उत्साह टोली - वार्षिक रिपोर्ट : 2024-25
प्रस्तावना -
उत्साह टोली की परिकल्पना सरल अवधारणाओं पर आधारित है। मसलन एक अवधारणा ये है कि अगर कोई बच्चा जीवन भर काम आने वाला कोई एक संस्कार या सॉफ्ट स्किल सीख ले, तो बस इतना ही काफी है।
लगातार प्रयासों के सफल होने में हम हमेशा पूर्ण विश्वास से लैस होकर चुनौतियों का सामना करते हुए अडिग खड़े रहे हैं। यह बेवजह नहीं है। एक छोटा सा उदाहरण हमारी दृढ़ता को बेहतर ढंग से समझा सकता है। उच्च प्रदर्शन करने वाले बच्चों में भी ये पाया गया कि उनकी एकाग्रता पहले से घट रही थी । यह सर्वविदित था कि वे मोबाइल फोन पर लंबा समय बिता रहे थे। हमने एक गहन सत्र का आयोजन किया जिसमें हमने बच्चों से अनौपचारिक रूप से इस विषय पर बातचीत की और उन्हें मोबाइल के स्क्रीन समय का हमारे मस्तिष्क पर प्रभाव की तस्वीरें, जानकारी और आँकड़े दिखाए। यहाँ तक कि कुछ चुटकुले भी साझा किये गए कि हम जल्द ही फिर से चार पैरों पर चलने लगेंगे । एक महीने बाद, हमने यह जानने के लिए बच्चों से हाथ उठाने को कहा कि कितने बच्चों ने अपने मोबाइल फोन के उपयोग का समय कम किया था। कुछ बच्चों ने हाथ उठाए, जिनमें से तीन बच्चों ने प्रतिदिन आधे घंटे से भी कम समय तक उपयोग किया था।
संदर्भ :
नवें वर्ष में, उत्साह टोली परियोजना ने उत्तराखंड के नौकुचियाताल और उसके आसपास के बच्चों में महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक, सामाजिक-सांस्कृतिक और शैक्षिक पहलुओं को सफलतापूर्वक संबोधित करना जारी रखा है । पर्यटक-चालित अर्थव्यवस्था के अपरिवर्तनीय प्रभाव को अल्पकालिक लाभ के लिए कृषि भूमि की अनियंत्रित बिक्री ने और भी बढ़ा दिया है। अधिकांश ध्यान देने योग्य व्यवहार पैटर्न पॉप कल्चर और सोशल मीडिया से प्रभावित पाए गए हैं।
हमने यह भी देखा है कि 10 साल तक के छोटे स्कूल बच्चों द्वारा सृजनात्मक AI ( कृत्रिम बुद्धिमत्ता )प्लेटफ़ॉर्म के उपयोग में वृद्धि हुई है।
MIT द्वारा प्रकाशित हालिया अध्ययन के परिणाम, जो आलोचनात्मक सोच का आकलन करते हैं, आश्चर्यजनक नहीं हैं।
तीन समूहों से OpenAI, Google खोज और किसी भी एप्प का उपयोग किए बिना निबंध लिखने के लिए कहा गया। EEG रिकॉर्ड्स ने दिखाया कि ChatGPT उपयोगकर्ता तंत्रिका, भाषाई और व्यवहारिक स्तरों पर लगातार कम प्रदर्शन कर रहे थे और उनकी मस्तिष्क सहभागिता सबसे कम थी।
इस परिदृश्य में, केवल ( IQ ) आईक्यू स्तर ही नहीं बल्कि एक मजबूत भावनात्मक गुणांक (EQ) विकसित करने की आवश्यकता को कम करके नहीं आंका जा सकता। उत्साह टोली परियोजना ने घर और स्कूल के बाहर इस तीसरे क्षेत्र में अपने प्रयासों को पुनः रेखांकित करते हुए अधिक विकसित किया । सीमित परिस्थितियों में जीवन भर सीखने के अवसरों, भाईचारे की भावना, सहभागी और सामूहिक निर्णय लेने, सार्वजनिक शिष्टाचार, अधिकारों/कर्तव्यों, जिज्ञासा और विश्लेषणात्मक कौशल, विभिन्न सॉफ्ट स्किल्स, रचनात्मकता और बाहरी दुनिया से परिचय के लिए यथासंभव अधिकतम खिड़कियाँ खोलना।
