Friday, June 12, 2026

Greek _ Polite _ Expressions

 Δεν μου λέτε παρακαλώ - Please tell me 

Χαιρετίσματα - Greetings 

Χρόνα πολλά - Many Happy returns 

Επίσης - Same to you 

Αντίο σας - Good Bye 

Καλή αντάμωσι - Good bye till we meet again 

Συγχαρητήρια - Congratulations 

Περαστικά σας - Get well soon 

Περάστε - After You 

Στήν υγειά σας  - To your health 

Αυ έχετε τήν καλωσύνη - would you be so kind 

Μου κάνετε μία χάρι - Do me a favour 

Εύχαρίστως - Gladly 

Καλή έπιτυχία - Good luck 

Άσφαλώς - Certainly 

Καλό ταξίδι - Have a Nice trip 

Greek_Lesson_10



Personal Pronouns 


εγώ - I 

εσύ - You

αυτός - He 

αυτή - She 

αυτό - It 

εμείς - We 

εσείς - You all 

αυτοί - He All 

αυτές - She all 

αυτά - It all 




Κανένα -  any / some / nobody /none 

Το χιλιόμετρο - The Kilometer 

Το εστιατόριο - Restaurant 

Το λεωφορείο - Bus

Το φλυτζάνι - The cup  

σκέτος - η -ο  - unsweetened  / plain 

χωρίς - without 

Το γαλα - Milk

Το τσαι - Tea 

Το  λεμόνι - Lemon 

η φρυγανιά - The toast 

Το μέλι - The honey 

κρύος - α-ο

διψω - I am thirsty 

η δραχμή - Singular 

οί δραχμές - Plural 

κρίμα - It's pity 

διότι - Because 

Το κουλούρι - The doughnut

Το ψωμί - Bread 

η μαρμελάδα - Marmalade - Jam 

η δραχμή - Singular

οί δραχμές - Plural

Το πουρμπουάρ - Tip 

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Αυτό είναι πολύ ακριβό . - It is very expensive .


Αυτός  θέλγει καφέ . - He wants coffee .


Η ώρα είναι δύο . -  It is 2' o clock .


Που είναι το λεωφορείο ; Where is the bus ?





Thursday, June 11, 2026

Testimonial

 एक मुलाकात साहित्यकार इंदुकांत के साथ - राही राज़, बेंगलुरु। फर्स्ट एडिटर            इंदुकांत अंगिरस मस्त मौला इंसान हैं ।

           जिंदगी में अब तक बहुत दोस्त मिले, बहुत सारे मुझे साहित्यकारों से मेरी मुलाकात हुई,कुछ छूट गए , कुछ साथ चले। कुछ छूटकर भी नहीं छुटे , बेशक बातें कभी कदाल होती है, मगर उनके साथ यादें बहुत रहती हैं,उन्हीं यादों में से एक हमारे अजीज दोस्त हैं इंदुकांत अंगिरस । जिन्हें हम भूलना भी गर चाहें तो नहीं भूल सकते हैं। 

         हमें आज भी याद है उनका चेहरा,जब वो मुझे साहित्य साधक मंच की मासिक गोष्ठी में मिले थे , शेरो शायरी के शौकीन और एक अलग व्यक्तित्व के मालिक , बहुत ही खूबसूरत अंदाज और उनके पढ़ने का तौर तरीका पहली ही नजर में मुझे ना जाने क्यूँ अच्छा लगने लगा ।  

     मस्त मौला इंदुकांत के चेहरे पर हमने कभी भी मायूशी नहीं देखी और ना ही कभी कंजूसी कभी देखी , पैसा रहे ,ना रहे,सदा मग्न में रहते हैं। ओरेकल कंपनी से रिटायरमेंट के बाद, यहीं उन्होंने अपना आशियाना बनाए रखा और अनवरत साहित्य साधक बनकर सेवा आज भी कर रहे हैं। 

      पहले बंगलोर में ही रहते थे, और इसी दरम्यान इनसे बहुत गहरी दोस्ती हो गई, अगर हम सच कहें तो हमदोनों दो जिस्म एक जान हो गए । 

      इनकी पुस्तक की दुकान थी हम प्रायः इनके दुकान पर जाया करते थे और साहित्यिक चर्चा किया करते थे, दक्षिण भारत में हिंदी के प्रचार प्रसार के लिए इंदुकांत का योगदान अभूतपूर्ण है। 

