3rd Thursday Online Lampshade Reading
Thursday, July 16 · 8:30 pm
Video call link: https://meet.google.com/dcu-tbxz-aeo
3rd Thursday Online Lampshade Reading
Thursday, July 16 · 8:30 pm
Video call link: https://meet.google.com/dcu-tbxz-aeo
नमस्कार!
आज मैं राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की प्रसिद्ध रचना "कुटिया
में राजभवन" का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करने जा रही हूँ। यह रचना केवल रामायण
की एक घटना का वर्णन नहीं अपितु त्याग, सादगी, आदर्श जीवन, भारतीय संस्कृति,
पारिवारिक प्रेम और नारी सम्मान जैसे महान मूल्यों का संदेश भी देती है।
राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त का जन्म 3 अगस्त 1886 को उत्तर प्रदेश के झाँसी जिले के चिरगाँव में हुआ था। वे आधुनिक हिंदी साहित्य के प्रमुख कवियों में से एक थे। खड़ी बोली हिन्दी में लिखी उनकी रचनाओं की भाषा अत्यंत सहज और सरल है जिसके चलते उनका साहित्य जन जन में लोकप्रिय हो गया। । महात्मा गांधी ने उन्हें "राष्ट्रकवि" की उपाधि दी थी, क्योंकि उनकी कविताओं में राष्ट्रप्रेम, भारतीय संस्कृति और सामाजिक चेतना का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है। उनकी प्रमुख कृतियों में भारत-भारती, साकेत, यशोधरा, पंचवटी, जयद्रथ वध, द्वापर, विष्णुप्रिया आदि शामिल हैं।
मैथिलीशरण गुप्त का साहित्य केवल राष्ट्रभक्ति तक सीमित नहीं था।
उन्होंने भारतीय इतिहास और पौराणिक कथाओं की उन महान महिलाओं को अपनी रचनाओं का केंद्र
बनाया, जिनकी दूसरे साहित्यकारों द्वारा उपेक्षा की गयी थी। उन्होंने विशेष रूप
से यशोधरा, शकुंतला, विष्णुप्रिया, हिडिम्बा और उर्मिला जैसी उपेक्षित नायिकाओं के
जीवन, त्याग, धैर्य, संघर्ष और आत्मबल को अपनी कविताओं में स्थान दिया।
इस प्रकार मैथिलीशरण गुप्त ने अपने साहित्य के माध्यम से नारी सशक्तिकरण को नई दिशा दी और महिलाओं के योगदान को समाज के सामने सम्मानपूर्वक प्रस्तुत किया। यह कविता रामायण के वनवास प्रसंग पर आधारित है। जब भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण चौदह वर्ष के वनवास के लिए अयोध्या छोड़कर वन में पहुँचते हैं, तब वे जंगल में एक छोटी-सी कुटिया बनाकर रहने लगते हैं। पहली दृष्टि में यह कुटिया बहुत साधारण दिखाई देती है। वहाँ न सोने-चाँदी के महल हैं, न शानदार वस्त्र, न सेवक और न ही राजसी सुख-सुविधाएँ। लेकिन कवि कहते हैं कि जहाँ प्रेम, त्याग, संतोष, मर्यादा, धर्म और पारिवारिक एकता हो, वही स्थान वास्तव में किसी राजमहल से कम नहीं होता। इसलिए कवि ने इस साधारण कुटिया को "राजभवन" कहा है।
इसी कविता से ये पंक्तियाँ देखें :
मेरी कुटिया में राजभवन मन भाया
सम्राट स्वयं प्राणेश , सचिव देवर हैं
देते आकर आशीष हमें मुनिवर हैं
धन तुच्छ यहां यद्यपी असंख्य आकर हैं
पानी पीते मृग , सिंह एक तट पर हैं
सीता रानी को यहाँ लाभ ही लाया
मेरी कुटिया में राजभवन मन भाया
कवि बताते हैं कि उस छोटी-सी कुटिया में रहने वाले लोगों के पास
भले ही भौतिक सुख-सुविधाएँ नहीं थीं, लेकिन उनके पास सबसे बड़ा धन था—
•प्रेम
•विश्वास
•त्याग
• मर्यादा
• संतोष
• सेवा
• कर्तव्यनिष्ठा
यही गुण उस साधारण कुटिया को राजमहल से भी अधिक महान बना देते हैं। आज भी यदि किसी घर में प्रेम और सम्मान है, तो वह घर किसी महल से कम नहीं होता।
रानी सीता के वनवास को लेकर कुछ लोगों की ये धारणा थी कि भाग्य ने सीता रानी को छला है लेकिन वास्तव में सीता रानी बहुत प्रसन्न है। उस सुने हुए भय को उन्होंने मार भगाया है। अब वो पहले से भी अधिक आत्मनिर्भर हो गयी हैं। घर - गृहस्थी का सब कार्य अपने हाथों से करती हैं। उनके लिए ये वनवास दुर्भाग्य नहीं अपितु सौभाग्य बन कर आया क्योंकि वन में रहते हुए ही वो माँ बनी। इसी कविता से ये पंक्तियाँ सुनें :
कहता है कौन कि भाग्य ठगा है मेरा
वह सुना हुआ भय दूर भगा है मेरा
कुछ करने में अब हाथ लगा है मेरा
वन में ही तो गृहस्थय जगा है मेरा
वह वधू जानकी बानी आज जाया
मेरी कुटिया में राजभवन मन भाया
कहता है कौन कि भाग्य ठगा है मेरा
वह सुना हुआ भय दूर भगा है मेरा
कुछ करने में अब हाथ लगा है मेरा
वन में ही तो गृहस्थय जगा है मेरा
वह वधू जानकी बानी आज जाया
मेरी कुटिया में राजभवन मन भाया
कुटिया में राजभवन' मैथिलीशरण गुप्त द्वारा रचित यह एक भावपूर्ण
कविता है। इसमें सीता जी के वनवास के प्रसंग का वर्णन है, जहाँ वे कहती हैं कि श्रीराम
के साथ होने से उन्हें वन की पर्ण-कुटिया में भी राजमहल जैसा सुख और आनंद प्राप्त होता
है। इस कविता में सीता जी के संतोष और प्रेम का चित्रण किया गया है। १४ वर्ष के कठोर
वनवास के दौरान, जब वे कुटिया में रहती हैं, तो उन्हें किसी भी प्रकार का अभाव महसूस
नहीं होता। उनके लिए प्रभु श्रीराम स्वयं उनके साथ रहते हैं, लक्ष्मण उनके सेवक/मंत्री
की भूमिका निभाते हैं, और प्रकृति के सौंदर्य—जैसे हरी-भरी लताएँ, कल-कल करती नदियाँ
और पक्षियों का कलरव—उनके लिए राजमहल की सुख-सुविधाओं और दासी-गणों के समान हैं। इस
प्रकार, सच्चा सुख महलों में नहीं, बल्कि प्रेम और प्रकृति की गोद में मिलता है, यही
इस कविता का मूल भाव है।
कविता का संदेश
यह कविता हमें सिखाती है कि—
• सच्चा वैभव धन नहीं, बल्कि अच्छे संस्कार हैं।
• परिवार का प्रेम सबसे बड़ी संपत्ति है।
• जीवन में त्याग और कर्तव्य का बहुत महत्व है।
• संतोष सबसे बड़ा सुख है।
• आदर्श जीवन सादगी में भी जिया जा सकता है।
आज के समय में लोग बड़े-बड़े मकान, महंगी गाड़ियाँ और भौतिक सुख-सुविधाएँ
प्राप्त करने की दौड़ में लगे हुए हैं। लेकिन यदि परिवार में प्रेम, विश्वास और सम्मान
नहीं है, तो वह महल भी सुख नहीं दे सकता। दूसरी ओर, यदि एक छोटा-सा घर भी प्रेम, अपनापन
और संस्कारों से भरा हो, तो वही घर सबसे बड़ा राजमहल बन जाता है। यही संदेश मैथिलीशरण
गुप्त अपनी कविता "कुटिया में राजभवन" के माध्यम से देते हैं।
इस कविता की भाषा अत्यंत सरल, प्रभावशाली और भावपूर्ण है। कवि ने
छोटे-छोटे शब्दों में भारतीय संस्कृति, आदर्श परिवार और नैतिक मूल्यों का अत्यंत सुंदर
चित्रण किया है। कविता में प्रकृति का सौंदर्य, पारिवारिक प्रेम और त्याग का भाव पाठकों
को गहराई से प्रभावित करता है।
"कुटिया में राजभवन" केवल एक कविता नहीं, बल्कि भारतीय
जीवन-दर्शन का दर्पण है। यह हमें सिखाती है कि जीवन की वास्तविक समृद्धि धन, महलों
और ऐश्वर्य में नहीं, बल्कि प्रेम, त्याग, संतोष, कर्तव्य, मर्यादा और पारिवारिक एकता
में होती है। इसी प्रकार राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त ने अपने समूचे साहित्य में भारतीय
संस्कृति, राष्ट्रप्रेम और मानवीय मूल्यों को सर्वोच्च स्थान दिया। साथ ही उन्होंने
यशोधरा, उर्मिला, विष्णुप्रिया, शकुंतला और हिडिम्बा जैसी उपेक्षित नारी पात्रों को
अपनी रचनाओं के माध्यम से सम्मान दिलाकर यह सिद्ध किया कि भारतीय नारी त्याग, शक्ति,
धैर्य और आत्मसम्मान की सच्ची प्रतीक है। यही कारण है कि उन्हें हिंदी साहित्य के महानतम
कवियों में गिना जाता है।
अंत में मैं यही कहना चाहूँगी कि यदि हमारे जीवन और परिवार में प्रेम,
संस्कार और त्याग है, तो हमारी छोटी-सी कुटिया भी किसी राजभवन से कम नहीं है।
धन्यवाद!