इस संदर्भ में, भारत के दिल्ली विश्वविद्यालय के लेडी इरविन कॉलेज के मानव विकास एवं बाल्यकाल अध्ययन विभाग की सहायक प्रोफेसर, डॉ. डिंपल रंगीला, पीएच.डी. से एक रिपोर्ट प्राप्त करना संतोषजनक था। (उन्होंने एक टीम बिल्डिंग कार्यशाला आयोजित की।)
वह कहती हैं:
" उत्साह टोली टीम द्वारा अपनाए गए मूल दर्शन और प्रथाएँ बाल विकास के प्रमुख सिद्धांतों और अवधारणाओं के अनुरूप हैं, जिनमें शामिल हैं:
बाल-केंद्रित दृष्टिकोण: यह स्वतंत्रता और स्व-निर्देशित सीखने को बढ़ावा देता है, व्यक्तिगत सीखने की गति का सम्मान करता है और अंतर्निहित प्रेरणा तथा संज्ञानात्मक सहभागिता को प्रोत्साहित करता है।
बच्चे की सक्रिय भूमिका का मूल्यांकन: सीखने की प्रक्रिया में बच्चों की सक्रीय सहभागिता को पहचानना ; यह दृष्टिकोण निर्णय लेने, जिम्मेदारी और आत्म-कुशलता को बढ़ावा देने में मदद करता है है, जो संज्ञानात्मक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
संदर्भात्मक शिक्षण: समझ और स्मरणशक्ति को बढ़ाने के लिए शिक्षण को संदर्भात्मक और सांस्कृतिक रूप से प्रासंगिक बनाया जाता है। यह विधि नई जानकारी को मौजूदा ज्ञान से जोड़ती है जिससे गहरी संज्ञानात्मक सहभागिता को बढ़ावा मिलता है।
सहकर्मी मार्गदर्शन:सहकर्मियों के साथ मिलकर सीखने की प्रक्रिया आपसी ज्ञान को सीखने और साझा करने के लिए प्रोत्साहित करती है। सहकर्मी मार्गदर्शन साझा रूप से सीखना और सामाजिक कौशल को बढ़ावा देकर सामाजिक और संज्ञानात्मक विकास को बढ़ाता है।
ये सभी सिद्धांत " उत्साह टोली "द्वारा आयोजित गतिविधियों में गहराई से समाए हुए थे और इन्हें लगातार अपनाया जाता रहा। "
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पद्धति
डॉ. डिंपल ने आगे कहा, " उत्साह टोली परियोजना की एक महत्वपूर्ण ताकत इसका बाल-केंद्रित दृष्टिकोण है। बच्चों को उनकी गतिविधियों में कई विकल्प दिए जाते हैं जिससे यह सुनिश्चित होता है कि उनकी बात सुनी जाए और उनकी सक्रिय भागीदारी को स्वीकार किया जाए। यह दृष्टिकोण न केवल उनके आत्मविश्वास को बढ़ाता है बल्कि जिम्मेदारी और स्वतंत्रता की भावना को भी पोषित करता है।"
" उत्साह टोली " के संदर्भ में, डॉ. डिंपल ने Piaget के संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत और रचनात्मकता सिद्धांत, Vygotsky' के निकटवर्ती विकास क्षेत्र और सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत, तथा Garner के बहुबुद्धिमत्ता सिद्धांत का उल्लेख किया है।
उत्साह टोली में, सहज रूप से विकसित समग्र दृष्टिकोण के समग्र प्रभाव ने बच्चों में निम्नलिखित परिणाम दिखाए हैं:
* अपने विचार व्यक्त करने की क्षमता के साथ आत्मविश्वास में वृद्धि
* अन्य दृष्टिकोणों की चर्चा और समायोजन
* ग़ैर -आक्रामक सामूहिक समझौता
