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कवयित्री - दीपज्योति गुप्ता " दीप "
© दीपज्योति गुप्ता " दीप "
ISBN : 978-93-86933-13-3
प्रथम संस्करण - 2026
मूल्य - 250/ रुपए INR
आवरण एवं चित्र - Pexels & AI
शब्द संयोजन एवं मुद्रक :
Publisher - PUSTKAM : No. 20/1 , 3rd Cross , Neharu Road , Guddadahalli ,
Bengaluru - 560026 , Mobile - 9900297891
CHAND SITARE : Children poetry by Deepjyoti Gupta ' Deep '
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नाम - दीपज्योति गुप्ता " दीप "
जन्म दिनांक - 21 अक्टूबर
स्थान - ग्वालियर ( म. प्र. )
शिक्षा - स्नातकोत्तर (अर्थशास्त्र , इतिहास ) बी. एड. , कम्प्यूटर स्नात्तकोत्तर डिप्लोमा ।
व्यवसाय - अध्यापन
पिताजी - श्री गणेश लाल सोनी ,कवि एवं समाजसेवी ( पूर्व एस. एल. आर.)
माता जी - श्रीमती शोभा
काव्य विधा - कविता, कहानी, गीत, ग़ज़ल , शायरी , मुक्तक एवं बाल साहित्य ।
प्रकाशन - देश के प्रतिष्ठित सभी समाचार पत्रों एवं विभिन्न पत्र - पत्रिकाओं में आलेखों, कविताओं एवं गीतों का प्रकाशन ।
संप्रति - साहित्य में निरन्तर लेखन कवि सम्मलेनों और मंचों पर सक्रिय भागीदारी ।
संपर्क - 515 - बी. आर. अपार्टमेंट , सुरेश नगर, थाठीपुर ग्वालियर म. प्र. Gwalior pincode - 474011
Address - 515 , B.R. Apartment , Suresh Nagar , Thatipur Gwalior , M.P. Pin - 474011
ई मेल - deepjyotigupta7@gmail.com
मोबाइल न. - 9399028356
7879944816
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1
अपना घर
महक महक महके फुलबाग़िया ,
चहक चहक चहके है चिड़िया।
गुटर गुटर गु बोले कबूतर ,
शायद कुछ बोले ये तीतर।
मैं.. मैं.. मैं..बोली ये बकरी ,
बहना भर लाई है गगरी।
अम्मा झटपट रोटी बनाती ,
बड़े प्यार से हमें खिलाती।
अपना घर है कितना प्यारा ,
लगता सारे जग से न्यारा ।
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2
पतंग
आसमान में उड़े पतंग ,
नीली डोरी इसके सँग ।
बच्चें इससे पेंच लड़ाते ,
हम सब इसका मज़ा उठाते ।
दूर गगन में जब उड़ जाती ,
आँखों से ओझल हो जाती ।
देख के रह जाते सब दंग ,
कितने सुन्दर इसके रंग।
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3
नीलगगन
कितना सुन्दर नीलगगन ,
जैसे हो फूलों का चमन ।
रोज़ ही आते इस पर तारे ,
हिलमिल कर रहते ये सारे ।
कभी ना लड़ते कभी ना रोते ,
वक़्त वो अपना कभी ना खोते ।
सदा समय पर आते हैं ,
सदा समय पर जाते हैं।
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4
चंदा
बादल में इक चंदा प्यारा ,
सबसे सुन्दर सबसे न्यारा ।
वस्त्र पहनता उजले उजले ,
तारो को सँग लेकर निकले ।
आँख मिचौली खेला करता ,
बदली में चुप से छिप जाता ।
छवि है इसकी बड़ी निराली ,
जैसे हो चाँदी की थाली ।
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5
धूप
ताज़ी स्वच्छ सुनहरी धूप ,
सावन की शर्मीली धूप ।
कभी बादलों में छिप जाती ,
छिप कर धीरे से मुस्काती ।
सर्दी में सौ नखरे दिखाती ,
सबको अपने पास बुलाती ।
दिखलाती प्यारा -सा रूप ,
लगती बड़ी भली ये धूप ।
मानव प्रकृति सभी को प्यारी ,
धूप जगत में सबसे न्यारी।
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6
चूहे की शादी
चूहे की हुई धूमधाम से
चुहिया के सँग सगाई ,
फूलों की डोली में बैठ कर
चुहिया ससुराल आई ।
डाल के ढोलक गले में
भालू जी ने नाच दिखाया ,
गदहे मामा ने भी अपना
गीत अनोखा गाया।
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7
तितली रानी
तितली रानी , तितली रानी
कहो , कहाँ से आई हो ?