ήρως - Hero
μύτη - Nose
γιδα - Goat
μάτι - eye
βρύσι - fountain
γάλα - Milk
γλυκύς - sweet
όλος - All
μοιρα - fate
μυια - fly
αυγά - eggs
αυτά - These
ευαγγέλιον - Gospel
εύλογιά - small pox
ευκολος - easy
ηύρα - I found
καύμενος - poor fellow
βάλλω - I throw
άγγελος - Angel
θυγατέρα - daughter
κυρία - Lady
νέος
γερος - η - ο
Το γκαρσόν - Waiter
το μενού - Menu
ξέρω - to know
ότι / πώς - that ( Conj)
φρέσκος , φρέσκια , φρέσκο - Fresh
το ψαρί - Fish
το κοτόπουλο - chicken
νόστιμος , η , ο - Tasty
το κρέας - Meat
το ούζο - Greek alcholic drink
η ρετσίνα - a kind of resinated wine
δηλαδή - That is to say
νά πώ - That I say
νά πήτε - That you say
έθνικός , η , ο - National
το ποτό - Beverage , drink
το αρνάκι - The lamb
το φαι / φαγητό - Food
τα φαγιά / φαγητά - Food Pl.
Βεβαίως / Βέβαια - certainly / of course
το σουβλάκε - Sheeshkebab
τα σουβλάκια - Pl.
ο μουσακάς - Musaka
όπως - as
όπως έπίσης - as well as
και τα λοιπά / κ.τ.λ. - etc.
δοκιμάζω - to taste
άμεσως - Right away
περίφημος , η , ο - famous
η όρεξις / όρεξι - The appetite
καλή όρεξι - Enjoy your meal / Have a good appetite
άμέσως - Right away
Το πιάτο - plate
το μαχαίρι - knife
το κουτάλι - spoon
το πηρούνι - fork
το άλάτι - Salt
το πιπέρι - Pepper
η πετσέτα - Napkin
το γλυκό - sweet
το παγωτό - ice cream
η πάστα - pastry
ο πάγος - ice
η μπριζόλα - steak
οί πατάτες - Potatoes
τα λαχανικά - vegetables
η σούπα - soup
-----------------------------------------------------------------------
γιατί - Why
Μου αρέσει το ποδόσφαιρο - I like football
πως και ; How come
Εδώ και πέντε χρόνια είμαι στην Αθήνα
for 5 years now I am in Athens
για ποιο λόγο ; For what reason
δεν τρώω κρέας - I do not eat meat
Για ποιο λόγο δεντρως κρέας . -
For what reason you do not eat meat
कुछ अश'आर
१- घड़ी तो हाथ में सबके है लेकिन
पकड़ में एक भी लम्हा नहीं है
२-
ज़रा सी बात थी और कशमकश ऐसी कि मत पूछो
भिखारी मुड़ गया पर जेब से सिक्का नहीं निकला
३- उनको तो मंदिर- मस्जिद से वोट की खेती करनी थी
हम आपस में लड़ना सीखे, लेना एक न देना दो
४-
भूल जाएगा किसी दिन अपने पाँवों का वजूद
किसने दे रक्खी हैं उसके हाथ में बैसाखियाँ
ओमप्रकाश यती
मैं भी दालान की कुर्सी को हटा कर ख़ुश हूं,
वो भी है चैन से,खिड़की के बदल कर शीशे।
. -----अनुज अब्र
Ms Sufia Shaikh
d/o Shekh Muhammed Selim
154/1 D
LINTON Street, Ladies Park , Entally
Kolkata
West Bengal - 700014
Ms Sufia Shaikh
LINTON Street, Ladies Park , Entally
Kolkata ,West Bengal - 700014
Sub : Appointment as Communication Consultant
Dear Sufia ,
We are pleased to inform you that SANAD FOUNDATION has appointed you as " Communication Consultant " with immediate effect i.e. 19-06-2026 initially for a period of one year .You will be working remotely and assisting in social media platforms and curating future constructive projects as and when required .
Please note that Sanad Foundation will not be able to give you any Salary / Wages for your work done for Sanad Foundation .
Thanks & regards
Indu Kant Sharma
Managing Trustee
SANAD FOUNDATION
जागती आँखों से देखी थी किसी ख़्वाब की धुन
दिल की धक् धक् पे छिड़ी इश्क़ के मिज़राब की धुन
नाव तो नाव वहां जान के लाले पड़ गए
शौक़ उठ्ठा था चलो सुनते हैँ गिरदाब की धुन
रात के वक़्त मेरे साथ तुम्हारी यादें
और दरीचे से चमकती हुई महताब की धुन
हाय वो फूल से चेहरे कि लरज़ उठता है दिल
कुछ दरिंदो ने जहाँ लिख दी है तेज़ाब की धुन
आज के दौर मे खूशबु से भरा ये लहजा
जैसे पतझड़ मे महकती गुले शादाब की धुन
रोज़े अव्वल से नहीं मिलते किसी से भी ख़याल
मुख्तलिफ रहती है मुझ से मेरे अहबाब की धुन
रक़्स करती हैँ मेरे साथ पुरानी यादें
रोज़ सुनती हूं मैं तेरे दिले बेताब की धुन
****
ज़हन ओ दिल पर एक उदासी छाई है, तन्हाई है
बीनाई हर मंज़र से उकताई है, तन्हाई है
जाने क्या था जिसकी ख़ातिर मैंने सब मंज़ूर किया
वरना, इश्क़ में ज़िल्लत है, रुसवाई है, तन्हाई है
बाद तुम्हारे ऊब गया है दिल, दुनिया की रौनक से
मेरे ख़ालीपन की जो भरपाई है तन्हाई है
दीवारों से लिपटी बेलें कब से देख रही हूँ मैं
शाम ढले जब याद तुम्हारी आई है, तन्हाई है
खुली किताबें भीगा तकिया सिमटी चादर बिखरी मैं
और वीरानी मुझ पर हँसने आई है, तन्हाई है
अपने मुँह मोड़ गए हैं रिश्ते सारे तोड़ गए हैं
रुख़सत का पैगाम क़ज़ा जब लाई है, तन्हाई है
यूँ तो मेरी वहशत से ये दुनिया भी घबराती है
पर मेरी वहशत जिससे घबराई है, तन्हाई है
***
दर्द का इख़्तिताम चाहता है
हिज्र भी अब विराम चाहता है
ख़ाली बैठे हैं इश्क़ ही कर लें
दिल भी कुछ कामधाम चाहता है
ये नए दौर का है इश्क़ मियां
ये बहुत ताम झाम चाहता है
हाल तेरा भी हो मेरे जैसा
दिल यही इंतिक़ाम चाहता है
जुरअतें देखिए दिवाने की
इश्क़ में एहतराम चाहता है
उसका भी आज फोन आ ही गया
किस्से सारे तमाम चाहता है
ऐश ओ इशरत में मुब्तिला है दिल
नित नया इक ग़ुलाम चाहता है
जानता है हुनर तिजारत का
सो वफ़ाओं का दाम चाहता है
***
ज़हनी बीमारियों ने काट दिया
फूल को आरियों ने काट दिया
जाने कितनी ज़रूरतों का गला
मेरी खुद्दारियों ने काट दिया
आज फिर उसकी याद का सब वक़्त
घर की अलमारियों ने काट दिया
ज़िन्दगी नाम का हसीन दरख़्त
घर की दुशवारियों ने काट दिया
वो मेरे इश्क़ का सुहाना भरम
उसकी मक्कारियों ने काट दिया
पक्की कॉलोनीयों से कच्चा घर
मिलके पटवारियों ने काट दिया
इक हकीकत भरी कहानी को
कुछ अदाकारियों ने काट दिया
***
ο μαθητής - οι μαθητές - Student
ο επιβάτης - οι επιβάτες - Passenger
ο ναύτης - οι ναύτες - Sailor
ο άντρας - οι άντρες - Man
ο πατέρας - οι πατέρες - Father
ο άνθρωπος - οι άνθρωποι - Man
ο ουρανός - οι ουρανοί - Sky
ο δρόμος - οι δρόμοί - Road
---------------
η γυναίκα - οι γυναίκες - Woman
η ώρα - οι ώρες - Time
η δραχμή - οι δραχμές - Currency
η αδερφή - οι αδερφές - Sister
--------------------------------
το παιδί - τα παιδιά - Child
το κρασί - τα κρασιά - Wine
το δέντρο - τα δέντρα - Tree
το βουνό - τα βουνά - Mountain
--------------------------------------
ο σκύλος - Dog
η σκύλα
το σκυλί