• 'उनकी जगह' के लिए बढ़ी हुई स्वामित्व भावना
वर्ष भर, मार्गदर्शक धैर्य और तर्क के साथ बच्चों का मार्गदर्शन करने के लिए निरंतर प्रयास करते रहते हैं।
पिछले कुछ वर्षों की तरह गतिविधियों को 4 प्राथमिक क्षेत्रों में समूहित किया गया।
* संज्ञानात्मक विकास और आलोचनात्मक सोच
* कार्यशालाओं सहित विशेष गतिविधियाँ
* शिल्प और कला
* ख़ुशहाल दिन
* व्यवहार परिवर्तन (सामाजिक और नागरिक जिम्मेदारी)
वर्षों के दौरान, आंतरिक मूल्यांकन स्वाभाविक रूप से विकसित हुआ है और आवश्यकतानुसार हमेशा संशोधित किया गया है।
इस वार्षिक चक्र में, जैसे-जैसे टीम को अधिक सशक्त बनाया गया, मूल्यांकन के लिए एक से अधिक औपचारिक विधि लागू की गई। इसे भी पहले , प्रथम तिमाही में एक रूप में अपनाया गया और बाद में शेष तीन तिमाहियों के लिए संशोधित रूप में ।
इस वर्ष के दौरान, बच्चों को निम्नलिखित प्रयोजनों के लिए मदद उपलब्ध कराई गयी :
* 10 विद्यालय विषय
* 11 गतिविधियाँ
* 6 प्रतियोगिताएँ
* 3 कार्यशालाएँ
* 2 विशेष प्रदर्शन
* 1 वार्षिक टूर
संज्ञानात्मक विकास और आलोचनात्मक सोच
संज्ञानात्मक विकास और आलोचनात्मक सोच के लिए गतिविधियों की एक विस्तृत श्रृंखला को समग्र रूप से संयोजित किया जाता है जो व्यक्तिगत रूप से, छोटी टीमों में, बड़े समूहों में या सामूहिक रूप से क्षमता निर्माण की एक श्रृंखला को भी सक्षम बनाती है।
STEM-उन्मुख खेल समग्र विकास के लिए एक मौन लेकिन प्रभावी उपकरण बन गए हैं।
* तर्कशक्ति का संवर्धन
वर्णमाला और संख्यात्मक साक्षरता के मौलिक कौशलों को कुछ अधिक केंद्रित रणनीतियों के साथ संबोधित किया गया। दैनिक गणितीय समस्याएँ, स्मृति अभ्यास दोहराना, पुनः स्मरण और रंगीन क़लम से लिखावट (पिछली वार्षिक रिपोर्ट देखें) के अलावा, अतिरिक्त प्रभाव के लिए निम्नलिखित शामिल किए गए:
* लकड़ी की तख्ती पर सामान्य और कर्सिव दैनिक लेखन अभ्यास जिसे बाद में नोटबुक में लिखा जाता है।
* पेन/पेंसिल को पकड़ने और काग़ज़ पर बिना दबाव डाले लिखने पर विशेष ध्यान।
* धीमी / कमजोर सीखने वालों के लिए: वर्णमाला और संख्याओं को उल्टा लिखना और समर्थित उल्टा चलना (मस्तिष्क के बाएँ और दाएँ गोलार्ध को मजबूत करना)
* मिलकर सीखना और साझा करना एक प्रभावी और ख़ुशहाल सीखने की प्रक्रिया के लिए एक सफल साधन बना रहा।
शैक्षणिक सहयोग इस प्रकार प्रदान किया गया :
उमा चनोटिया - टीम लीडर
कक्षा - V से VIII तक
बालिका - 12 , बालक - 15
कुल - 27
गणित , विज्ञान , अँगरेज़ी , अर्थशास्त्र , रसायनशास्त्र , भौतिकी , जीवविज्ञान
नीमा कर्नाटक - वरिष्ठ मार्गदर्शक
कक्षा - V से VIII तक
बालिका - 7 , बालक - 9
कुल - 16
हिन्दी , अँगरेज़ी , संस्कृत , पर्यावरण विज्ञान , गणित , विज्ञान
डिजिटल साक्षरता
हिन्दी और अँगरेज़ी टाइपिंग सीखने के लिए नियमित निगरानी प्रणाली जारी रही। सर सोभा सिंह ट्रस्ट द्वारा दान किए गए चार लैपटॉप इस प्रयास का मुख्य आधार थे। जहाँ चार-चार बच्चों के समूह लगभग प्रतिदिन बारी-बारी से 45 मिनट तक अभ्यास करते थे।
