अदृश्य अस्तित्व
( डॉ नीता रानी )
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अदृश्य अस्तित्व
बीस अनसुलझे सच की कथा मंजरी
लेखिका : डॉ नीता रानी
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मुद्रक : श्री जी सेल्स इंडिया , दिल्ली
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समर्पण
हे परमपिता परमेश्वर !
' अदृश्य अस्तित्व ' मेरे उन शब्दों का अर्पण है जो मुझे समाज में ' श्रुति ज्ञान ' के रूप में मिला और जिन्हें मैंने अपने जीवन के सच्चें अनुभवों की कसौटी पर रखा और महसूस भी किया है। मेरी इस आध्यात्मिक यात्रा और इसमें समाहित अनुभव को मैं श्रद्धापूर्वक आपकी श्री कमल चरणों मैं समर्पित करती हूँ।
डॉ नीता रानी
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पुस्तक के बारे में -
' अदृश्य अस्तित्व ' एक खोज , एक समर्पण है। योगिनी की साधना से उपजा चेतना का प्रकाश है। क्या हम वही हैं जो दिखाई देते हैं या हमारा एक अंश कहीं गहराइयों में छिपा है । जहाँ एक ओर श्रुति ज्ञान द्वारा लिखित कहानियाँ हैं तो दूसरी ओर लेखिका ने ईश्वर के अस्तित्व को स्वीकार किया है। एक वाक्य में कहें तो लेखिका ने जीवन के अनुभव , सामजिक दृष्टिकोण ओर आध्यात्मिक चेतना एक मूलसूत्र में पिरो कर ये सवाल खड़ा किया है कि , क्या शक्ति वहीं है जो प्रत्यक्ष है या असली सामर्थ्य उस ' अदृश्य ' विशवास में है जो हमें हर मुश्किल में थामे रहता है ? चाहे वो रिश्तों की सजावट हो , प्रकृति का मौन सन्देश हो या स्वयं की खोज - ये पुस्तक उस हर व्यक्ति के लिए है जो जीवन को सिर्फ ' देखना ' नहीं बल्कि ' महसूस ' करना चाहता है।
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पुस्तक के तत्व
विज्ञान : जल प्रदूषण में शोध का तार्किक आधार
आध्यात्म : योग ओर अंतर्मन की गहराइयों का अनुभव
श्रुति ज्ञान
साहित्य : सरल और हृदयस्पर्शी भाषा शैली
सत्य आँखों से नहीं , आत्मा के प्रकाश से देखा जाता है - पुस्तक का एक अंश
जब विज्ञान हार जाता है , विशवास की शुरुआत होती है। - पुस्तक का मर्म
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लेखिका परिचय
डॉ नीता रानी : एक वैज्ञानिक मस्तिष्क और एक साधक का हृदय। जल प्रदूषण में पी एच डी करने के बाद उन्होंने पाया कि सत्य केवल प्रयोगशालाओं में ही नहीं बल्कि मौन की गहराइयों में भी छुपा है।
समाज सेवा और योग परीक्षक के रूप में उनके कार्यों ने सैकड़ों जीवन को प्रभावित किया है। उनकी यह दूसरी पुस्तक ' अदृश्य अस्तित्व ' जीवन के उन पहलुओं को उजागर करती हैं जिन्हें हम अक्सर अनदेखा कर देते हैं।
पीएचडी की टोपी वाला स्केच
लेखिका के पास जल प्रदूषण के क्षेत्र में पी एच डी की शैक्षणिक गरिमा व योग के वर्षों का गहरा अनुभव है। यह कृति उनके इन्हीं दोनों संसारों के समन्वय का परिणाम है।
प्रकाशित पुस्तक - योगिनी ( मेरी आत्मकथा : कहानी संग्रह )
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प्रस्तावना :-
मेरी प्रथम पुस्तक ' योगिनी ' यदि मेरे व्यक्तित्व के निर्माण और आंतरिक शक्ति की कहानी थी तो ' अदृश्य अस्तित्व ' उस शक्ति के विस्तार की प्रस्तुति है। यह पुस्तक मेरी पहली कृति से आगे की यात्रा है - जहाँ मैंने केवल स्वयं को ही नहीं , बल्कि अपने चारों ओर व्याप्त उस ईश्वरीय सत्ता ओर श्रुतिज्ञान को पहचानने का प्रयास किया है जो हम सबके जीवन को अदृश्य रूप से संचालित करती है।
शरीर नश्वर है परन्तु प्रेम संबंधों की ऊर्जा कभी समाप्त नहीं होती। इन पन्नों के माध्यम से मैं उन्हीं अदृश्य दूरियों को सुलझाने का प्रयास कर रही हूँ जो हमे एक जन्म से दूसरे जन्म तक बांधे रखती है।