ο γάτος - Cat
η γάτα - Female cat
το γατί
το αγόρι - Boy
το κορίτσι - Girl
Το ξενοδοχείο - Hotel
πολύς , πολλή , πολύ - Many
κάθε - each , every
το δωμάτιο - room
το μπάνιο - bath
όλος ,όλη ,όλο - all
το σύστημα κλιματισμού - air conditioning
το ισόγειο - ground floor
το εστιατόριο - restaurant
η καφετιρία - cafeteria
το προσωπικό - staff
φιλικός , φιλική , φιλικό - friendly
το περιβάλλον - atmosphere , environment
ευχάριστος , ευχάριστη , ευχάριστο - Pleasant
Δεν μου λέτε παρακαλώ - Please tell me
Χαιρετίσματα - Greetings
Χρόνα πολλά - Many Happy returns
Επίσης - Same to you
Αντίο σας - Good Bye
Καλή αντάμωσι - Good bye till we meet again
Συγχαρητήρια - Congratulations
Περαστικά σας - Get well soon
Περάστε - After You
Στήν υγειά σας - To your health
Αυ έχετε τήν καλωσύνη - would you be so kind
Μου κάνετε μία χάρι - Do me a favour
Εύχαρίστως - Gladly
Καλή έπιτυχία - Good luck
Άσφαλώς - Certainly
Καλό ταξίδι - Have a Nice trip
Personal Pronouns
αυτά - It all εγώ - I
εσύ - You
αυτός - He
αυτή - She
αυτό - It
εμείς - We
εσείς - You all
αυτοί - He All
αυτές - She all
Κανένα - any / some / nobody /none
Το χιλιόμετρο - The Kilometer
Το εστιατόριο - Restaurant
Το λεωφορείο - Bus
Το φλυτζάνι - The cup
σκέτος - η -ο - unsweetened / plain
χωρίς - without
Το γαλα - Milk
Το τσαι - Tea
Το λεμόνι - Lemon
η φρυγανιά - The toast
Το μέλι - The honey
κρύος - α-ο
διψω - I am thirsty
η δραχμή - Singular
οί δραχμές - Plural
κρίμα - It's pity
διότι - Because
Το κουλούρι - The doughnut
Το ψωμί - Bread
η μαρμελάδα - Marmalade - Jam
η δραχμή - Singular
οί δραχμές - Plural
Το πουρμπουάρ - Tip
-----------------------------------------------
Αυτό είναι πολύ ακριβό . - It is very expensive .
Αυτός θέλγει καφέ . - He wants coffee .
Η ώρα είναι δύο . - It is 2' o clock .
Που είναι το λεωφορείο ; Where is the bus ?
एक मुलाकात साहित्यकार इंदुकांत के साथ - राही राज़, बेंगलुरु। फर्स्ट एडिटर इंदुकांत अंगिरस मस्त मौला इंसान हैं ।
जिंदगी में अब तक बहुत दोस्त मिले, बहुत सारे मुझे साहित्यकारों से मेरी मुलाकात हुई,कुछ छूट गए , कुछ साथ चले। कुछ छूटकर भी नहीं छुटे , बेशक बातें कभी कदाल होती है, मगर उनके साथ यादें बहुत रहती हैं,उन्हीं यादों में से एक हमारे अजीज दोस्त हैं इंदुकांत अंगिरस । जिन्हें हम भूलना भी गर चाहें तो नहीं भूल सकते हैं।
हमें आज भी याद है उनका चेहरा,जब वो मुझे साहित्य साधक मंच की मासिक गोष्ठी में मिले थे , शेरो शायरी के शौकीन और एक अलग व्यक्तित्व के मालिक , बहुत ही खूबसूरत अंदाज और उनके पढ़ने का तौर तरीका पहली ही नजर में मुझे ना जाने क्यूँ अच्छा लगने लगा ।
मस्त मौला इंदुकांत के चेहरे पर हमने कभी भी मायूशी नहीं देखी और ना ही कभी कंजूसी कभी देखी , पैसा रहे ,ना रहे,सदा मग्न में रहते हैं। ओरेकल कंपनी से रिटायरमेंट के बाद, यहीं उन्होंने अपना आशियाना बनाए रखा और अनवरत साहित्य साधक बनकर सेवा आज भी कर रहे हैं।
पहले बंगलोर में ही रहते थे, और इसी दरम्यान इनसे बहुत गहरी दोस्ती हो गई, अगर हम सच कहें तो हमदोनों दो जिस्म एक जान हो गए ।
इनकी पुस्तक की दुकान थी हम प्रायः इनके दुकान पर जाया करते थे और साहित्यिक चर्चा किया करते थे, दक्षिण भारत में हिंदी के प्रचार प्रसार के लिए इंदुकांत का योगदान अभूतपूर्ण है।
हमने इनके साथ मिलकर सबसे पहले कारवाँ को खोला ,बाद में इनके ही मदद से हमने कलश कारवाँ फाऊंडेशन, बेंगलूरु संस्था की स्थापना की ,जिसमें इंदुकांत जी का योगदान अभूतपूर्ण रहा , संस्थापक सदस्य आज भी हैं। बंगलोर से बाहर रहने के कारण, थोड़ा सा दिक्कत हमें हो रहा है,मगर ये आज भी हमारे दिल में हैं। और हम आज भी इन्हें हमारे मार्गदर्शक और संरक्षक मानते हैं।
हमें याद आ रहा है वर्ष 2021 इनके ही पब्लिकेशन से हमने सर्व प्रथम एक पुस्तक भी निकाली, जो साझा संकलन के रूप प्रकाशित हुई थी, पुस्तक का नाम उगता सूरज है,जिसमें पूरे भारत के नामी गिरामी साहित्यकारों की रचना है।
हमें याद आ रहा है इनकी जीप जो पूरे बंगलोर अकेली थी ,जिस पर हमलोग बैठकर अक्सर घूमने निकल जाया करते थे, बंगलोर का शायद ही कोई कोना होगा , जहाँ हमलोग नहीं घूमने गए होगे।
हमसे अगर सच पूछा जाए तो हम स्पष्ट कहते हैं कि आज राही जिस मुकाम को हासिल किया है उसमें इंदुकांत अंगिरस का जबरदस्त हाथ है, चाहे वह किसी प्रकार का हो न तन, मन और धन तीनों से इंदुकांत अंगिरस ने हमें सहायता की है ।
हम इनके पिताजी से भी दिल्ली निवास पर मिल चुके हैं,हम इनके साथ राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित परम आदरणीय स्वर्गीय श्याम सिंह शशि जी भी मिल चुके हैं। जिन्होंने पहली मुलाकात में ही हमें बहुत कुछ सिखा दिया था। आज वो नहीं है फिर उनकी स्मृति हमारे साथ है।
इंदुकांत अंगिरस को गजल में महारथ हासिल है,कविता और कहानी गजब की लिखते हैं, आज उनकी गिनती गजलकार रूप में की जाती है तो लघु कथा के जनक कहे जाते हैं।
इंदुकांत हिंदी अग्रेजी और उर्दू के अलावा भी फ्रेंच भाषा के भी अनुवादक रहें हैं और जानकर रहें हैं।
इंदुकांत की जितनी तारीफ हम करें,कम ही होगा ,क्योंकि सर से पांव तक इनमें तारीफ ही तारीफ हमें दिख रही । ईश्वर इन्हें दीर्घायु रखें,यही कामना करता हूँ।
राही राज़, बेंगलुरु
---------------------------------------------------------
नई सुबह की दस्तक
साझा संकलनों का चलन पुराना हैं। साझा संकलनों की महत्ता हमेशा से रही है और हमेशा रहेगी क्योंकि साझा संकलनों के ज़रिये पाठकों को एक ही पुस्तक में अनेक लेखकों की रचनाएँ पढ़ने को मिल जाती हैं। यह हर्ष की बात है कि बैंगलोर की प्रसिद्ध कवयित्री श्रीमती प्रीती राही के सम्पादन में " सुप्रभात " साझा संग्रह प्रकाशित हो रहा है जिसमें कविताएँ , गीत ,ग़ज़ल , लघुकथाएँ और लघु कहानियाँ संकलित हैं। नारी शक्ति को समर्पित इस संग्रह की सभी रचनाकार बधाई के पात्र हैं। दुनिया की आधी आबादी के नाम दुनिया की दीगर ज़बानों में बहुत कुछ लिखा जा रहा है। मुझे आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि इस कड़ी में " सुप्रभात " साझा संग्रह अपनी अलग पहचान अंकित कर पायेगा। प्रीती राही द्वारा प्रज्वलित नारी शक्ति की ये मशाल निश्चय ही इस संसार के अँधेरे को चीर कर नई रौशनी और नई सुबह को इस धरती पर उतारेगी। अनेकानेक शुभकामनाओं के साथ..