कम्प्यूटर : रेनू भट्ट / नीलिमा माथुर
आयु सीमा - 13 से 17 वर्ष तक
बालिका - 9 , बालक - 5
कुल - 14
स्क्रैबल
यह उन लोगों के लिए एक दैनिक गतिविधि बन गई जिन्होंने प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए स्वयं को नामांकित किया था। इसे 'दिन का शब्द' के माध्यम से सीखने की एक श्रृंखला द्वारा समर्थन किया गया था। इसमें दो या अधिक बच्चों द्वारा हिंदी में एक वाक्य तैयार करना, शब्दकोश का उपयोग करके अँगरेज़ी शब्द खोजना और फिर अँगरेज़ी में वाक्य तैयार करना शामिल था। इसे मार्गदर्शक द्वारा व्याख्याओं के साथ और संशोधित किया गया।
इस प्रक्रिया ने शब्दकोश का उपयोग न केवल स्क्रैबल खेलने और उसमें प्रतिस्पर्धा करने के लिए बल्कि रोज़मर्रा की ज़िंदगी में भी स्वाभाविक बना दिया है।
कैरम
यह अधिकांश बच्चों का सबसे पसंदीदा खेल है। इसके लिए किसी प्रेरणा की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन व्यवहार और नियमों में अच्छे अभ्यास पर बहुत ध्यान देना होता है।
विशेष उपलब्धि
" उत्साह टोली " में बोलचाल की अंग्रेज़ी और पुस्तकालय का उपयोग हमारे प्रयासों का अभिन्न हिस्सा बने रहे। इनके माध्यम से बच्चे वैश्विक नागरिक बनने के लिए आवश्यक कौशल सीखते हैं।
बोल चाल की अँगरेज़ी
पिछले वर्ष में बोली जाने वाली अँगरेज़ी के लिए विकसित नमूने मॉडल को आगे बढ़ाया गया और बच्चे रविवार तथा दैनिक सत्रों दोनों में उत्साहपूर्वक शामिल हुए। दैनिक सत्र पिछले वर्ष की टीम लीडर की प्रतिक्रिया के आधार पर शुरू किए गए और उन्होंने अधिक प्रत्यक्ष रूप से व्याकरण पर अधिक ध्यान केंद्रित किया।
विद्यालयों में भाषा माध्यम और आयु वर्ग के बीच की खाई को पाटने के लिए विभिन्न तकनीकों का और अधिक उपयोग किया गया। एक नई गतिविधि 'दिन का शब्द' शुरू की गई। बच्चे टीमों में काम करते हैं, हिन्दी में एक वाक्य लिखते हैं, शब्दकोश से संबंधित अँगरेज़ी शब्द ढूंढते हैं, अँगरेज़ी वाक्य बनाते हैं, जिसे फिर मार्गदर्शक द्वारा संशोधित किया जाता है।
बोली जाने वाली अँगरेज़ीऔर 'दिन का शब्द', स्क्रैबल तथा दैनिक एवं रविवार सत्रों के बीच एक चक्र बनाया गया। इस प्रक्रिया में प्रत्येक सत्र में स्तर धीरे-धीरे बढ़ाया गया। प्रत्येक इच्छुक बच्चे को सोचने और प्रतिक्रिया देने के लिए हमेशा पर्याप्त समय दिया गया।
रविवार सत्र
* 'an', 'en', 'in', 'on', 'un' वाले शब्द – नए शब्द + वाक्य
* वाक्यों के लिए ट्रिगर शब्द
* वाक्यों के लिए गडमड शब्द
उदाहणार्थ : Srinagar, J&K, capital, holds, of, Festival, Tulip, and, Shikara, region’s, beauty, showcase, Festival, the, the, the, to
वाक्य : Srinagar, the capital of J&K, holds the Tulip Festival and the Shikara Festival to showcase the region’s beauty.