पंखों में इतने सारे रंग
भर कर कैसे लाई हो ?
लगती हो तुम परियों जैसी ,
सुघड़ , मनोहर , मतवाली ।
नीली , पीली , लाल , गुलाबी ,
कत्थई , भूरी और काली ।
फूल - फूल का रस पीती हो ,
उड़ - उड़ कर इतराती हो ।
जब भी तुम्हें पकड़ना चाहे ,
हाथ नहीं तुम आती हो।
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8
दीपावली
मुनिया बोली मम्मी से
मम्मी आज दीवाली है
आज सभी के घर घर में
रौशनी होने वाली है
चुन्नू , मुन्नू , सीता , गीता
छोड़ेंगे बड़ा पटाखा
आज तो ख़ूब मचेगा
सबके घर में धूम धड़ाका
नए नए कपडे पहनेंगे
खाएँगे ख़ूब मिठाई
जगमग करती दीपमालिका
ढेरों ख़ुशियाँ लाई।
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9
सुन्दर वन
सुन्दर सा एक सुन्दर वन ,
था वो लेकिन बहुत सघन ।
मीठे मीठे फलों के ढेर ,
लगते थे अनगिनत बेर ।
तितली , चिडया और गिलहरी ,
बड़ी दोस्ती उनमें ठहरी ।
कौआ , मुर्गा और बटेर ,
भालू ,हाथी , बन्दर , शेर ।
आपस में रहते हिलमिल कर ,
कभी ना होती उनमें टक्कर ।
होली या दीवाली आती ,
घर घर जलती प्रेम की बाती।
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10
मेला
लगा दशहरे पर जब मेला ,
राजू अपनी माँ से बोला ।
मैं भी मेला जाऊँगा ,
ख़ूब खिलौने लाऊँगा ।
झूले में भी झूलूँगा ,
पर मैं कभी ना भूलूँगा ।
छोड़ो कभी ना बड़ों का हाथ ,
रहो भीड़ में उनके साथ ।
वरना तुम खो जाओगे ,
और बहुत पछताओगे।
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11
ख़ूब पढ़ो
ख़ूब पढ़ो और नाम करो ,
जग में ऐसा काम करो ।
नहीं किसी से करो लड़ाई ,
सँग सभी के करो भलाई ।
दीन दुखी का दुःख हर लो ,
सच्चाई दिल में भर लो ।
देश का मान रखना है ,
देश के लिए ही मरना है।
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12
चाँद और सूरज
चाँद और सूरज दोनों गोल ,
काम बड़े करते अनमोल।
एक सभी को गर्मी देता ,
दूजा शीतलता भर देता।
दोस्त हैं दोनों प्यारे प्यारे ,
काम जगत में करते न्यारे।
धरती इनसे पाती अन्न ,
पाकर हम हो जाते धन्य।
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13
कोयल
कोयल काली काली है ,
फिर भी बड़ी निराली है ।
मीठा गीत सुनाती है ,
सबका मन हर्षाती है ।
इस डाली से उस डाली पर ,
फुदक फुदक इतराती है ।
कुहू की जब तान छेड़ती ,
मीठा रस बरसाती है ।
अमराई पर बौर खिले ,
सबको ये बतलाती है ।
तुम भी सबसे मीठा बोलो ,
यही पाठ सिखलाती है ।
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14
कहानी
मुझे सुनाओ एक कहानी ,
उसमें हो परियों की रानी।
सुन्दर सा एक बग़ीचा हो ,
बहता हो झरने का पानी।
प्यारे प्यारे फूले खिले हों ,
पंछी करते हो मनमानी।
सुनूँ कहानी सो जाऊँगा ,
फिर सपनों में खो जाऊँगा।
बात कहीं ना जाऊँ भूल ,
सुबह जाना है स्कूल।
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15
नदिया
नदिया बहती जाती है ,
सीख यही सिखलाती है।
कभी ना जीवन में रुकना ,
कभी नहीं डरकर झुकना।
तूफ़ानों को चीर सहज ,
सदा ही आगे को बढ़ना।
कितनी ही मुश्किल आये ,
कभी ना तुम पीछे हटना।
यही बात सबसे कहना ,
चलना और चलते रहना।
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16
तारे
आसमान में तारे ,
लगते कितने प्यारे ।