आपका अपना
इन्दुकांत आंगिरस
दिल्ली
-------------------------------------------------------------------------------------------------------------
आदरणीय साहित्यकार, अनुवादक, सम्पादक एवं संस्कृतिसेवी श्री इन्दुकांत आंगिरस ‘रसिक देहलवी’ जी के बारे में कुछ शब्द कहना मेरे लिए अत्यंत हर्ष और सम्मान का विषय है।
मैं नेपाल की निवासी हूँ और साहित्य के माध्यम से अनेक भारतीय साहित्यकारों से परिचित होने का अवसर मिला है। उन्हीं में एक अत्यंत आत्मीय, विनम्र और प्रेरणादायी व्यक्तित्व हैं – श्री इन्दुकांत आंगिरस ‘रसिक देहलवी’ जी।
रसिक जी केवल एक कवि नहीं हैं, बल्कि वे साहित्य, भाषा और संस्कृति को जोड़ने वाले एक सेतु हैं। हिन्दी, अंग्रेज़ी, उर्दू, हंगेरियन, ग्रीक, चेख तथा लिथुआनियन जैसी अनेक भाषाओं का उनका ज्ञान उनके व्यापक अध्ययन और साहित्यिक समर्पण का परिचायक है। कविता, लघुकथा, अनुवाद और संपादन हर क्षेत्र में उनका योगदान उल्लेखनीय है।
उनके कविता-संग्रहों में संवेदना, प्रेम, स्मृति, जीवन-दर्शन और मानवीय अनुभूतियों की सुंदर अभिव्यक्ति दिखाई देती है। वहीं दूसरी ओर, हंगेरियन, अरबी और लिथुआनियन साहित्य के अनुवादों के माध्यम से उन्होंने विभिन्न देशों की सांस्कृतिक धरोहर को हिन्दी पाठकों तक पहुँचाने का महत्वपूर्ण कार्य किया है। यह केवल साहित्यिक उपलब्धि नहीं, बल्कि संस्कृतियों के बीच संवाद स्थापित करने का एक सराहनीय प्रयास है।
मुझे व्यक्तिगत रूप से उनकी एक विशेषता अत्यंत प्रभावित करती है—वे नए और उभरते हुए लेखकों को खोजते हैं, उन्हें मंच प्रदान करते हैं और निरंतर प्रोत्साहित करते हैं। आज के समय में जब साहित्यिक जगत में मार्गदर्शन की आवश्यकता बढ़ती जा रही है, तब रसिक जी जैसे वरिष्ठ साहित्यकारों का स्नेह और सहयोग अनेक नवोदित रचनाकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनता है।
उन्होंने मेरा भी साक्षात्कार लिया, मेरे विचारों को सुना और साहित्यिक संवाद का अवसर प्रदान किया। यह केवल एक औपचारिक बातचीत नहीं थी, बल्कि साहित्य और मानवीय संबंधों को जोड़ने वाला आत्मीय अनुभव था। उनके व्यवहार में जो विनम्रता, अपनापन और सम्मान का भाव है, वही उन्हें विशेष बनाता है।
‘परिचय साहित्य परिषद्’ और ‘सनद फाउंडेशन’ जैसी संस्थाओं के माध्यम से वे साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों को निरंतर आगे बढ़ा रहे हैं। संपादक, आयोजक, अनुवादक और साहित्यकार के रूप में उनकी बहुआयामी भूमिका साहित्य-जगत के लिए अत्यंत मूल्यवान है।
मेरा मानना है कि किसी भी साहित्यकार की सबसे बड़ी पहचान केवल उसकी प्रकाशित पुस्तकें नहीं होतीं, बल्कि वे लोग होते हैं जिनके जीवन को उसने प्रेरित किया हो। इस दृष्टि से रसिक देहलवी जी अनेक रचनाकारों के लिए प्रेरणा, मार्गदर्शक और आत्मीय साथी हैं।
नेपाल और भारत के बीच सदियों पुराना सांस्कृतिक और साहित्यिक संबंध रहा है। रसिक जी जैसे साहित्यकार इस संबंध को और अधिक सुदृढ़ बनाते हैं। मैं उनके प्रति अपनी हार्दिक श्रद्धा, सम्मान और शुभकामनाएँ व्यक्त करती हूँ।
उनके स्वस्थ, सक्रिय और सृजनशील जीवन तथा आने वाले वर्षों में भी साहित्य, भाषा और संस्कृति की सेवा इसी समर्पण के साथ करते रहें।
आदरणीय रसिक देहलवी जी को मेरा सादर प्रणाम।
---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
प्रियवर 1956-57 से बाल-चेष्टा के रूप में कुछ ऐसे वैसे ही लिखने की शुरुआत हुई जो सामान्य रूप से विभिन्न विधाओं में कच्चे-पक्के रूप में उस समय के अनेक पत्र-पत्रिकाओं में छपीं और पोरबंदर से पोर्टब्लेयर तक के आवास-प्रवास में बिलाती भी गईं । कभी स्मरण करके पुस्तकाकार आईं तो वे भी आपके साथ साझा की जाएंगी । 1990 के उदारीकरण और मुक्त बाजार ने आतंकित किया, जिज्ञासा जगाई और फिर जो कुछ लिखा गया वह पत्र-पत्रिकाओं में छपना शुरू हुआ और कालांतर में पुस्तकाकार आना भी शुरू हुआ । लेकिन इस लेखन में अपने समय की दैनंदिन ज़िंदगी और उसकी जद्दोजहाद ज्यादा थी । लगा जैसे लेखन ने कहीं प्रतिरोधात्मक पत्रकारिता का रूप ले लिया है जो कभी कुण्डलिया छंद में तो कभी पत्र और कभी एक छाया पात्र तोताराम के साथ संवाद में प्रकट होने लगा ।अपने समय से आँख चुराकर शाश्वत की कल्पना का कोई अर्थ मुझे नहीं लगा । इसमें चूँकि सामयिक विडंबनाओं से संघर्ष था तो उसके बरक्स शाश्वत मानवीय मूल्यों को भी प्रकारांतर से आना ही था । इसी तरह चलते-चलते कुण्डलिया छंद, पत्र, तोताराम से संवाद और कुछ फुटकर छंदबद्ध गीतिकाओं के रूप में 25-30 पुस्तकें आ गईं । कुछ पुस्तकें आपको भेज रहा हूँ । मेरे अनुसार आप सकारात्मक विचारों के सुचालक हैं और आपके माध्यम से इन विचारों का किसी न किसी प्रकार समाज में संचरण-संरक्षण भी अवश्य होगा । समय निकालकर पढ़ने का कष्ट करें और उस विचार के साथ जुड़ें जो हमारे समय और समाज की वर्तमान और दीर्घकालिक आवश्यकता है । पढ़ने के बाद अपने सर्किल में साझा करें और अंततः किसी पुस्तकालय में पहुँचा सकते हैं । शायद वहाँ भी कोई पढ़ने वाला बचा हो । जब षड्यन्त्रकारी सहजता से एकजुट हो सकते हैं तो शुभकामी क्यों नहीं । आपका मैं, रमेश जोशी
---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
जब से परिचय हुआ है इन्दुकांत आंगिरस जी का साहित्यिक व्यक्तित्व मुझे हमेशा सक्रियता की एक ऐसी मिसाल लगा है जो बहुत ही जीवंत और प्रेरणादायी है। अनेक भाषाओं के ज्ञाता और अनेक विधाओं में अपना निरंतर रचनात्मक सहयोग देने वाले ये हमारे प्रिय और महत्वपूर्ण लेखक हैं। अनुवाद और सम्पादन के क्षेत्र में भी इनका उल्लेखनीय योगदान है। अभिव्यक्ति की नयी तकनीक से जुड़े हुए हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि साहित्य के विभिन्न क्षेत्रों में इनका योगदान हमें समृद्ध करता रहेगा।
दिविक रमेश , दिल्ली।
--------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------
Modifications :
ABOUT US
Our Team > Trustees
> Staff on Board
Donors' List > Cash
> Books
> Other >
Achievements > Felicitation
> Certificates
> Awards
--------------------------------------------------------------------------
COURSES
Students' Internship
Teachers' Internship
-----------------------------------------------------------------------
PUBLICATIONS
For books > Book photo > Book details > Book Description box
-------------------------------------------------------------------------
PEARL PROJECTS
Environment > Hygiene
> Waste Treatment
> River Cleaning
> Clean Surroundings
Kala Gram > Description
Liabrary > Off Line
> Online
Education >
> Off Line
> Online
---------------------------------------------------------------------------------
GALLERY
> Photos
> Videos
> Audios
-------------------------------------------------------------------------------
ज़े-हाल-ए-मिस्कीं मकुन तग़ाफ़ुल दुराय नैनाँ बनाए बतियाँ
कि ताब-ए-हिज्राँ नदारम ऐ जाँ न लेहू काहे लगाए छतियाँ
शबान-ए-हिज्राँ दराज़ चूँ ज़ुल्फ़ ओ रोज़-ए-वसलत चूँ उम्र-ए-कोताह
सखी पिया को जो मैं न देखूँ तो कैसे काटूँ अँधेरी रतियाँ
यकायक अज़ दिल दो चश्म जादू ब-सद-फ़रेबम ब-बुर्द तस्कीं
किसे पड़ी है जो जा सुनावे पियारे पी को हमारी बतियाँ
चूँ शम-ए-सोज़ाँ चूँ ज़र्रा हैराँ ज़ मेहर-ए-आँ-मह बगश्तम आख़िर
न नींद नैनाँ न अंग चैनाँ न आप आवे न भेजे पतियाँ
ब-हक्क-ए-रोज़-ए-विसाल-ए-दिलबर कि दाद मारा ग़रीब 'ख़ुसरव'
सपीत मन के वराय रखूँ जो जा के पाऊँ पिया की खतियाँ
εγώ είμαι στο σπίτι μου .