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इसके अतिरिक्त, चार कार्यशालाएँ आयोजित की गयी ; प्रत्येक समूह के लिए एक -
फोटो कार्यशाला, स्पार्कल कार्यशाला, गाथा कार्यशाला, टीम-बिल्डिंग कार्यशाला।
कार्यशालाएँ
फोटो कार्यशाला
यह कार्यशाला फोटोग्राफर और फ़िल्म निर्माता जॉयदीप दास द्वारा आयोजित की गई थी। यह चार दिन ऊर्जावान और आकर्षक रहे। बच्चों ने अच्छी तस्वीर के लिए बुनियादी नियम और सावधानियाँ, परिदृश्य, फोटो निबंध और पोर्ट्रेट (प्रकाश के साथ) सीखे। उन्हें प्रशिक्षक की देख -रेख में बाहर जाकर कुछ कैंडिड फोटोग्राफी करने का अवसर मिला। रिपोर्ट संलग्न है।
स्पार्कल कार्यशाला
यह तीन दिवसीय बिना किसी लक्ष्य की कार्यशाला थी, जिसमें बच्चों को रंग, रूप, संयोजन और डिज़ाइन को स्वाभाविक रूप से खोजने का अवसर मिला। यह रंगों, चमकी , स्पार्कलर और मनकों के साथ मज़े, खेल और सृजन का समय था। बच्चों ने तीन दिन टोकरियों और पैकेटों में रखी सामग्री को खोजते हुए और चारों ओर बिखरी मिली-जुली सामग्री का आनंद उठाया । हर किसी ने अपना माध्यम चुना और जैसा चाहा वैसा काम किया।
गाथा कार्यशाला
यह नाटकीय कहानी-लेखन पर 7-दिवसीय कार्यशाला थी। कहानी के तत्वों को समझना , बुनियादी कहानी के विचार तैयार करना (व्यक्तिगत रूप से और समूहों में), सभी विचारों को मुख्य कहानी के ट्रिगर्स के लिए विखंडित करना। पूरे दिनों में अविश्वसनीय ऊर्जा, रचनात्मक उत्साह और गहन विचार रहे। उन्होंने चरित्र-चित्रण, नायक और खलनायक, अच्छाई और बुराई पर काम किया। नौकुचियाताल के ये छोटे कथाकार एक पूर्ण सार्वभौमिक चेतना दिखा रहे थे, जिसमें महान फ़िल्मों के ऐसे तत्व भी शामिल थे जिन्हें उन्होंने देखा भी नहीं था।
टीम-बिल्डिंग कार्यशाला / क्षमता-निर्माण कार्यशाला
यह कार्यकारी निदेशक से नीचे की टीम के लिए शीर्ष-से-नीचे प्रशिक्षण था। भारत के नई दिल्ली स्थित लेडी इरविन कॉलेज में बाल विकास की सहायक प्रोफेसर डॉ. डिंपल रंगीला ने इस प्रशिक्षण के लिए अवलोकन, संवाद और साक्षात्कार में गहन समय समर्पित किया। बच्चों की दैनिक दिनचर्या का अवलोकन करने, प्रतिक्रिया देने और तकनीकों को बेहतर व उन्नत करने के लिए प्रत्यक्ष संवादात्मक सत्र आयोजित करने के बीच यह एक अत्यंत मूल्यवान उपलब्धि थी।
स्पोकन इंग्लिश / व्याकरण – नीलिमा माथुर
कक्षा : IV से XII तक
आयु : 9 – 17 वर्ष
दैनिक समूह
बालिकाएँ : 8; बालक :12
कुल : २०
रविवार समूह
बालिकाएँ:16; बालक :17
