दिल तो क्या चीज़ है पत्थर हो तो पानी हो जाए
मेरे नाले अभी इतना तो असर रखते हैं
दिल तो क्या चीज़ है पत्थर हो तो पानी हो जाए
मेरे नाले अभी इतना तो असर रखते हैं
Ghazal - Lesson - 2
अगर किसी की मत्रा गिरा दी जाये अर्थात 2 मात्रा की जगह 1 कर दी जाये तब वह सदा उसकी गणना 1 स्वतन्त्र रूप से की जायेगी। उसके पहले यदि 1 मात्रा वाला अक्षर है तो यहाँ 1+1=2 नहीं होगा । 1,1 ही गिना जायेगा।
जैसे - दिले नादां मे यदि ले की मात्रा गिराकर 2 की जगह 1 कर दिया जाये तो दिले की मात्रा गणना दि =1,ले=1 होगी मतलब दिले की मात्रा 1,1 होगी न कि 1+1=2
कोई की मात्रा 2,2 है मगर को और ई की मात्रा गिराकर यदि कुइ पढ़ा जाये तो इसकी मात्रा 1,1 होगी न कि 2
हंस, कंस, दंश, अंश आदि में आधा न है मतलब हन्स, कन्स , दन्स ,अन्स जैसा पढ़ा जाता है । हमें मालूम है आधा अक्षर अपने पूर्ववर्ती सिंगल मात्रा को डबल करता है। इसलिए हंस की मात्रा
हं की मात्रा 2 और स की 1 कुल 21 मात्रा होगी इसी प्रकार
कंस 21, दंश 21 अंश 21, मंद 21 छंद 21 आदि समझें। अब आगे देखते हैं-
हँस में आधा न का बोध नहीं होता है।मतलब इसमें आधा न नहीं जुड़ा है इसलिए
हँस की मात्रा 2 होगी
डँस 2
फँस 2
आप हंस और हँस में फर्क
डंस और डँस में फर्क
फंस और फँस में फर्क
बोलने पर महसूस कर सकते हैं।संयुक्त अक्षर क्ष, त्र, ज्ञ की मात्रा गणना का नियम
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क्ष अक्षर दो वर्ण से मिलकर बना है क् और छ इसी प्रकार त्र अक्षर त और र से तथा ज्ञ अक्षर ग् और य से इसलिए इन्हें संयुक्त वर्ण कहते हैं । इनकी मात्रा गणना निम्न प्रकार करते हैं।
1. ऐसे शब्द जिनकी शुरुआत क्ष, त्र और ज्ञ से करते हैं उनकी मात्रा 1 मानी जाती है
जैसे क्षमा क्ष 1 मा2 कुल Crafts 12
त्रि शूल त्रि1 शू2 ल1 कुल 121
इसी प्रकार ज्ञ को समझें
2. यदि ये अक्षर शब्द के बीच में आते हैं तब अपने पूर्ववर्ती एक मात्रिक अक्षर की मात्रा को दुगना कर देते हैंऔर स्वयं की मात्रा 1 को कायम रखते हैं। जैसे
कक्ष 21
पत्र 21
यज्ञ 21
अल्पज्ञ 221
पक्ष 21
क्षत्र 21
सत्र 21
अक्ष 21
भक्ष 21
यत्र 21
तत्र 21
सर्वत्र 221
आदि
3. यदि संयुक्त अक्षर के पहले द्वि मात्रिक अक्षर है तो द्वि मात्रिक में कोई बदलाव नहीं होगा और संयुक्त अक्षर की मात्रा 1 रहेगी जैसे
पात्र 21(पा2 त्र1)
क्षात्र 21 (क्षा 2 त्र1)
याज्ञिक 22 (या2 ज्ञिक् 2)
पाक्षिक 22 (पा 2 क्षिक् 2)
संज्ञा 22
4. यदि संयुक्त अक्षर दीर्घ मात्रिक है मतलब द्वि मात्रिक और उसका पूर्ववर्ती अक्षर एक मात्रिक तब वह संयुक्त अक्षर पूर्ववर्ती अक्षर की मात्रा को 1 से 2 कर देगा मतलब दुगना कर देगा और स्वयं भी द्वि मत्रिक रहेगा। जैसे
कक्षा यहां क की मात्रा को 1 से 2 करेगा और क्षा की मात्रा 2 रहेगी
इस प्रकार
कक्षा 22