εσύ είσαι στο σπίτι σου .
αυτός είναι στο σπίτι του
αυτή είναι στο σπίτι της
αυτό είναι στο σπίτι του .
εμείς είμαστε στο σπίτι μας .
εσείς είστε στο σπιτι σας .
αυτοί είναι στο σπίτι τους .
αυτές είναι στο σπίτι τους .
αυτά είναι στο σπίτι τους .
--------------------------------------------------------------------------------
New Words
ντύνω - I dress
λαμπρός - Bright
έγκρίνω - I approve
τσιγάρο -Cigarette
συγχωρειτε - Excuse
αύγό - egg
αύρα - Breeze
η πρεσβεία - embassy
δεξιά - right
Μάλιστα - Indeed
αριστερά - Left
ο σταθμός - Station
κατεύθείαν - straight
μπροστα - in front of
κατεύθείαν μπροστα - straight ahead
πάρα πολύ - very much
κοντά - Near
μακρυά - Far
γστερα - then / afterwards /after
---------------------------------------------------------------------------
Sample sentences
Είναι ο σταθμός αριστερά ;
Is the station on the left ?
Σας εύχαριστω πάρα πολύ .
Thank You very much .
Πού είναι η πρεσβεία ;
where is the embassy ?
Η πρεσβεία είναι δεξιά .
The embassy is on the right .
Ο σταθμός είναι κοντά .
The station is near by .
Το προξενείο είναι κοντά άλλα η πρεσβεία είναι μακρυά .
The consulate is nearby but embassy is far .
-------------------------------------------------------------------------
Singular
Nominative / Subject Accusative / Object
M Ο Φίλος τον φίλο
F η γυναίκαι την γυναίκα
N TΟ Παιδί Το Παιδί ( No Change )
σε + τον = στον
σε+την = στην
σε+το = στο
O Καναδάς Είμαι από τον Καναδά
η Ισπανία Είμαι από την Ισπανία
Το Μαρόκο Είμαι από το Μαρόκο
Πού μένεις ;
Μένω στον καναδά I live in Canada
Μένω στην Ισπανία . I live in Spain
Μένω στο Μαρόκο . i live in Moroco
---------------------------------------
Η Μαρία αγαπάει τον Νικο. Maria loves Niko .
Η Μαρία αγαπάει τον Κώστα. Maria Loves Kosta
Τον Κώστα αγαπάει η Μαρία . Maria Loves Kosta
Αγαπάει η Μαρία τον Κώστα . Maria Loves Kosta .
Ο κώστας αγαπάει την Μαρια . Kostas Loves Maria
Την Μαρία αγαπάει Ο κώστας . Kostas Loves Maria
Αγαπάει ο Κώστας την Μαρία . Kostas loves Maria
-----------------------------------------------------------------------------------
Masculine Nouns : ος - οι
Singular
Nom - Ο - άγγελος
Gen του - άγγελου
Acc. - τον - άγγελο
Plural
Nom - οι > άγγελοι
Gen - των > αγγέλων
Acc. - τους > αγγέλους
-----------------------------------------------------------------------------
Masculine Nouns : ης - ες
Singular
Nom - Ο - μαθητής
Gen του - μαθητή
Acc. - τον - μαθητή
Plural
Nom - οι > μαθητές
Gen - των > μαθητών
Acc. - τους > μαθητές
-------------------------------------------------------------------
Masculine Nouns : ας- ες
Singular
Nom - Ο - πατέρας
Gen του - πατέρα
Acc. - τον - πατέρα
Plural
Nom - οι > πατέρες
Gen - των > πατέρων
Acc. - τους > πατέρες
-------------------------------------------------------------------------------
Feminine Nouns : α , ες
Singular
Nom - η - μητέρα
Gen της - μητέρας
Acc. - την - πατέρα
Plural
Nom - οι > μητέρες
Gen - των > μητέρων
Acc. - τις > μητέρες
--------------------------------------------------------------------
Feminine Nouns : η , ες
Love
Singular
Nom - η - αγάμη
Gen της - αγάμης
Acc. - την - αγάμη
Plural
Nom - οι > αγάμες
Gen - των > αγαμών
Acc. - οι > 'αγαμες
-------------------------------------------------------------------------------
Feminine Nouns : η , ες
Word
Singular
Nom - η - λέξη
Gen της - λέξης
Acc. - την - λέξη
Plural
Nom - οι > λέξεις
Gen - των > λέξεων
Acc. - οι > λέξις
------------------------------------------------------
Feminine Nouns : ος , οι
Exit
Singular
Nom - η - έξοδος
Gen της - εξόδου
Acc. - την - έχοδο
Plural
Nom - οι > έξοδοι
Gen - των > εξόδων
Acc. - οι > εξόδους
----------------------------------------------------------------
αεροπλάνο - airplane
λεμόνι - lemon
οξυγόνο - Oxygen
μουσική - Music
ράδιο - Radio
παλάτι - Palace
ωροσκόπιο - horoscope
ρύζι - Rice
πιάνο - Piano
τρένο - Train
φιλοσοφία - Philosophy
υστερία - Hysteria
φωτογραφία - Photography
νοστάλγία - Nostalgia
ψυχολογία - Psycology
σαλάτα - Salad
χάος - Chaos
μέθοδος - Method
ιστορία- History
------------------------------------------------------------------------------
Καλό μεσημέρι - Have a nice siesta
Καλό απόγευμα - Have a nice afternoon
Καλό βράδυ - Have a nice evening
Fill correct adjective
Ο αδερφός είναι καλός .
Ο πατέρας είναι καλός .
Ο μαθητής είναι καλός .
η αδερφή είναι καλή .
η μητέρα είναι καλή .
το βιβλίο είναι καλό .
το παιδί είναι καλό
το μάθημα είναι καλό .
---------------------------------------------------------------------
Fill the correct definite article
η σαλάτα
ο χάρτης
η ώρα
το παγωτό
ο άντρας
ο φοιτητής
ο λογαριασμός
το αεροπλάνο
η μέρα
η κυριακή
το βούτυρο
η φοιτήτρια
το τσάι
ο δρόμος
το κρασί
το γράμμα
η ταβέρνα
το κοτόπουλο
τα περίπτερο
η πορτοκαλάδα
ο άνθρωπος
ο φούρνος
το ταξί
το παιδί
η πλατεία
το μαθημα
ο Αμερικανός
ο Ελληνας
ο Γάλλος
η μπύρα
ο καφές
το νερό
η τράπεζα
ο γιατρός
το λεωφορείο
η γυναίκα
το μουσείο
το Σάββατο
το μπάνιο
το όνομα
το ψωμί
η Αμερικανίδα
η Ελληνίδα
-----------------------------------------------------------------
Match with numbers
είκοσι
δεκατρία
οκτώ
ένα
δεκαπέντε
έξι
σαράντα επτά
εβδομήντα τέσσερα
δέκα
τριάντα τρία
ενενήντα
πενήντα πέντε
Α , ωραια - Ah , Nice
Χάρηκα - Nice to meet you
Τι έγινε ; - What happened
Ελα ρε , τι έγινε ; Come on , What's going on .