कुल : 33 ( छह माह तक )
31 ( छह माह के बाद 2 बालक कम हुए )
पेशा चयन – पूर्व सैनिकों द्वारा रक्षा बलों की प्रस्तुति
सौजन्य वाइस एडमिरल अवनीश राय टंडन और कर्नल अनुराग चंद्र
आयु: 14 से 17 वर्ष
बालिकाएँ: 7; बालक: 3
कुल: 10
शतरंज –वरुण माथुर
आयु: 9 से 17 वर्ष
बालिकाएँ: 4; बालक: 7
कुल: 11
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लेक रिसॉर्ट में कलाकारों का शिविर
सौजन्य: रसाजा फाउंडेशन, दिल्ली
आयु: 13 से 15 वर्ष
बालिकाएँ: 3;बालक: 3
कुल: 6
फोटो कार्यशाला – जोयदीप दास
आयु: 9 से 15 वर्ष
बालिकाएँ: 13; बालक: 9
कुल: 22
स्पार्कल कार्यशाला – नीलिमा माथुर, वरुण माथुर
आयु: 8 से 17 वर्ष
कक्षा III से XII
बालिकाएँ: 9; बालक: 10
कुल: 19
गाथा कार्यशाला – वरुण माथुर, नीलिमा माथुर
आयु: 8 से 17 वर्ष
कक्षा : III से XII
बालिकाएँ: 8;बालक: 9
कुल: 17
टीम-बिल्डिंग कार्यशाला – डॉ. डिंपल रंगीला
टीम प्रतिभागी: नीलिमा माथुर , वरूण माथुर , उमा चनोटिया , भावना चनोटिया ,
हेमा राउतेला, रेणु भट्ट .
शिल्प और कला
हस्तशिल्प – मकरामे / एपन ( Aipan )
मकरमे, एपन लोक कला, राखी बनाना, करवा चौथ, जन्माष्टमी और दीवाली से संबंधित शिल्पों पर काम पिछले वर्षों की तरह जारी रहा। बच्चों के लिए रंगों, डिज़ाइन और संयोजन के विचारों की रचनात्मक खोज " उत्साह टोली " में होने का रोमांचक और संतोषजनक हिस्सा बनी हुई है।
इस वर्ष स्थानीय लोक कला एपन ( Aipan ) पर काम करने पर विशेष ध्यान दिया गया। रेखाओं और आकृतियों के लिए रूलर के माप और ज्यामितीय परकार जैसे सरल उपकरणों का उपयोग करके डिज़ाइन में सटीकता और शुद्धता विकसित करने पर जोर दिया गया।
सिलाई और बुनाई भी जारी रही।
क्राफ्ट और मकरामे – भावना चनोटिया
आयु: 12 से 16 वर्ष
बालिकाएँ: 12; बालक: 3
कुल: 15
एपन – हेमा राउतला
आयु: 9 से 15 वर्ष
लड़कियाँ: 13; बालक: 1
कुल: 14
सिलाई – भावना चनोटिया
आयु: 11 से 16 वर्ष
बालिकाएँ: 7;बालक: 2
कुल: 9
बुनाई – नीमा कर्नाटक
बालिकाएँ: 10
आयु: 11 से 15 वर्ष
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ललित कलाएँ
बच्चों के एक समर्पित समूह ने ललित कलाओं / उन्नत रचनात्मक कौशलों, विशेष रूप से कथक, गिटार, चित्रकला / स्केचिंग की औपचारिक तकनीकों और सुलेख ( Calligraphy ) में शुरुआती स्तर में अपनी रुचि बनाए रखी।
कथक साप्ताहिक सत्र
सिद्धांत और नियमित नृत्य अभ्यास पूरे वर्ष जारी रहा। बच्चों के एक समूह ने कथक के औपचारिक शिक्षण का एक पूरा वर्ष सफलतापूर्वक संपन्न किया।