शिक्षा 22
पत्रा 22
चित्रा 22
प्रज्ञा 22
मित्रा 22
बत्रा 22
आदि: प्र , क्र ,पृ,कृ ,तृ आदि से शुरू होने वाले शब्द में इनकी मात्रा 1 मानीजाती है
जैसे
प्रगति 12 ( प्र 1 गति 2)
कृषक 1 2 आदि
मात्रा गणना का नियम
: दो अक्षर वाले शब्द की मात्रा 2 होती है
जैसे हम 2 वह 2 कल 2 यह 2 शुभ 2 जल 2 सब 2
तीन अक्षर वाले शब्द की मात्रा
12 होती है।
जैसे
कमल 12 पवन 12 दमन 12 नगर 12 सुलभ 12, नहर 12 आदि जब कोई शब्द आधे अक्षर से शुरू होता है तो मात्रा गणना में आधे अक्षर को छोड़ देते हैं जैसे
ब्याज इसकी गणना याज मान कर करेंगे 21
प्याला 22
श्याम 21
व्यय 2
हां। हम जिस अक्षर की मात्रा पर जोर देकर पढ़ते हैं उसकी मात्रा 2 होती है जिस को जल्दी से पढ़ते हैं उसकी मात्रा 1 मानते हैं
आ ,ई,ऊ , ऐ, औ , अं, की मात्रा नहीं गरती है।
शब्द के शुरू की मात्रा का पतन मतलब 2 की जगह 1 नहीं होता है। जैसे औरत , ओखली, ऐनक, पालक, ऊँट, चारपाई, ईंट आदि में शुरू के अक्षर औ, ओ, ऐ, पा मे आ की मात्रा, ऊ, ई की मात्रा नहीं गिराई जा सकती है।
अपवाद आवश्कतानुसार
1. मेरे की मात्रा 22, 21, 12 ,11 हो सकती है
2.कोई की मात्रा 22, 21, 12 ,11 हो सकती है।
3. आईना 222, 212
आपको पहले बताया था
दो अक्षर वाले शब्द की मात्रा 2 होती है जैसे रथ 2 शुभ 2 पथ 2 तीन अक्षर वाले बिना दीर्घ मात्रिक शब्द की मात्रा 12 होती है जैसे
अचल 12 , सुमन 12, विकल 12 , कुशल 12 आदि। ये भी बताया था कि आधे अक्षर से शुरू होने वाले शब्द की मात्रा गणना करते समय आधे अक्षर को छोड़ देते हैं जैसे न्यायालय 222
स्वागत 22 श्वान 21 व्यास 21
अब अगर आधा अक्षर बीच में आये तब वह अपने पूर्ववर्ती अक्षर की मात्रा को दुगना करेगा। जैसे
कन्स यहां पर "क"की मात्रा 1 है लेकिन उसके तत्काल बाद आधा न है तो यह आधा न " क" की मात्रा दुगना करेगा।मतलब की मात्रा 1 जगह 2 मानी जायेगी।कंस की मात्रा 21 होगी ।
बन्धन 22 कल्प 21 शुल्क 21 मन्डल 22 पत्नी 22 मक्खी 22 उल्लू 22 चक्की 22 होगी।
इसको पढ़ें और समझें। कहीं दिक्कत हो तो पूछें।
तुम्हारे
तु/ म्हा/रे 122
उन्हें
उ/ न्हें 12
तुम्हें
तु/म्हें 12
यहां पर म् ह के साथ जुड़ा है।
साईकिल
மிதிவண்டி.
இன்றும்
முதல் முதலில்
மிதிவண்டி ஓட்டிய
அந்த நாளை மறக்கவில்லை.
முதலில் மெதுவாக ஓட்டி முட்டியில் அடிபட்டு
தோலை கிழித்து
காலியான சாலையில்
மணி அடித்து
அந்த மணி இசையில்
ஆனந்தமடைந்து
மிதிவண்டி சக்கரம்
சுழல்வது போல்
இதயமும் துடிக்கும்.
இன்று மயிர் கூச்சம்
அடையும் அளவிற்கு
வேகமாக மகிழுந்து ஓட்டு கிறேன்.
ஆனால் அந்த
சிலிர்த்தல் இன்று இல்லை.
ஆனால் இன்று மிதிவண்டி
ஓட்ட முடியவில்லை என்ற வருத்தம்.
மிதிவண்டி ஓட்டும் வரைப் பார்த்து
வேதனைப் படுகிறேன்.
அந்த பழைய சிலிர்த்தலை
நினைவுபடுத்திக்
கொள்கிறேன்.
युवा कवि गोलेन्द्र पटेल की छह कविताएँ :-
1).