तोड़ लाऊँ इनको धरती पर ,
झिलमिल करते सारे ।
चंदा के सँग आँख मिचौली ,
खेला करते सब मिलकर ।
चाँदी की थाली सा लगता ,
कितना प्यारा ये अम्बर ।
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17
चंदा
चंदा तुम हो गोल गोल ,
उजले उजले प्यारे से ।
तुम चाँदी की थाली हो ,
क्या , लगते बड़े सितारे से ।
रोज़ रात को आ जाते हो ,
सुबह कहाँ छिप जाते हो ।
कितना भी पूछूँ तुमसे ,
बात नहीं बतलाते हो ।
अपना दोस्त बना लूँ तुमको ,
फिर मुझको तुम बतलाना ।
खेलेंगे हम दोनों मिलकर ,
सुबह को तुम फिर छिप जाना ।
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18
घड़ी
टिक टिक टिक टिक करें घड़ी ,
आती अपने काम बड़ी।
रात और दिन बतलाती ,
नखरे कभी ना दिखलाती।
इसे देख शाला जाते ,
दस की टिक पर सो जाते।
अगर घड़ी दे जाये जवाब ,
पूरा दिन हो जाये ख़राब।
शाला को फिर होंगी देर ,
बनेंगे फिर मुर्गा या बटेर।
घड़ी सदा चलती रहती ,
बढ़ते रहो ,सब से कहती ।
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19
मुन्ना मुन्नी
मुन्ना मुन्नी निकले घर से ,
गए नहीं पर वो स्कूल।
बग़ीचे में खाना खाया ,
लगे खेलने झूला झूल।
सही समय पर घर पहुँचे ,
सोचा किसी को कहाँ पता।
मास्टर जी ने घर पर जाकर ,
माँ को सब कुछ दिया बता।
माँ ने ख़ूब पिटाई की और ,
पापा ने भी फ़टकारा।
स्कूल पहुँचे अगले दिन तब ,
मास्टर जी ने भी मारा।
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20
सुबह सवेरे
उठकर सुबह हाथ जोड़ो तुम ,
ईश्वर का फिर ध्यान करो।
मात - पिता के चरणों को छूकर ,
सदा ही उनका मान करो।
गुरुजन की बात मानकर ,
जीवन में तुम ज्ञान भरों।
बड़ों के आगे ग़लत ना बोलो ,
किसी का मत अपमान करो।
अगर चाहिए तुमको इज़्ज़त ,
तो सबका सम्मान करो।
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बाल गीत संग्रह
चाँद - सितारे
" आओ मिलाकर ख़ुशी मनाएँ
नाचे गाएँ , धूम मचाएँ
आसमान में निकले सारे
चम चम चमके चाँद सितारे
एक छोटी - सी पाती
प्रिय पाठकों ,
मुझे अपने बाल - गीतों का ताज़ा संग्रह " चाँद - सितारे " आप सभी को सौंपते हुए अत्यंत हर्ष हो रहा है।
बाल गीतों का यह संग्रह विश्व के तमाम बच्चों को समर्पित है। आशा है " चाँद - सितारे " के गीतों को पढ़कर बच्चें प्रेरित होंगे और अपनी सृजनात्मक परिकल्पना का विकास कर पाएँगे । बच्चों को जानवरों और पक्षियों से विशेष लगाव रहता है। शब्दों को पढ़ने के साथ साथ चित्रों को देखने और समझने में बच्चों का आंनद दुगना हो जाता है। इसलिए मैंने इस बाल गीत संग्रह में उनके बाल मनोभावों को समझकर उन्हें प्रकृति से जोड़ने का एक छोटा - सा प्रयास किया है।
टेक्नोलॉज़ी के इस युग में बच्चों का किताबों से जितना अधिक जुड़ाव रहेगा बच्चों में उतना ही सृजनात्मक क्षमता का विकास होगा। मेरा ऐसा मानना है कि एक अच्छी किताब किसी भी व्यक्ति के सम्पूर्ण जीवन को प्रभावित करती है। मुझे विशवास है कि बच्चों के साथ साथ सभी आयु वर्ग के पाठक " चाँद - सितारे " बाल गीत संग्रह के गीतों का लुत्फ़ उठा पाएँगे। अपनी बहुमूल्य प्रतिक्रियाओं से ज़रूर अवगत कराये।
शुभकामनाओं के साथ
आपकी
दीपज्योति ' दीप '
ग्वालियर , भारत
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