .


Καλή φάση -  Cool


Θα ήθελα - I would like 


Μπορώ να έχω - Can I have 

Greek Preposition - Για , από

 από - from / since /out of / than 


Είμαι από την Ελλάδα . - I am from Greece


Το σπίτι είναι από πέτρα .  The house is made out of stone .


Είμαι καλύτερος από εσένα .- I am better than you .


Από πότε είσαι εδώ ; Since when you are here ?


Ο φίλος μου είναι από την  Θεσσαλονίκη , και πάμε με το αυτοκίνιτο  στην Αθήνα ,για δουλειά .


My friend is from Thessaloniki and we are going with the car to Athens , for work .

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Για - For / about 


Αυτό είναι για εσένα . - This is for you .

Φεύγω για την Αθήνα . - I am leaving for Athens .

Μιλάμε για εμένα . - We are talking about me.

για δες - Go on , see 

Για πιες μου - Go on , tell me 

Θα πάρώ ένα δώρο για τον αδερφό μου .

I will get a gift for my brother .


Έφτιαξα καφέ για την Μαρία .

I made coffe for Maria .




Thursday, June 4, 2026

Greek Preposition _ σε & με

 Greek Preposition _ σε =  in , at . to , on 


mixed with definite article  = σε + το = στο 

Never mixed with indefinite article - ένας , μια , ένα .


είμαι σε ένα αυτοκίνιτο .  I am in a car .

είμαι στο αυτοκίνιτο . - I am in the car .


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με = with 

It is never combined with article .


Γράφω  με στυλό -  I am writing with pen .

Γράφω με ένα στυλό - I am writing with a pen .

Πίνω καφέ με φίλη μου - I am drinking coffee with my friend .




Tuesday, June 2, 2026

PUSTKAm _ MARKETING

 


✨ "बदलती धारा" ✨

लेखक : डॉ. मोहन तिवारी


समाज की बदलती तस्वीर, रिश्तों की अनकही सच्चाइयाँ और जीवन के वास्तविक संघर्षों को अपने भीतर समेटे हुए एक प्रभावशाली कहानी-संग्रह — "बदलती धारा" शीघ्र ही आपके बीच आने वाला है।


यह पुस्तक केवल पंद्रह कहानियों का संग्रह नहीं, बल्कि उन असंख्य अनुभवों का प्रतिबिंब है जिन्हें हम अपने आसपास हर दिन घटित होते देखते हैं। हर कहानी समाज के किसी न किसी ऐसे पहलू को उजागर करती है, जो पाठकों को स्वयं से जोड़ने की क्षमता रखती है। पात्र भले अलग हों, पर उनकी भावनाएँ, संघर्ष और परिस्थितियाँ कहीं न कहीं हमारे जीवन का हिस्सा प्रतीत होती हैं।


प्रख्यात साहित्यकार डॉ. मोहन तिवारी अपनी संवेदनशील लेखनी और गहन सामाजिक दृष्टि के माध्यम से एक बार फिर पाठकों को चिंतन और आत्ममंथन की नई दिशा देने जा रहे हैं। स्वयंयुग प्रकाशन से प्रकाशित उनकी यह आठवीं कृति साहित्य प्रेमियों के लिए एक विशेष उपहार सिद्ध होगी।


📖 सच्चाई से रूबरू कराती कहानियाँ

💫 समाज का जीवंत आईना

❤️ हर पाठक के मन को छू लेने वाला संग्रह


बहुत जल्द... आपके हाथों में होगी एक ऐसी पुस्तक, जो केवल पढ़ी नहीं जाएगी, बल्कि महसूस की जाएगी।


#ComingSoon #बदलतीधारा #DrMohanTiwari #StoryCollection

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‘पहेली सा प्यार’ एक अनोखा कविता-संग्रह है। यह संगह प्रेम के विभिन्न रंगों और उसकी जटिल भावनाओं के बारे में बताता है। इस पुस्तक की कविताएँ पाठकों को प्रेम की गहराई, उसकी पेचीदगियाँ और उसकी सुंदरता का एहसास कराती हैं।

लेखक ने अपने भावनात्मक अनुभवों को कलात्मक शब्दों में पिरोकर हर कविता में पठनीयता क़ायम कर दी है। इसलिए हर कविता की बातें पाठकों की अपनी लगती हैं। ये कविताएँ न केवल दिल को छू लेने वाली हैं, बल्कि विचारों को भी प्रेरित करती हैं।

प्रेम की खुशी, दर्द, इंतज़ार और संवेदनाओं से परिपूर्ण यह संग्रह पाठकों को सोचने पर मजबूर करता है और उन्हें प्रेम की जादुई दुनिया में ले जाता है। हर कविता एक नया अध्याय खोलती है, जो प्रेम की विविधता को दर्शाती है। ‘पहेली सा प्यार’ पुस्तक उन सभी के लिए है, जो प्रेम को समझना चाहते हैं और उसके विभिन्न पहलुओं का आनंद लेना चाहते हैं। यह पुस्तक निश्चित रूप से दिल को छूने वाली और यादगार अनुभव देने वाली है।


#comingsoon #svayanyugpublication

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Greek_ 7th Lesson

 Negation 


Όχι - 


- Είστε η δεσποινίς Αλίκη ;

- όχι .

- όχι , δεν είμαι η δεσποινίς Αλίκη .


δε(ν )

μη ( ν ) 


μη / μην = don't  


- Δεν καπνίζω . - I don't smoke .

- Δεν έχω σημερινή εφημερίδα , έχω χθεσινή .

I don't have today's newspaper , I have yesterday's .

Δυστυχώς δεν έχουμε δωμάτια .

Unfortunately , we don't have any rooms .

- Δεν είμαι η κυρία Παπαδοπούλου.

Τίποτα - nothing / anything 

ποτέ - never / ever 

πουθενά - nowhere / anywhere 

κανένας , καμιά , κανένα - No one , none / anyone 

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ΜΗΝ ΚΟΒΕΤΕ   ΤΑ   ΛΟΥΛΟΥΔΙΑ

μην κόβετε τα λουλούδια 

Don;t cut the flowers 


ΜΗΝ ΠΑΤΑΤΕ  ΤΟ ΓΡΑΣΕΙΔΙ 

μην πατάτε  το γρασίδι .

Do not walk on grass 


ΜΗ  ΣΤΑΘΜΕΥΕΤΕ

μη σταθμεύετε 

No Parking 


ΑΠΑΓΟΡΕΥΕΤΑΙΗ    ΣΤΑΘΜΕΥΣΗ

απαγορεύεται η στάθμευση 

Parking is prohibited


ΜΗΝ ΚΑΠΝΙΖΕΤΕ

μην καπνίζετε 

No Smoking 


ΑΠΑΓΟΡΕΥΕΤΑΙ  ΤΟ ΚΑΠΝΙΣΜΑ

απαγορεύεται  το κάπνισμα

Smoking is prohibited 


ΜΗ ΣΤΗΡΙΖΕΣΤΕ ΣΤΗΝ ΠΟΡΤΑ

μη στηρίζεστε στην πόρτα 

Do not lean against the door 


μη το λουλούδι - Not the flower - don't damage


μη την πόρτα - Not the door - don't slam it