मेरा दुःख मेरा दीपक है
_______________
जब मैं अपनी माँ के गर्भ में था
वह ढोती रही ईंट
जब मेरा जन्म हुआ वह ढोती रही ईंट
जब मैं दुधमुंहाँ शिशु था
वह अपनी पीठ पर मुझे
और सर पर ढोती रही ईंट
मेरी माँ, माईपन का महाकाव्य है
यह मेरा सौभाग्य है कि मैं उसका बेटा हूँ
मेरी माँ लोहे की बनी है
मेरी माँ की देह से श्रम-संस्कृति के दोहे फूटे हैं
उसके पसीने और आँसू के संगम पर
ईंट-गारे, गिट्टी-पत्थर,
कोयला-सोयला, लोहा-लक्कड़ व लकड़ी-सकड़ी के स्वर सुनाई देते हैं
मेरी माँ के पैरों की फटी बिवाइयों से पीब नहीं,
प्रगीत बहता है
मेरी माँ की खुरदरी हथेलियों का हुनर गोइंठा-गोहरा
की छपासी कला में देखा जा सकता है
मेरी माँ धूल, धुएँ और कुएँ की पहचान है
मेरी माँ धरती, नदी और गाय का गान है
मेरी माँ भूख की भाषा है
मेरी माँ मनुष्यता की मिट्टी की परिभाषा है
मेरी माँ मेरी उम्मीद है
चढ़ते हुए घाम में चाम जल रहा है उसका
वह ईंट ढो रही है
उसके विरुद्ध झुलसाती हुई लू ही नहीं,
अग्नि की आँधी चल रही है
वह सुबह से शाम अविराम काम कर रही है
उसे अभी खेतों की निराई-गुड़ाई करनी है
वह थक कर चूर है
लेकिन उसे आधी रात तक चौका-बरतन करना है
मेरे लिए रोटी पोनी है, चिरई बनानी है
क्योंकि वह मजदूर है!
अब माँ की जगह मैं ढोता हूँ ईंट
कभी भट्ठे पर, कभी मंडी का मजदूर बन कर शहर में
और कभी-कभी पहाड़ों में पत्थर भी तोड़ता हूँ
काटता हूँ बोल्डर बड़ा-बड़ा
मैं गुरु हथौड़ा ही नहीं
घन चलाता हूँ खड़ा-खड़ा
टाँकी और चकधारे के बीच मुझे मेरा समय नज़र आता है
मैं करनी, बसूली, साहुल, सूता, रूसा व पाटा से संवाद करता हूँ
और अँधेरे में ख़ुद बरता हूँ दुख
मेरा दुख मेरा दीपक है!
मैं मजदूर का बच्चा हूँ
मजदूर के बच्चे बचपन में ही बड़े हो जाते हैं
वे बूढ़ों की तरह सोचते हैं
उनकी बातें
भयानक कष्ट की कोख से जन्म लेती हैं
क्योंकि उनकी माँएँ
उनके मालिक की किताबों के पन्नों पर
उनका मल फेंकती हैं
और उनके बीच की कविता सत्ता का प्रतिपक्ष रचती है।
मेरी माँ अब वही कविता बन गयी है
जो दुनिया की ज़रूरत है!
*
2).
चोकर की लिट्टी
________________
मेरे पुरखे जानवर के चाम छीलते थे
मगर, मैं घास छीलता हूँ
मैं दक्खिन टोले का आदमी हूँ
मेरे सिर पर
चूल्हे की जलती हुई कंडी फेंकी गयी
मैंने जलन यह सोचकर बरदाश्त कर ली
कि यह मेरे पाप का फल है
(शायद अग्निदेव का प्रसाद है)
मैं पतली रोटी नहीं,
बगैर चोखे का चोकर की लिट्टी खाता हूँ
चपाती नहीं,
चिपरी जैसी दिखती है मेरे घर की रोटी
मैं दक्खिन टोले का आदमी हूँ
मुझे हमेशा कोल्हू का बैल समझा गया
मैं जाति की बंजर ज़मीन जोतने के लिए
जुल्म के जुए में जोता गया हूँ
मेरी ज़िंदगी देवताओं की दया का नाम है
देवताओं के वंशजों को मेरा सच झूठ लगता है
मैं दक्खिन टोले का आदमी हूँ
मैं कैसे किसी देवता को नेवता दूँ?
मेरे घर न दाना है न पानी
न साग है न सब्जी
न गोइंठी है न गैस
मुझे कुएँ और धुएँ के बीच सिर्फ़ धूल समझा जाता है
पर, मैं बेहया का फूल हूँ
देवी-देवता मुझे हालात का मारा और वक्त का हारा कहते हैं
मैं दक्खिन टोले का आदमी हूँ
देखो न देव, देश के देव!
मैं अब भी चोकर का लिट्टा गढ़ रहा हूँ,
चोकर का रोटा ठोंक रहा हूँ
क्या तुम इसे मेरी तरह ठूँस सकते हो?
मैं भाषा में अनंत आँखों की नमी हूँ
मैं दक्खिन टोले का आदमी हूँ
*
3).
