Tuesday, September 22, 2026

खोया हुआ पर्स

 खोया हुआ पर्स 


क़िस्सा बहुत पुराना है लेकिन मेरे ज़ेहन में आज भी ताज़ा। नयी जवानी के जोश में लगी - बंधी  


Monday, September 21, 2026

STS_SURAT_303

 प्रिय मित्रो ! नमस्कार , आशा है आप सानंद होंगे।  स्वयं एक कवि और लेखक होने के नाते मैंने ये अनुभव किया है कि जीवन की भाग - दौड़ से दूर कुछ पल फुर्सत के भी मिलने चाहिए जिससे  हम अपनी ऊर्जा को पुनः recharge कर सकें और कुछ अनूठा सृजन भी कर सकें। इसी परिकल्पना के अंतर्गत     " सूरत " शहर में Furnished  2BHK  flat , Short Term Stay   के लिए कवियों / लेखकों / कलाकारों के लिए उपलब्ध है।  अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें।  सादर - इन्दुकांत आंगिरस - 9900297891   

Friday, September 18, 2026

Hungarian_Nagy _Cynthia

 

Imádlak

Imádlak... neked annyi, mint egy kis cicát
szeretni, vagy egy könyvet kedvelni,
egy filmet megnézni.
Ezt a gyönyörű szót nem lehet így elcsépelni!
Én imádlak, de nem úgy, mint a falevelet,
mely orrod előtt a fáról a magasból lepereg...
Imádlak... ha kimondom, testem lelkem
beleremeg!

Mert már kevés a szó „szeretlek”,
hisz majd szétvetnek az érzelmek!
Ha belélegzed hajam s bőröm finom illatát,
csókjainktól részegülten várjuk a csodát.


S én akarom, hogy Te is megérezd a

szerelem hatalmát, mert csakis akkor
érted meg e két szó titkos varázsát,
s együtt áldozunk vágyaink oltárán!



करती हूँ तुम्हारी  पूजा 


करती हूँ तुम्हारी पूजा  … तुम्हारे लिए, यह एक छोटे बिल्ली के बच्चे को  प्यार करने जैसा है,

या एक किताब का आनंद लेने जैसा,

या एक फ़िल्म  देखने जैसा।

तुम इस ख़ूबसूरत शब्द को यूँ ही हल्के में नहीं ले सकते !

 करती हूँ तुम्हारी  पूजा , लेकिन उस पत्ते की तरह नहीं

जो बहुत ऊँचे पेड़ से,  ठीक तुम्हारी  नाक के  नीचे गिरता है...

 ' करती हूँ तम्हारी पूजा ' . कहते वक़्त ,  मेरी   देह  और आत्मा

काँप उठती है !


 क्योंकि 'आई लव यू' शब्द अब काफी नहीं,

मेरी भावनाएँ फूटने को हैं !

जब तुम मेरे बालों और त्वचा की कोमल खुश्बू में साँस लेते हो,

हमारे चुम्बनों से मदहोश, हम उस अचरच की प्रतीक्षा करते हैं।


और चाहती  हूँ मैं  कि तुम भी महसूस करो

प्रेम की उस शक्ति को , क्योंकि तभी तुम

 इन दो शब्दों के रहस्यमयी जादू को समझ पाओगे, 

और साथ मिलकर हम अपनी इच्छाओं की वेदी पर बलिदान चढ़ाएंगे !

Saturday, September 12, 2026

SANAD_WEB_TESTING

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Kavi_Sammellan

 पत्थर से  शीशा बन जाना सब के बस की बात नहीं 

सीने में ग़म को दफ़नाना सब के बस की बात नहीं 

ग़ैरों के रिसते ज़ख़्मों पर कोई भी हँस लेता है

अपने ज़ख़्मों पर मुस्काना सब के बस की बात नहीं

Friday, September 11, 2026

लघुकथा - सन्यासी

  लघुकथा - सन्यासी 


 लघुकथा - सन्यासी 


                           टावर के अधिकारी ने अपने चीफ़ से पूछा , " सर , मैं समझ नहीं पा  रहा हूँ कि पालकी में पधारे रहे 92  वर्षीय सन्यासी ने  टावर से महिला गार्ड्स को हटाने के लिए क्यों कहा ? सन्यासी तो मोह - माया का त्याग करके ही सन्यासी बनते हैं।" 

चीफ़ ने मुस्कुराते हुए अधिकारी से कहा , " सिर्फ केसरी चोला पहनने से कोई सन्यासी नहीं बनता। इन्होंने सिर्फ चोला बदला है , औरत का बदन इनके दिमाग़ से कभी नहीं निकला। इसीलिए दुनिया के सामने  नज़र तक मिलाने से घबराते हैं।  आख़िर है तो पुरुष ही ..... 


इन्दुकांत आंगिरस 

9900297891