कथक – दीक्षिका आर्य
आयु: 9 से 15 वर्ष
बालिकाएँ: 7;बालक : 1
कुल: 8
गिटार साप्ताहिक सत्र
दो नए गिटार और नियमित रूप से ऑनसाइट उपलब्ध एक प्रशिक्षक के साथ, गिटार की कक्षाएँ दैनिक कार्यक्रम का हिस्सा बन गईं। हालांकि कई बच्चों ने सीखने के लिए आवेग में क़दम उठाया, लेकिन दो लड़के समर्पित शिक्षार्थी बन गए और नियमित अभ्यास के साथ विभिन्न स्तरों पर आगे बढ़े।
गिटार – वरुण माथुर
आयु: 11 से 17 वर्ष
बालिकाएँ: 2; बालक: 9
कुल: 11
रेखाचित्र / चित्रकारी
कुछ बच्चों ने पेंटिंग में अपने कौशल को बढ़ाने के लिए रेखाचित्र / चित्रकारी की औपचारिक तकनीकें सीखने में गहरी रुचि विकसित की। अन्य बच्चों के लिए, सुलेख में सुधार करना कैलीग्राफी सीखने का एक प्रेरक कारण था। सभी ने प्रक्रिया का चरण-दर-चरण पालन करने के लिए आवश्यक धैर्य का प्रदर्शन किया।
रेखाचित्र और चित्रकारी – वरूण माथुर
आयु: 11 से 15 वर्ष
बालिकाएँ: 9; बालक : 1
कुल: 10
हैप्पी डेज़
ख़ुशहाल दिनों की यादें जीवन भर का उपहार हैं और " उत्साह टोली " के ये आनंदमय दिन हमेशा यादगार बने रहते हैं। इसलिए, जन्मदिन, स्वयं आयोजित कार्यक्रम, ट्रीट्स, छात्रों का सम्मान, वार्षिक यात्रा, सब कुछ वैसे ही जारी रहा जैसे हमेशा से रहा है।
जन्मदिन
यह उन सभी बच्चों के लिए हर 3-4 महीने में मनाया जाता है जिनका जन्मदिन उस अवधि में आता है। उन्हें एक छोटा -सा उपहार मिलता है और सभी अपने पसंदीदा केक और कुछ नाश्ते के साथ पार्टी कर पाते हैं।
कार्यक्रम के दिन (राष्ट्रीय दिवस / त्योहार / कोई अन्य)
यह पसंदीदा आत्म-प्रेरित उत्सव का उत्साह जारी रहा, हालांकि इसमें थोड़ा बदलाव किया गया। बॉलीवुड के रुझानों की नकल करने की प्रवृत्ति के जवाब में, उत्सव कार्यक्रमों की संख्या कुछ विशिष्ट आयोजनों तक सीमित कर दी गई और नृत्य को विकल्प के रूप में शामिल नहीं किया गया, जब तक कि वह कथक-शैली पर आधारित न हो। इसलिए उत्सव भाषणों/कविताओं/नाट्य-प्रस्तुतियों पर केंद्रित रहा। इसे बच्चों द्वारा कुछ मार्गदर्शन के साथ योजनाबद्ध और कार्यान्वित किया गया।
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मनाए गए उत्सव :
शिक्षक दिवस, बाल दिवस, जन्माष्टमी, क्रिसमस। लगभग सभी बच्चों को किसी न किसी रूप में भाग लेने के लिए प्रेरित किया गया। क्रिसमस जन्मदिनों के आने और क्रिसमस पोस्टर प्रतियोगिता के साथ एक भव्य आयोजन था।
विशिष्ट अतिथिगण