जीवन के कुछ मोड़ और तर्क ऐसे होते हैं जहाँ वैज़ान और तर्क फीके पड़ जाते हैं और विश्वास की एक नई किरण फूटती है। अक्सर हम मानते है कि मृत्यु एक अंत है लेकिन पुरानी दहलीज़ों पर ऐसी दास्तानें दफ़्न हैं जो बताती हैं कि अंत ही असल में आरम्भ है।
इन कथाओं में सिर्फ कल्पना नहीं बल्कि ये कथाएँ उन लम्हों की गवाह है जो मैंने अपने जीवन और परिवारिक परिवेश में महसूस किया है । यहाँ कुछ घटनाएं पुनर्जन्म के क़िस्से मात्र नहीं है, बल्कि एक जीवंत सत्य बनकर उभरी हैं। पुनर्जन्म की कहानी में आप पढ़ेंगे कि कैसे सपना काल की सीमाएँ लांघ कर एक नए आंगन को ढूंढ निकालता है। या बलाक को पूरी स्मृति के रह जाने से पूर्वकालीन घटनाएं याद रह जाती हैं। ये कथाएँ हमें याद दिलाती हैं कि शरीर नशवर है, परन्तु प्रेम संबंधों की ऊर्जा कभी समाप्त नहीं होती।
' अदृश्य अस्तित्व ' मेरे लिए एक खोज एक समर्पण है, जिसे मेरे लिए सिर्फ शब्दों को पिरोना नहीं , बल्कि आत्मा की आवाज़ को काग़ज़ पर उतारना है। मेरे जीवन में विज्ञान और आध्यात्म का अनूठा संगम रहा है। जहाँ एक और मेरी अकादमिक पृष्ठभूमि ( पीएचडी जल प्रदूषण में ) ने मुझे तथ्यों की परखना सिखाया वहीं योग और साधना ने मुझे उस अदृश्य शक्ति को अनुभव करने की दृष्टि दी जो इस समस्त ब्रह्माण्ड का आधार है। इस संकलन में बीस कहानियाँ केवल कल्पना नहीं है। इनमें वो श्रुति-ज्ञान समाहित है जो मुझे सामाज , बड़ों की सानिध्धय और अपने परिवेश से विरासत में मिला है। ' लहू से लिखा अभिषेक ' से लेकर ' हरि बोल ' तक का सफ़र असल में मनुष्य के अहंकार के विसर्जन और ईश्वरीय अस्तित्व को स्वीकारने का सफ़र है ।
जब मैंने ' मुक्ति की छाया ' और 'लालटेन वाली नानी ' जैसी कहानियों को लिखा तो मुझे आभास हुआ कि हमारे पूर्वजों का ज्ञान और इश्वरीय संकेत आज भी हमारे जीवन के अँधेरे रास्तों पर प्रकाश बनकर चलते हैं। यह पुस्तक उन सभी जिज्ञासुओं के लिए है जो ये मानते हैं कि इस दृश्य जगत से परे भी एक ऐसा ' अस्तित्व ' है जो हमें थामे हुए है।
मैं अपनी इस कृति को उस परम सत्ता को समर्पित करती हूँ जिसकी उपस्तिथि को मैंने अपने श्वास और अनुभव में पाया है।
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पुस्तक परिचय -
दादी के बटुए की महक और नानी का पुराना संदूक जिसे हम भानुमति का पिटारा कहते थे, में बन्द वो क़िस्से , आज भी मेरे अंतर्मन में एक अदृश्य अस्तित्व की तरह जीवित है।
वो अक्सर कहती थी, "बेटा, हर दीवार का एक कान होता है, और हर पुराने पेड़ के अपनी एक ज़बान। तब उन बातों को हम बचपना समझते थे,पर आज समझ आता है कि वो हमारी परंपराओं का वो हिस्सा थीं जो किताबों में नहीं, बल्कि दिल की धड़कों में मिलता है। हमारे आंगन में पुराने नीम के पेड़ नहीं थे, वह केवल एक पेड नहीं था, बल्कि परिवार का सबसे बड़ा सदस्य था।
हमारे आंगन में वो पुराना नीम का पेड़ सिर्फ एक पेड नहीं था, वो परिवार का सबसे बुजुर्ग सदस्य था। नानी कहती थी कि उसकी छाँव में बैठकर जो भी सच बोला जाए वो सीधे इश्वर तक पहुंचता है।
मैंने जब पहली बार अपना क़लम उठाया तो मुझे महसूस हुआ कि मैं अकेली नहीं लिख रही हूँ, मेरे पीछे वो तमाम पीढ़ियाँ खड़ी हैं , वो माँएँ खड़ी हैं जो अपनी कहानियाँ कभी दुनिया को बता नहीं पाईं। उनकी सुनी- सुनाई बातें आज मेरी स्याही बनकर काग़ज़ पर उतर रही हैं। मैं उन पुरानी पीढ़ियों की अनकही बातों का दस्तावेज बनाकर एक तरह से अपनी जड़ों को अमर कर देना चाहती हूँ। दादी और नानी की कहानियाँ केवल क़िस्से नहीं होते , बल्कि उनमें सादियों का अनुभव , संस्कार और हमारी संस्कृति का सार छुपा होता है, जिनमें गहरी सीख होती हैं। मैं आज केवल एक पुस्तक नहीं लिख रही हूँ, बल्कि ' विरासत का सेतु ' बना रही हूँ जो आने वाली पीढ़ी को अपनी पहचान से जोड़कर रखेगा। जिससे अगली पीढ़ी ये जान सके कि उसका वजूद कितना गहरा है। हमारी संस्कृति के वह छोटे-छोटे नुस्खें और रिति-रिवाज कहीं खो न जायें ।