Τι γίνεται ; What is happening ?
Για σου Νικο , Τι γίνεται ; Hey Niko , What is happening ?
Τι λέει ; How is it going ? ( Lit - What it says )
Τι λέει ρε φίλε ; How is it going my friend ?
Τα παώ καλά - I am doing well .
Καλή φάση - Cool
Θα ήθελα - I would like
Μπορώ να έχω - Can I have
από - from / since /out of / than
Είμαι από την Ελλάδα . - I am from Greece
Το σπίτι είναι από πέτρα . The house is made out of stone .
Είμαι καλύτερος από εσένα .- I am better than you .
Από πότε είσαι εδώ ; Since when you are here ?
Ο φίλος μου είναι από την Θεσσαλονίκη , και πάμε με το αυτοκίνιτο στην Αθήνα ,για δουλειά .
My friend is from Thessaloniki and we are going with the car to Athens , for work .
----------------------------------------------------------------------------
Για - For / about
Αυτό είναι για εσένα . - This is for you .
Φεύγω για την Αθήνα . - I am leaving for Athens .
Μιλάμε για εμένα . - We are talking about me.
για δες - Go on , see
Για πιες μου - Go on , tell me
Θα πάρώ ένα δώρο για τον αδερφό μου .
I will get a gift for my brother .
Έφτιαξα καφέ για την Μαρία .
I made coffe for Maria .
Greek Preposition _ σε = in , at . to , on
mixed with definite article = σε + το = στο
Never mixed with indefinite article - ένας , μια , ένα .
είμαι σε ένα αυτοκίνιτο . I am in a car .
είμαι στο αυτοκίνιτο . - I am in the car .
-----------------------------------------------------------------------
με = with
It is never combined with article .
Γράφω με στυλό - I am writing with pen .
Γράφω με ένα στυλό - I am writing with a pen .
Πίνω καφέ με φίλη μου - I am drinking coffee with my friend .
✨ "बदलती धारा" ✨
लेखक : डॉ. मोहन तिवारी
समाज की बदलती तस्वीर, रिश्तों की अनकही सच्चाइयाँ और जीवन के वास्तविक संघर्षों को अपने भीतर समेटे हुए एक प्रभावशाली कहानी-संग्रह — "बदलती धारा" शीघ्र ही आपके बीच आने वाला है।
यह पुस्तक केवल पंद्रह कहानियों का संग्रह नहीं, बल्कि उन असंख्य अनुभवों का प्रतिबिंब है जिन्हें हम अपने आसपास हर दिन घटित होते देखते हैं। हर कहानी समाज के किसी न किसी ऐसे पहलू को उजागर करती है, जो पाठकों को स्वयं से जोड़ने की क्षमता रखती है। पात्र भले अलग हों, पर उनकी भावनाएँ, संघर्ष और परिस्थितियाँ कहीं न कहीं हमारे जीवन का हिस्सा प्रतीत होती हैं।
प्रख्यात साहित्यकार डॉ. मोहन तिवारी अपनी संवेदनशील लेखनी और गहन सामाजिक दृष्टि के माध्यम से एक बार फिर पाठकों को चिंतन और आत्ममंथन की नई दिशा देने जा रहे हैं। स्वयंयुग प्रकाशन से प्रकाशित उनकी यह आठवीं कृति साहित्य प्रेमियों के लिए एक विशेष उपहार सिद्ध होगी।
📖 सच्चाई से रूबरू कराती कहानियाँ
💫 समाज का जीवंत आईना
❤️ हर पाठक के मन को छू लेने वाला संग्रह
बहुत जल्द... आपके हाथों में होगी एक ऐसी पुस्तक, जो केवल पढ़ी नहीं जाएगी, बल्कि महसूस की जाएगी।
#ComingSoon #बदलतीधारा #DrMohanTiwari #StoryCollection
---------------------------
‘पहेली सा प्यार’ एक अनोखा कविता-संग्रह है। यह संगह प्रेम के विभिन्न रंगों और उसकी जटिल भावनाओं के बारे में बताता है। इस पुस्तक की कविताएँ पाठकों को प्रेम की गहराई, उसकी पेचीदगियाँ और उसकी सुंदरता का एहसास कराती हैं।
लेखक ने अपने भावनात्मक अनुभवों को कलात्मक शब्दों में पिरोकर हर कविता में पठनीयता क़ायम कर दी है। इसलिए हर कविता की बातें पाठकों की अपनी लगती हैं। ये कविताएँ न केवल दिल को छू लेने वाली हैं, बल्कि विचारों को भी प्रेरित करती हैं।
प्रेम की खुशी, दर्द, इंतज़ार और संवेदनाओं से परिपूर्ण यह संग्रह पाठकों को सोचने पर मजबूर करता है और उन्हें प्रेम की जादुई दुनिया में ले जाता है। हर कविता एक नया अध्याय खोलती है, जो प्रेम की विविधता को दर्शाती है। ‘पहेली सा प्यार’ पुस्तक उन सभी के लिए है, जो प्रेम को समझना चाहते हैं और उसके विभिन्न पहलुओं का आनंद लेना चाहते हैं। यह पुस्तक निश्चित रूप से दिल को छूने वाली और यादगार अनुभव देने वाली है।
#comingsoon #svayanyugpublication
--------------------------------------------------------------------
Negation
Όχι -
- Είστε η δεσποινίς Αλίκη ;
- όχι .
- όχι , δεν είμαι η δεσποινίς Αλίκη .
δε(ν )
μη ( ν )
μη / μην = don't
- Δεν καπνίζω . - I don't smoke .
- Δεν έχω σημερινή εφημερίδα , έχω χθεσινή .
I don't have today's newspaper , I have yesterday's .
_ Δυστυχώς δεν έχουμε δωμάτια .
Unfortunately , we don't have any rooms .
- Δεν είμαι η κυρία Παπαδοπούλου.
Τίποτα - nothing / anything
ποτέ - never / ever
πουθενά - nowhere / anywhere
κανένας , καμιά , κανένα - No one , none / anyone
-----------------------------------------------------------------------------
ΜΗΝ ΚΟΒΕΤΕ ΤΑ ΛΟΥΛΟΥΔΙΑ
μην κόβετε τα λουλούδια
Don;t cut the flowers
ΜΗΝ ΠΑΤΑΤΕ ΤΟ ΓΡΑΣΕΙΔΙ
μην πατάτε το γρασίδι .
Do not walk on grass
ΜΗ ΣΤΑΘΜΕΥΕΤΕ
μη σταθμεύετε
No Parking
ΑΠΑΓΟΡΕΥΕΤΑΙΗ ΣΤΑΘΜΕΥΣΗ
απαγορεύεται η στάθμευση
Parking is prohibited
ΜΗΝ ΚΑΠΝΙΖΕΤΕ
μην καπνίζετε
No Smoking
ΑΠΑΓΟΡΕΥΕΤΑΙ ΤΟ ΚΑΠΝΙΣΜΑ
απαγορεύεται το κάπνισμα
Smoking is prohibited
ΜΗ ΣΤΗΡΙΖΕΣΤΕ ΣΤΗΝ ΠΟΡΤΑ
μη στηρίζεστε στην πόρτα
Do not lean against the door
μη το λουλούδι - Not the flower - don't damage
μη την πόρτα - Not the door - don't slam it
Book Name : चाँद सितारे
ISBN Number : 978-93-47256-00-4Questions
Τι ; What
Πού ; Where
Πόσο ; How much
Πώς ; How
Ποιος , Ποια , Ποιο ; Who , Who , Which
θέλετε ενα παγωτό . You want an ice cream .
θέλετε ενα παγωτό ; do you want an ice cream ?
Πίνετε καφέ .
Πίνετε καφέ ; Do you drink coffee ?
Τι θέλετε ; What do u want ?
Πώς είστε ; How are you ?
Πού πάτε ; Where are u going ?
Ποιον / Ποια θέλετε ; Who do u want ?