      हमने इनके साथ मिलकर सबसे पहले कारवाँ को खोला ,बाद में इनके ही मदद से हमने कलश कारवाँ फाऊंडेशन, बेंगलूरु संस्था की स्थापना की ,जिसमें इंदुकांत जी का योगदान अभूतपूर्ण रहा , संस्थापक सदस्य आज भी हैं। बंगलोर से बाहर रहने के कारण, थोड़ा सा दिक्कत हमें हो रहा है,मगर ये आज भी हमारे दिल में हैं। और हम आज भी इन्हें हमारे मार्गदर्शक और संरक्षक मानते हैं। 

       हमें याद आ रहा है वर्ष 2021 इनके ही पब्लिकेशन से हमने सर्व प्रथम एक पुस्तक भी निकाली, जो साझा संकलन के रूप प्रकाशित हुई थी, पुस्तक का नाम उगता सूरज है,जिसमें पूरे भारत के नामी गिरामी साहित्यकारों की रचना है।

      हमें याद आ रहा है इनकी जीप जो पूरे बंगलोर अकेली थी ,जिस पर हमलोग बैठकर अक्सर घूमने निकल जाया करते थे, बंगलोर का शायद ही कोई कोना होगा , जहाँ हमलोग नहीं घूमने गए होगे। 

      हमसे अगर सच पूछा जाए तो हम स्पष्ट कहते हैं कि आज राही जिस मुकाम को हासिल किया है उसमें इंदुकांत अंगिरस का जबरदस्त हाथ है, चाहे वह किसी प्रकार का हो न तन, मन और धन तीनों से इंदुकांत अंगिरस ने हमें सहायता की है । 

       हम इनके पिताजी से भी दिल्ली निवास पर मिल चुके हैं,हम इनके साथ राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित परम आदरणीय स्वर्गीय श्याम सिंह शशि जी भी मिल चुके हैं। जिन्होंने पहली मुलाकात में ही हमें बहुत कुछ सिखा दिया था। आज वो नहीं है फिर उनकी स्मृति हमारे साथ है। 

      इंदुकांत अंगिरस को गजल में महारथ हासिल है,कविता  और कहानी गजब की लिखते हैं, आज उनकी गिनती गजलकार रूप में की जाती है तो लघु कथा के जनक कहे जाते हैं।

      इंदुकांत हिंदी अग्रेजी और उर्दू  के अलावा भी फ्रेंच भाषा के भी अनुवादक रहें हैं और जानकर रहें हैं। 

       इंदुकांत की जितनी तारीफ हम करें,कम ही होगा ,क्योंकि सर से पांव तक इनमें तारीफ ही तारीफ हमें दिख रही । ईश्वर इन्हें दीर्घायु रखें,यही कामना करता हूँ। 

राही राज़, बेंगलुरु

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नई सुबह की दस्तक 


साझा संकलनों का चलन पुराना हैं। साझा संकलनों की महत्ता हमेशा से रही है और हमेशा रहेगी क्योंकि साझा संकलनों के ज़रिये पाठकों को एक ही पुस्तक में अनेक लेखकों की रचनाएँ पढ़ने को मिल जाती हैं।  यह हर्ष की बात है कि  बैंगलोर की प्रसिद्ध कवयित्री श्रीमती  प्रीती राही  के सम्पादन में " सुप्रभात " साझा  संग्रह प्रकाशित  हो रहा है जिसमें  कविताएँ , गीत ,ग़ज़ल , लघुकथाएँ और लघु कहानियाँ संकलित हैं।  नारी शक्ति को समर्पित इस संग्रह की सभी रचनाकार बधाई के पात्र हैं।  दुनिया की आधी आबादी के नाम दुनिया की दीगर ज़बानों में बहुत कुछ लिखा जा रहा है।  मुझे आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि इस कड़ी में " सुप्रभात " साझा संग्रह अपनी अलग पहचान अंकित कर पायेगा। प्रीती राही द्वारा प्रज्वलित नारी शक्ति की ये मशाल निश्चय ही  इस संसार के अँधेरे को चीर कर नई रौशनी और नई सुबह को इस धरती पर उतारेगी। अनेकानेक शुभकामनाओं  के साथ..