' अदृश्य अस्तित्व 'उन पुरखों की एक श्रद्धांजलि बन सके, जिन्होनें हमे ये संस्कार दिए। आज की भाग - दौड़ भरी ज़िंदगी और उन पुराने नुस्खों का एक सामानांतर सम्बन्ध है। इन कहानियों में वही देसी और अपनापन भरा अनुभव है जो दादी - नानी हमें दे कर गईं।
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' अदृश्य अस्तित्व ' / तर्क से परे / वो जो सच था / आभास / छाया /सामानांतर अनोखे अनुभव
अपनी बात : -
विज्ञान हर चीज़ को लॉजिक ( प्रमाण ) से समझता है लेकिन इंसानी दिमाग़ हमेशा उस अनजान से आकर्षित होता है जिसे वो समझ नहीं पाता। समाज में ऐसी ढेरों कहानियाँ होती हैं जो दादी - नानी के ज़माने से चली आ रही हैं। इस तरह की कहानियां लिखने का उद्देश्य है हमारी संस्कृति के उस हिस्से को बचाये रखना जो सिर्फ सुनी - सुनाई बातों पर टिका है।
कभी कभी हम जिसे अनहोनी कहते है वो इंसान के दिमाग़ का विश्वास और भय के बीच झूलना है। क्या वो सच में एक शक्ति थी या सिर्फ एक वहम ? ये कहानियाँ ये सन्देश देती है कि दुनिया में ऐसी शक्तियाँ हैं जो इंसानी समझ से ऊपर है , वो हमे विनम्र रहना सिखाती है।
विज्ञान कहता है कि अनोखी घटनाओं के वक़्त हमारे शरीर कि सतर्क अवस्था ( एक्सट्रीम सर्वाइवल मोड ) लड़ो या भागो ( फाइट और फ्लाइट मोड ) में होता है। समझ से परे स्तिथियों में हमारा शरीर बहुत तेज़ी से प्रतिक्रिया करता है। उस समय शरीर में अटरिनलीन का प्रभाव निश्चित रूप से बढ़ जाता है।
जैसे ही हम कुछ अप्राकृतिक देखते या महसूस करते है तो हमारे दिमाग़ का एक छोटा - सा हिस्सा जिसे ' एमिगडेला ' कहते हैं , तुरंत ख़तरे का सिग्नल भेजता है। ये दिमाग़ का वो हिस्सा है जो ( जज़्बात ) भावनाओं और डर को नियंत्रित करता है। दिमाग़ से सिग्नल मिलते ही किडनी के ऊपर स्तिथ एड्रिनल ग्लैंड तुरंत ख़ून में एड्रीनलीन हॉर्मोन ( एपिनेफ्रीन ) छोड़ देता है जो उस अनहोनी कि आशंका को और बढ़ा देता है। हृदय तेज़ी से धड़कने लगता है ताकि माँसपेशियों को ज़्यादा ऑक्सीजन मिल सके। हमारी आँखों कि पुतलियाँ फैल जाती हैं ताकि हम अँधेरे में देख सकें, छठी इंद्री ज़्यादा काम करने लगती है क्योंकि दिमाग़ हर छोटी हरकत पर ध्यान देता है। शरीर में ग्लूकोज का स्राव तेज़ी से होता है जिससे अचानक एक ऐसी ताकत महसूस होती है जो आम हालत में नहीं होती।
Back cover content
Meri Photo.
श्रुति से मिला ज्ञान,
और अनुभव से मिली पहचान।
जब 'मैं' मिटा ,तभी हुआ उस,
अदृश्य अस्तित्व का निर्माण।
-डॉ.नीता रानी
क्या अदृश्य का अर्थ शून्य है?या उस अनंत ऊर्जा का द्वार है जो हमारे जीवन को संचालित करती है?यह पुस्तक विज्ञान और आध्यात्मिकता के पुल पर खड़ी एक ऐसी यात्रा है जो आपको जल की गहराई से लेकर आत्मा की शांति तक ले जायेगी।
प्रतिष्ठित पुस्तक- योगिनी (मेरी आत्मकथा:कहानी संग्रह) की लेखिका डॉ. नीता रानी की एक और मार्मिक प्रस्तुति, जो अनुभवों के आईने में चारों ओर बसी एक ऐसी दुनिया ढूंढती है जो आँखों से दिखाई नहीं देती परंतु उसका अदृश्य अस्तित्व हमारे जीवन के हर पहलू को प्रभावित करता है।
Logo, mail id ,श्रेणी , वाला box yogini पुस्तक से ले लीजिए।
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