Έχω - I have
έχεις - You have
έχει - he / She has
έχουμε - We have
έχετε - You all have
έχουν - They Have
------------------------------------------------------
καφές φραπέ - iced coffee
ο χυμός πορτοκάλι - Orange Juice
η πορτοκαλάδα - Orange Squash
ποζέ - Rose
μαύρο - Red of wine
ξηρο - dry
το ούζο - ouzo
------------------------------
Nouns and genders
- ος , - ης , -ας
ο άνθρωπος - man , mankind
ο ουρανός - Sky
ο δρόμος - Road
ο ναύτης - Sailor
ο επιβάτης - Passenger
ο μαθητής - Pupil
ο άντρας - man
ο βασιλιάς - King
ο εισπράκτορας - bus conductor
ο πατέρας - father
---------------------------------------------------------------
- η , - α
η νίκη - victory
η Νίκη - Girl's name
η αγάπη - love
η αδερφή - sister
η ζάχαρη -sugar
η γυναίκα - woman
η ώρα - hour
η θάλασσα - sea
η χώρα - country
---------------------------------------------------------------
Neuter
- ο , - ι
το πρόσωπο - Face
το βουνό - Mountain
το δέντρο - tree
το τραγούδι - song
τo ψωμί - bread
-------------------------------------------------------------
δίκλινος , δίκλινη , δίκλινο - double bed room
ο όροφος - Floor / storey
Το διαβατήριο - Passport
--------------------------------------------------------------------------
बड़े चाचा
बड़े चाचा , हाँ मेरे बड़े चाचा
लगते थे वे बिलकुल राजा
उनका चेहरा था रौबदार
दीखते थे सिपहसलार
रौबीले चेहरे पे बड़ी बड़ी मूँछे
डरते डरते सब पूछे
लेकिन आँखें थी शरारत भरी
और दिल था किसी बच्चे-सा
फितरत थी उनकी मसखरी
करते थे अक्सर तफरी
फोटोग्राफी का था शौक़
खींचते थे दिलचस्प तस्वीरें
ख़ुद ही धोते थे रील
इसीलिए उन श्वेत - श्याम तस्वीरों में
कुछ अलग तरह की आती थी फील
कुछ औजारों से भी था उनका वास्ता
ख़ुद ही चुना था उन्होंने वो रास्ता
औजारों के वो उम्दा थे उस्ताद
करते जिन्हें शागिर्द आज भी याद
चेहरे पर स्नेहिल एक मुस्कान
सदा खिली रहती थी
मिठाई को शुगर की दवा बताते थे
हर बीमारी को हवा में उड़ाते थे
पर दिल पर कब किसका ज़ोर चलता है
अक्सर दिल वालो को दिल छलता है
कोरोना की मार भी सह गए थे चाचा
लेकिन स्टंट मैन के दिल में लगे जो स्टंट
आख़िर आ ही गया था उनका अंत
मौत का पतझड़ लील गया था
सुन्दर -सा एक वसंत
याद बहुत आते है अब भी
मुझको मेरे बड़े चाचा
वो बड़ी बड़ी मूँछों वाले
रोतो को हँसाने वाले राजा से मेरे चाचा।
---------------------------------------------------------------
इन्दुकांत आंगिरस जी को साहित्यिक क्षेत्र में 'रसिक देहलवी' के नाम से भी जाना जाता है, जो हिंदी साहित्य और अंतर्राष्ट्रीय अनुवाद के क्षेत्र में एक प्रतिष्ठित नाम हैं। दिल्ली में जन्मे और पले-बढ़े इन्दुकांत आंगिरस जी ने व्यवसाय प्रबंधन में उच्च शिक्षा (PGDBM) प्राप्त की है, लेकिन उनका झुकाव साहित्य और भाषा-संस्कृति के प्रति बहुत ही गहरा है। इन्दुकांत आंगिरस जी (रसिक देहलवी ) एक बहुभाषाविद (Polyglot) लेखक भी हैं। वे हिन्दी, अँगरेज़ी, उर्दू के साथ-साथ कई यूरोपीय भाषाओं जैसे हंगेरियन, ग्रीक, चेख और लिथुआनिअन पर भी असाधारण पकड़ रखते हैं।संस्थागत जुड़ाव एवं सामाजिक योगदान भी आप का उल्लेखनीय है। साहित्य और समाज को जोड़ने के उद्देश्य से आपने परिचय साहित्य परिषद् , दिल्ली और सनद फाउंडेशन , दिल्ली की स्थापना करी। आपकी विनम्रता और साहित्य के प्रति अटूट निष्ठा इस बात से झलकती है कि आप मानते हैं— "ऐसी कृति की रचना अभी शेष है (जिसके लिए सम्मान लिया जाए)।" वर्तमान में इन्दुकांत आंगिरस जी स्वतंत्र लेखन, वैश्विक अनुवाद परियोजनाओं और साहित्यिक गतिविधियों में पूरी तरह संलग्न हैं। आपकी डिजिटल क्षेत्रों में भी उपस्थिति देखी जा सकती है। साहित्य पथ पर इन्दुकांत आंगिरस जी इसी तरह आगे बढ़ते रहें, सभी का मार्गदर्शन करते रहें यही शुभकामनाएं हैं
आभा दवे
लेखिका/ कवयित्री
मुंबई ,महाराष्ट्र
-----------------------------------------------------------------------
Indu kant Angiras Sir, I met him recently and I am so glad that we met. He is a multilinguist and has laid his hands in many fields in his life, because of which his experience helps me a lot. I am recently learning Hungarian language from him. He is my mentor, guide and a friend. He is very kind in nature. He is a poet too. I like his sense of humour in his writings. The best thing is he is a lifelong learner and still learning. No matter the age, he learns himself and believes in learning and teaching good to others and being a helping hand. I wish for his healthy life.
Misha :
Gold Medalist in Kalaripayattu
-------------------------------------------------------------------------------
श्री इन्दुकांत आंगिरस से मैं करीब चालीस वर्षों से परिचित हूँ , परिचित ही क्यूँ , निरंतर उनका सहयात्री बन कर साहित्यिक यात्रा करता चला आ रहा हूँ। आप बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं। आप ने गीत , ग़ज़ल , मुक्तक , लघुकथा , कविता , हाइकु , दोहे जैसी विधाओं में सफलतापूर्वक लेखन किया है। आपने " शहर और जंगल " , " प्रेम -प्रसंग " और " फ़्लैश बैक " जैसे उत्कृष्ट काव्य संग्रहों का सृजन किया है। आपने अँगरेज़ी एवं हंगेरियन भाषा से कुशल अनुवाद किया है। आपने यूट्यूब पर अनेक प्रतिष्ठित विभूतियों का साक्षात्कार भी लिया है। नए युवा कवियों को साथ लेकर उनकी प्रतिभा को आगे बढ़ाने का कार्य करते रहे हैं। आपकी दीर्घायु एवं साहित्य जगत में उज्ज्वल भविष्य के लिए कोटि कोटि शुभकामनाएँ।
- शिवनलाल जलाली - दिल्ली
=--------------------------------------------
दिल्ली में जन्मे इन्दुकांत आंगिरस 'रसिक देहलवी' हिंदी साहित्य और अनुवाद जगत के एक अत्यंत प्रतिष्ठित और बहुआयामी हस्ताक्षर हैं। बहुभाषी प्रतिभा के धनी श्री आंगिरस हिंदी, अंग्रेज़ी और उर्दू के साथ-साथ हंगेरियन, ग्रीक, चेख और लिथुआनिअन जैसी दुर्लभ यूरोपीय भाषाओं पर भी असाधारण पकड़ रखते हैं। 'परिचय साहित्य परिषद्' और 'सनद (ΣΑΝΑΔ) फाउंडेशन' के संस्थापक के रूप में वे साहित्य और समाज की निरंतर सेवा कर रहे हैं। उनके कई एकल कविता संग्रह (जैसे 'शहर और जंगल', 'गजरे') और अनूदित कृतियाँ प्रकाशित हो चुकी हैं, और वर्तमान में वे स्वतंत्र लेखन व अनुवाद में पूरी निष्ठा से संलग्न हैं। उनकी सबसे बड़ी साहित्यिक विशेषता विश्व साहित्य को हिंदी के करीब लाना है। उन्होंने हंगेरियन लोककथाओं ('तीन वरदान'), अरबी कविताओं और शांदोर पैतोफ़ी की रचनाओं का हिंदी में उत्कृष्ट अनुवाद करके भारतीय पाठकों के लिए वैश्विक साहित्य के द्वार खोले हैं।
- संतोष संप्रीति , दिल्ली .