आपका अपना 

इन्दुकांत आंगिरस 

दिल्ली  

SANADEDUCATION.ORG

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Tuesday, June 9, 2026

Khusro ki Ghazal

 ज़े-हाल-ए-मिस्कीं मकुन तग़ाफ़ुल दुराय नैनाँ बनाए बतियाँ

कि ताब-ए-हिज्राँ नदारम ऐ जाँ न लेहू काहे लगाए छतियाँ


शबान-ए-हिज्राँ दराज़ चूँ ज़ुल्फ़ ओ रोज़-ए-वसलत चूँ उम्र-ए-कोताह

सखी पिया को जो मैं न देखूँ तो कैसे काटूँ अँधेरी रतियाँ


यकायक अज़ दिल दो चश्म जादू ब-सद-फ़रेबम ब-बुर्द तस्कीं

किसे पड़ी है जो जा सुनावे पियारे पी को हमारी बतियाँ


चूँ शम-ए-सोज़ाँ चूँ ज़र्रा हैराँ ज़ मेहर-ए-आँ-मह बगश्तम आख़िर

न नींद नैनाँ न अंग चैनाँ न आप आवे न भेजे पतियाँ


ब-हक्क-ए-रोज़-ए-विसाल-ए-दिलबर कि दाद मारा ग़रीब 'ख़ुसरव'

सपीत मन के वराय रखूँ जो जा के पाऊँ पिया की खतियाँ


Monday, June 8, 2026

Greek_Lesson_9_Pronouns

 εγώ είμαι στο σπίτι μου .

εσύ είσαι στο σπίτι  σου .

αυτός είναι στο σπίτι του 

αυτή είναι στο σπίτι της 

αυτό είναι στο σπίτι του .

εμείς είμαστε στο σπίτι μας .

εσείς  είστε στο σπιτι σας .

αυτοί είναι στο σπίτι  τους .

αυτές είναι στο σπίτι  τους .

αυτά είναι στο σπίτι τους .


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New Words 


ντύνω  - I dress 

λαμπρός - Bright

έγκρίνω - I approve

τσιγάρο -Cigarette

συγχωρειτε - Excuse 

αύγό - egg

αύρα - Breeze

η πρεσβεία  - embassy 

δεξιά - right 

Μάλιστα - Indeed 

αριστερά - Left

ο σταθμός - Station

κατεύθείαν - straight 

μπροστα - in front of 

κατεύθείαν μπροστα - straight ahead 

πάρα πολύ - very much 

κοντά - Near 

μακρυά - Far 

γστερα - then / afterwards /after 

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Sample sentences 


Είναι ο σταθμός αριστερά ;

Is the station on the left ?

Σας εύχαριστω πάρα πολύ .

Thank You very much .

Πού είναι η πρεσβεία ; 

where is the embassy ?

Η πρεσβεία είναι δεξιά .

The embassy is on the right .

Ο σταθμός είναι κοντά .

The station is near by .

Το προξενείο είναι κοντά άλλα η πρεσβεία είναι μακρυά .

The consulate is nearby but embassy is far .

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Greek_ Accusative

 Singular 


Nominative / Subject                            Accusative / Object 


M    Ο Φίλος                                              τον φίλο 


η γυναίκαι                                            την γυναίκα 


Ο  Παιδί                                              Το Παιδί ( No Change )


σε + τον = στον 

σε+την = στην 

σε+το = στο 


O Καναδάς                        Είμαι από τον Καναδά 

η Ισπανία                           Είμαι από την Ισπανία 

Το Μαρόκο                        Είμαι από το Μαρόκο 


Πού μένεις ;


Μένω στον καναδά                 I live in Canada 


Μένω στην Ισπανία .                I live in Spain 

Μένω στο Μαρόκο .                 i live in Moroco 

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Η Μαρία αγαπάει τον Νικο.  Maria loves Niko .


Η Μαρία αγαπάει τον Κώστα.   Maria Loves Kosta 


Τον Κώστα αγαπάει η Μαρία .   Maria Loves Kosta 


Αγαπάει η Μαρία τον Κώστα .  Maria Loves Kosta .


Ο κώστας αγαπάει την Μαρια .  Kostas Loves Maria 


Την Μαρία αγαπάει Ο κώστας .  Kostas Loves Maria 


Αγαπάει ο Κώστας την Μαρία . Kostas loves  Maria 






Plural