जंगल में जन्मदिन
________________
हम हैं नयी सदी के रचनाकार
हमारा जन्मदिन
ज़मीन पर नहीं,
आसमान में, करियाती गंधाती नदी में,
जल रहे जंगल में,
हमारे कद से छोटे पहाड़ पर
मनाया जाए
ताकि हम प्रकृति-प्रिय
पाठकों की पुतलियों में रहें
भले ही, असल जिंदगी में
रहें या न रहें
रचना में रहना है रहनुमा की तरह
उदार!
*
4).
रंगोत्सव
________________
परिंदें गा रहे हैं फाग
कितने क़ीमती हैं
स्पर्श-सुख रूप-रस रव-राग?
पेड़ो!
पतझड़ में उदास मत होना
जो गंध हवा की सवारी कर रही है
उसने जीवन की कथा कही,
फूल मुरझाते हैं
रंग नहीं।
*
5).
उम्मीद की उपज
_______________
उठो वत्स!
भोर से ही
जिंदगी का बोझ ढोना
किसान होने की पहली शर्त है
धान उगा
प्राण उगा
मुस्कान उगी
पहचान उगी
और उग रही
उम्मीद की किरण
सुबह सुबह
हमारे छोटे हो रहे
खेत से….!
*
6).
थ्रेसर
_______________
थ्रेसर में कटा मजदूर का दायाँ हाथ
देखकर
ट्रैक्टर का मालिक मौन है
और अन्यात्मा दुखी
उसके साथियों की संवेदना समझा रही है
किसान को
कि रक्त तो भूसा सोख गया है
किंतु गेहूँ में हड्डियों के बुरादे और माँस के लोथड़े
साफ दिखाई दे रहे हैं
कराहता हुआ मन कुछ कहे
तो बुरा मत मानना
बातों के बोझ से दबा दिमाग
बोलता है / और बोल रहा है
न तर्क , न तत्थ
सिर्फ भावना है
दो के संवादों के बीच का सेतु
सत्य के सागर में
नौकाविहार करना कठिन है
किंतु हम कर रहे हैं
थ्रेसर पर पुनः चढ़ कर -
बुजुर्ग कहते हैं
कि दाने-दाने पर खाने वाले का नाम लिखा होता है
तो फिर कुछ लोग रोटी से खेलते क्यों हैं
क्या उनके नाम भी रोटी पर लिखे होते हैं
जो हलक में उतरने से पहले ही छिन लेते हैं
खेलने के लिए
बताओ न दिल्ली के दादा
गेहूँ की कटाई कब दोगे?
*
©गोलेन्द्र पटेल
संपर्क :
डाक पता - ग्राम-खजूरगाँव, पोस्ट-साहुपुरी, जिला-चंदौली, उत्तर प्रदेश, भारत।
पिन कोड : 221009
व्हाट्सएप नं. : 8429249326
ईमेल : corojivi@gmail.com
लिंक:- https://youtu.be/VG40YQrFOuY?si=lv_UOKH9K9iq_UJH
गुल्लक
உண்டியல்.
குழந்தைப் பருவத்தில் உண்டியல்
நிரம்பும் முன்பே உடைக்கப்படும்.
சிலசமயங்களில்
பட்டம் வாங்க
மாஞ்சா நூல் வாங்க.
இன்று வங்கிக் கணக்கில் பல லட்சம் ரூபாய்கள்
தேவைப்படும் போது
செலவு செய்யலாம்.
ஆனால் மண் உண்டியலில்
சேமித்த பணம்
உண்டியலை உடைத்து
பட்டம் மாஞ்சா வாங்க
எடுத்த போது
இருந்த இன்பம்
இன்று
ஆயிரம் ரூபாய்
கடைக்கு சென்று
பொருள் வாங்குவதில் இல்லையே.
+++++++++++
बुढ़िया के बाल।
பஞ்சு மிட்டாய்.
ஆம்,
பஞ்சு மிட்டாய்
இதுதான் மனம் விரும்பும் மிட்டாய்.
பல வண்ணங்களில்
கிடைக்கும் பஞ்சு மிட்டாய்.
ஒரு வட்டவடிவ பாத்திரம்
நடுவில் சக்கரம்
சக்கரம் சுற்றப்படும்.
பிறகு
பஞ்சு மிட்டாய்
சாப்பிட தயாராக.
வாரத்தில் இரு நாட்கள்
கட்டாயம் ஷா சாப்பிடுவேன்.
சக்கரையில் முக்கிய
சற்றே பிசுபிசுப்புடன்.
பல வண்ண பஞ்சு மிட்டாய்கள்.
இப்போது எல்லா இடங்களிலும் கிடைப்பதில்லை.
நான் சாப்பிட்ட
பஞ்சு மிட்டாய் கடைகள்.
பல வருடங்கள்
கடந்து விட்டன.