-----------------------
उर्दू और हिंदी शाइरी में 'रसिक देहलवी' के नाम से मशहूर इन्दुकांत आंगिरस, दिल्ली में जन्मे एक बहुमुखी प्रतिभा के धनी प्रसिद्ध साहित्यकार हैं । इन्हें उर्दू, हिन्दी, अंग्रेज़ी, यूनानी,हंगेरियन,चेख और लिथुआनियन भाषाओं पर अधिकार हासिल है। वे एक प्रसिद्ध अनुवादक और संपादक हैं । ' जन्नत की ट्रेन ' उनका उत्कृष्ट लघुकथा संग्रह है। इनके द्वारा अनुवादित एक लोककथा 'सारस और बगुला' ने मुझे बहुत प्रभावित किया क्योंकि इसमें आम जनजीवन की संवेदनाओं को दिलचस्प ढंग से उकेरा गया है । वे छन्दमुक्त कविता के धनी और लघुकथाओं के मौलिक रचनाकार हैं । सहज,सरल एवं गहरी बात कहने में सक्षम, आंगिरस जी अपनी कला में माहिर हैं और बढ़िया साहित्यकार होने के साथ-साथ एक प्रभावशाली इंसान भी हैं । उनकी निजी वेबसाइट शुरू हो गयी है जिस के लिए मैं उन्हें हार्दिक बधाई देता हूँ और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करता हूँ। ।
कर्नल तिलक राज (सेवा निवृत्त)
------------------------------------------------------------------------------------
जब से परिचय हुआ है, इंदुकांत आंगीरस जी का साहित्यिक व्यक्तित्व मुझे हमेशा सक्रियता की एक ऐसी मिसाल लगा है जो बहुत ही जीवंत और प्रेरणादायी है। अनेक भाषाओं के ज्ञाता और अनेक विधाओं में अपना निरंतर रचनात्मक सहयोग देने वाले ये हमारे प्रिय और महत्त्वपूर्ण लेखक हैं। अनुवाद और संपादन के क्षेत्र में भी इनका उल्लेखनीय योगदान है। अभिव्यक्ति की नई तकनीक से जुड़े हुए हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि साहित्य के विभिन्न क्षेत्रों में इनका योगदान हमें समृद्ध करता रहेगा।
- दिविक रमेश , दिल्ली ।
---------------------------------------------------------------------
2007 में बेटे - बहू के पास बंगलुरु आते जाते रहने और वहाँ की साहित्यिक संस्था 'साहित्य साधक मंच' के कार्यक्रमों में जाने के कारण भाई इन्दुकान्त से परिचय हुआ जो आज भी कायम है । इस दौरान मैनें पाया कि वे निहायत ही सरल, सीधे और विनम्र इंसान हैं जो किसी का दिल नहीं दुखा सकते । कभी भी अपने बारे में बड़ी बातें नहीं करते और सदैव सक्रिय रहते हैं ।
- रमेश जोशी
----------------------------------------------------------------------------
[7:48 PM, 5/27/2026] Pramod Jha Moradabad: इंदुकांत आंगिरस की सशक्त रचनाधर्मिता
प्रमोद झा
लब्ध प्रतिष्ठ कवि और शायर इंदुकांत आंगिरस की सशक्त रचनाधर्मिता है और आज आप किसी परिचय को मोहताज नहीं हैं। जब आंगिरस जी शायरी में डूबते-उतराते हैं तो एक से बढ़कर एक बेहतरीन शेर सामने आते हैं। दिल को छू लेने वाली ग़ज़लों वगैरह की यहां बेबाकी से बात की जाए तो ये जिक्र करना प्रासंगिक है कि आप रसिक देहलवी के नाम से भी बाखूबी जाने जाते हैं। पत्रिकाओं और समाचार-पत्रों में अनेकानेक कविताएं और ग़ज़लों के अलावा लघु कथाएं भी प्रकाशित हुई हैं। जब मैंने इनकी ग़ज़लों, कविताओं और लघु कथाओं का जायजा लिया तो इस बात से बहुत खुशी हुई कि इंदुकांत ने समय, समाज,पात्र और चरित्रों वगैरह के बारे में बढ़िया सृजन और चित्रण किया है। यह भी उल्लेख करना मेरे लिए समीचीन होगा कि अपने सनद फाउंडेशन पर आपने मेरा साक्षात्कार लिया और वर्तमान परिवेश और परिदृश्य को दृष्टिगत रखते हुए अच्छे सवाल किए थे और इन सवालों का जवाब दिया था मैंने। सनद पटल सक्रिय है और अब तक अनेक साहित्य मनीषियों के साथ आप संवाद स्थापित कर चुके हैं। बहुत श्रेष्ठ विचार अभिव्यक्त हुए हैं और इस तरह की प्रभावी प्रस्तुति के लिए आपको बधाई देता हूं।
आंगिरस की बहु आयामी प्रतिभा है और लेखनी के धनी हैं । दिल्ली में जन्मे इन्दुकांत ने पीजी डी बीएम की शिक्षा हासिल की और हिंदी और अंग्रेजी से इतर भी आपने अन्य
भाषाओं हंगेरियन ,ग्रीक ,चेख ,उर्दू , लिथुआनिअन को मनोयोग से सीखा। आपकी कई प्रकशित पुस्तकें हैं और ये अत्यन्त प्रभावित करने वाली हैं।
एकल कविता संग्रह – “ शहर और जंगल “ , “ गजरे”, “ प्रेम - प्रसंग “ , “ फ़्लैश बैक “, “चाँद सितारे रात “( हाइकु संग्रह ) , ई बुक्स के अंतर्गत एकल कविता संग्रह : “ प्रेम - प्रसंग “ , “ फ़्लैश बैक “, “चाँद सितारे रात “( हाइकु संग्रह ) , तीन वरदान ( हंगेरियन लोककथाओं का हिन्दी अनुवाद ) , सहयात्री ( कविता संग्रह ) : लघुकथा संग्रह - जन्नत की ट्रेन के अलावा साझा कविता संकलन - क्षितिज की दहलीज़ पर , परिचय राग , राम हाइकु पीयूष , इंद्रधनुष कविता का , श्री राम मंदिर - काव्य यात्रा ( भाग - 1) , वैश्विक लघुकथा पीयूष , वागीश वैश्विक लघुकथाएँ, आख़िर कब तक आदि हैं। English – ARANYANI – An Indian Ecowomen Poetry Book edited by Noel Lorenz/Sonali Sharma (साझा ) , In the Quest of Light ( Anthology of Poems ) आदि हैं और जो अनुवाद कार्य किया है ,उनमें अभिनेता की मृत्यु - मूल हंगेरियन कहानियों का हिन्दी अनुवाद ( साझा ) घर का पता - अरबी कविता का अँगरेज़ी से हिन्दी अनुवाद ( एकल)
हंगेरियन लोक कथाएँ - मूल हंगेरियन लोक कथाओं का हिन्दी अनुवाद ( एकल) लिथुआनिअन लोक कथाएँ- मूल लिथुआनिअन लोक कथाओं का हिन्दी अनुवाद ( एकल) यानोश आरान्य -कथा गीत एवं कविताएँ -मूल हंगेरियन कविताओं का हिन्दी अनुवाद ( साझा ) स्वाधीनता, प्यार - शांदोर पैतोफ़ी की कविताओं का हिन्दी अनुवाद ( साझा ) भी हुआ है।
विशेष रूप से ये भी उल्लेख योग्य है कि बतौर पत्रकार भी आपने कार्य किया है। देशवासी मेल - पाक्षिक हिन्दी समाचार पत्र -दिल्ली में संपादन, आकांक्षा - साहित्यिक पत्रिका - ग़ाज़ियाबाद, नन्हे मुन्नों की बड़ी चिंताएँ - अनाथ बच्चों द्वारा रचित काव्य संकलन का संपादन किया। अदबी यात्रा पाक्षिक ऑनलाइन पत्रिका के आप संपादक रहे। सम्मान - ऐसी कृति की रचना अभी शेष है। सम्प्रति ,आप श स्वतंत्र लेखन व अनुवाद में संलग्न हैं। आंगिरस जी, परिचय साहित्य परिषद् , दिल्ली / सनद - ΣΑΝΑΔ फाउंडेशन – दिल्ली के संस्थापक हैं।
[8:19 PM, 5/27/2026] Pramod Jha Moradabad: आंगिरस जी का व्यापक फलक है और विषय विविधता के दृष्टिकोण से भी आप आकाश के विस्तार को अपने दामन में समेटे हुए हैं। सृजनशीलता से सम्बद्ध विचार और कला पक्ष का सम्यक निर्वाह हुआ है। बड़ी अच्छी बात है कि आप विचार के अनुकूल, परिवेश, पात्रों, घटनाओं और परिस्थितियों की कल्पना कर लेते हैं और सही से संदर्भित भी करते हैं। ऐसी खासियत के चलते ही बड़ी अच्छी-अच्छी कविताएं और ग़ज़लें भी हुई हैं। इनके रचना संसार से संबंधित विशिष्टता यह भी है कि आत्मानुभूत और जीवनानुभवों को अभिव्यक्ति मिली है और सामाजिक यथार्थ का स्वरूप प्रतिबिम्बित होता है। आपने पाठकों की रुचि, कल्पना और विचार शक्ति को बढ़िया भाषा और शिल्प में विकसित किया है । अलबत्ता, आंगिरस का एक सुसंगत यथार्थवाद है और आप बधाई के पात्र हैं।