" उत्साह टोली " में अतिथि हमेशा विशेष होते हैं। दिन का आयोजन अतिथि की सुविधानुसार किया जाता है। लेखिका सुश्री माला दयाल, जो सर सोभा सिंह ट्रस्ट की एक ट्रस्टी हैं ने उत्साह टोली केंद्र का दौरा किया। यह एक संक्षिप्त लेकिन बहुत ही सौहार्दपूर्ण मुलाक़ात थी। तनुश्री सेनगुप्ता और कुमुद-शिरिश माथुर ने भी इस परियोजना में रुचि दिखाकर इसे गौरवान्वित किया।
वार्षिक यात्रा
इस बार, बच्चों ने मुक्तेश्वर की यात्रा पर सहमति व्यक्त की। यह एक ऐसी जगह है जहाँ से हिमालय की पंचचूली पर्वत श्रृंखला का 180-डिग्री का दृश्य दिखाई देता है, जिसमें नंदा देवी, नंदा कोट, नंदा घुंटी, त्रिशूल और पंचचूली चोटियाँ शामिल हैं। दाता, तनुश्री सेनगुप्ता की बदौलत, बच्चों ने घर लौटते समय स्वादिष्ट पेट भरने वाला दोपहर का भोजन किया।
बालिकाएँ: 14; बालक : 11
कुल: 25
व्यवहार में बदलाव (सामाजिक और नागरिक जिम्मेदारी)
सामाजिक और नागरिक जिम्मेदारी विकसित करने पर दिए गए ध्यान के प्रभाव से बच्चों के व्यवहार और व्यक्तित्व में एक स्पष्ट बदलाव देखा गया है। " उत्साह टोली "आने के कुछ ही हफ़्तों के भीतर, अधिकांश बच्चों ने अच्छी आदतों को अपना लिया है।
इसी के लिए, सभी गतिविधियों को लगन से जारी रखा गया:
• जूते-चप्पल और स्कूल बैग को व्यवस्थित तरीके से रखना
• खेलने या टैबलेट के लिए छीनना नहीं, बल्कि अनुरोध करना
• ट्रीट प्लेटों के लिए हाथ नहीं बढ़ाना, बल्कि अपनी बारी की प्रतीक्षा करना
• सत्रों में बोलने के लिए हाथ उठाना और अपनी बारी की प्रतीक्षा करना
• मार्गदर्शकों से बात करने के लिए धैर्यपूर्वक किनारे पर प्रतीक्षा करना / 'क्षमा कीजिए' कहना
• दूसरों की बात न टोकना, शारीरिक या मौखिक दुर्व्यवहार और दूसरों के बारे में शिकायत करने से बचना
• सफाई टीम द्वारा केंद्र परिसर की सफाई और सजावट करना
इसके अतिरिक्त, केंद्र, समुदाय और राष्ट्रीय स्तर पर होने वाली घटनाओं से नागरिकता पर बातचीत शुरू होती है। इन अवसरों का उपयोग लंबे संवादात्मक सत्रों के लिए किया जाता है, जहाँ बच्चों को समाज में अपनी भूमिका, उनके विकास और भविष्य के लिए महत्वपूर्ण आंतरिक मूल्यों के बारे में सोचने और जागरूक होने के लिए प्रेरित किया जाता है और साथ ही उन्हें अपने आस-पास की दुनिया के काम करने के तरीके को समझने में मदद की जाती है।
सफ़ाई टीम
आयु: 8 से 17 वर्ष
बालिकाएँ: 14; बालक: 7
कुल: 21
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