शायद अप्रैल का महीना था। हवा में वसंत की ख़ुश्बू अभी तैर रही थी। रात के सन्नाटे में सिर्फ पेड़ो के हिलने की आवाज़ मेरे कानों से गुज़र रही थी। मैं अस्पताल के बिस्तर पर लेटा हुआ था। पलकें नींद से भारी थी लेकिन मैं सो नहीं पा रहा था। अस्पताल का पहला दिन आज भी ज़ेहन में ताज़ा है। मुझे सुबह के वक़्त OPD में दिखाया गया था। सरकारी विशेषज्ञ ने मुझे इस अस्पताल के लिए रेफेर कर दिया था। एक लम्बे गलियारे में , मैं इक स्ट्रेचर पर लेटा हुआ था। एक बुजुर्ग डॉक्टर मेरी जाँच कर रहा था। उसका जाँच करने का तरीका काफी अजीबो ग़रीब था। वह अपनी एक हाथ की उँगलियाँ मेरी पसलियों पर रखता और दूसरे हाथ की ऊँगली से उन उँगलियों पर चोट करता। लगभग ५ मिनट तक ममेरा मुआयना करने के बाद वो डॉक्टर और उसका असिस्टेंट मेरी मेडिकल फाइल पर कुछ लिख कर चला गया। गलियारे में धूप ढलने लगी थी और लगभग ४ बजे के करीब मुझे एक सेपरेट कमरे में बीएड पर लिटा दिया गया। उस कमरे में सिर्फ एक पलंग था। गलियारे की तरफ खुलती खिड़की और दरवाज़ा। कमरे का दूसरा दरवाज़ा पिछवाड़े की ओर खुलता था जहाँ टॉयलेट था। टॉयलेट यूरोपियन था और यूरोपियन टॉयलेट का इस्तेमाल मेरे लिए नया था। लेकिन अगली सुबह जब मैं शौच गया तो मुझे कोई दिक्कत नहीं हुई बल्कि सब कुछ बहुत अच्छा लगा। टॉयलेट के बाद खाली ज़मीन थी जहाँ खर पतवार ऊगा हुआ था जिसमें मुझे कोई ख़ास दिलचस्पी नहीं थी। हक़ीक़त में मुझे कई महीनों से खांसी हो रही थी और खांसी के लिए मैं सरकारी डिस्पेंसरी मैं डॉक्टर को दिखाया था। मुझे याद है कि सरकारी डिस्पेंसरियों मैं अक्सर महिला डॉक्टर ही होती थी। मेरी खांसी कि तकलीफ सुन कर मुझे कुछ गोलियां और खांसी का सिरप दे दिया जाता था। डिस्पेंसरी के दवाखाने से डॉक्टर का परचा दिखा कर दवाई मिलती थी। खांसी का सिरप अक्सर बड़ी बोतल मैं रख जाता था और मरीज़ को अपना सिरप लेने के लिए अपनी बोतल घर से ले जानी पड़ती थी। जो लोग घर से बोतल ले जान भूल जाते थे उनके लिए ये मुश्किल पल होता कि वापिस घर जा कर बोतल लाये इसीलिए डिस्पेंसरी के गेट के बाहर ही १-२ रूपये कि बोतल खरीद ला जाती। हिन्दोस्तान मैं लोग खाली बोतलों , डिब्बों और बोरियों से भी पैसा कमाने का हुनर जानते है। मेरे एक दोस्त ने इस हुनर के बारे में मुझे बताया था किस तरह उनके पिता चीनी बोरी खरीदते थे और खरीद के भाव ही चीनी लोगो को बेच दी जाती थी यानी बिना किसी नफे के , लेकिन वो खाली बोरी की क़ीमत २ / होती थी।
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