Saturday, October 26, 2024

Ghazal - Lesson - 1 , RAV

 मात्रा गणना का नियम 

: दो अक्षर वाले शब्द की मात्रा 2 होती है

जैसे हम 2 वह 2 कल 2 यह 2 शुभ 2 जल 2 सब 2

तीन अक्षर वाले शब्द की मात्रा

12 होती है।

जैसे

कमल 12 पवन 12 दमन 12 नगर 12 सुलभ 12, नहर 12 आदि जब कोई शब्द आधे अक्षर से शुरू होता है तो मात्रा गणना में आधे अक्षर को छोड़ देते हैं जैसे

ब्याज इसकी गणना याज मान कर करेंगे 21 

प्याला 22 

श्याम 21 

व्यय 2

 हां। हम जिस अक्षर की मात्रा पर  जोर देकर पढ़ते हैं उसकी मात्रा 2  होती है जिस को जल्दी से पढ़ते हैं उसकी मात्रा 1 मानते हैं

आ ,ई,ऊ , ऐ, औ , अं, की मात्रा नहीं गरती है।

शब्द के शुरू की मात्रा का पतन मतलब 2 की जगह 1 नहीं होता है। जैसे औरत , ओखली, ऐनक, पालक, ऊँट, चारपाई, ईंट आदि में शुरू के अक्षर औ, ओ, ऐ, पा मे आ की मात्रा, ऊ, ई की मात्रा नहीं गिराई जा सकती है।

अपवाद आवश्कतानुसार 

1. मेरे की मात्रा 22, 21, 12 ,11 हो सकती है

2.कोई की मात्रा 22, 21, 12 ,11 हो सकती है।

3. आईना 222, 212

आपको पहले बताया था 

दो अक्षर वाले शब्द की मात्रा 2 होती है जैसे रथ 2 शुभ 2 पथ 2 तीन अक्षर वाले बिना दीर्घ मात्रिक शब्द की मात्रा 12 होती है जैसे

अचल 12 , सुमन 12, विकल 12 , कुशल 12 आदि। ये भी बताया था कि आधे अक्षर से शुरू होने वाले शब्द की मात्रा गणना करते समय आधे अक्षर को छोड़ देते हैं जैसे न्यायालय 222

स्वागत 22 श्वान 21 व्यास 21

अब अगर आधा अक्षर बीच में आये तब वह अपने पूर्ववर्ती अक्षर की मात्रा को दुगना करेगा। जैसे

कन्स यहां पर "क"की मात्रा 1 है लेकिन उसके तत्काल बाद आधा न है तो यह आधा न " क" की मात्रा दुगना करेगा।मतलब की मात्रा 1 जगह 2 मानी जायेगी।कंस की मात्रा 21 होगी । 

बन्धन 22 कल्प 21 शुल्क 21 मन्डल 22 पत्नी 22 मक्खी 22 उल्लू 22 चक्की 22 होगी।

इसको पढ़ें और समझें। कहीं दिक्कत हो तो पूछें।

तुम्हारे  

तु/ म्हा/रे  122  

उन्हें 

उ/ न्हें  12

तुम्हें 

तु/म्हें 12

यहां पर म् ह के साथ जुड़ा है।

Friday, October 11, 2024

Flash Back _Tamil _साईकिल - மிதிவண்டி.

 साईकिल 

 மிதிவண்டி.

 

 இன்றும்

 முதல் முதலில் 

 மிதிவண்டி ஓட்டிய 

 அந்த நாளை மறக்கவில்லை.

முதலில் மெதுவாக ஓட்டி  முட்டியில் அடிபட்டு 

தோலை கிழித்து 

 காலியான சாலையில் 

 மணி அடித்து 

 அந்த மணி இசையில் 

 ஆனந்தமடைந்து 

 மிதிவண்டி சக்கரம்

 சுழல்வது போல்

 இதயமும் துடிக்கும்.


 இன்று மயிர் கூச்சம் 

 அடையும் அளவிற்கு 

 வேகமாக மகிழுந்து ஓட்டு கிறேன்.

 ஆனால்  அந்த 

  சிலிர்த்தல் இன்று இல்லை.


 ஆனால் இன்று மிதிவண்டி 

 ஓட்ட முடியவில்லை என்ற வருத்தம்.

  மிதிவண்டி ஓட்டும் வரைப் பார்த்து 

  வேதனைப் படுகிறேன்.

 அந்த  பழைய  சிலிர்த்தலை 

 நினைவுபடுத்திக் 

 கொள்கிறேன்.

Thursday, October 10, 2024

युवा कवि गोलेन्द्र पटेल की छह कविताएँ :-

 युवा कवि गोलेन्द्र पटेल की छह कविताएँ :-


1).


मेरा दुःख मेरा दीपक है

_______________


जब मैं अपनी माँ के गर्भ में था

वह ढोती रही ईंट

जब मेरा जन्म हुआ वह ढोती रही ईंट

जब मैं दुधमुंहाँ शिशु था

वह अपनी पीठ पर मुझे

और सर पर ढोती रही ईंट


मेरी माँ, माईपन का महाकाव्य है

यह मेरा सौभाग्य है कि मैं उसका बेटा हूँ

मेरी माँ लोहे की बनी है

मेरी माँ की देह से श्रम-संस्कृति के दोहे फूटे हैं

उसके पसीने और आँसू के संगम पर

ईंट-गारे, गिट्टी-पत्थर,

कोयला-सोयला, लोहा-लक्कड़ व लकड़ी-सकड़ी के स्वर सुनाई देते हैं


मेरी माँ के पैरों की फटी बिवाइयों से पीब नहीं,

प्रगीत बहता है

मेरी माँ की खुरदरी हथेलियों का हुनर गोइंठा-गोहरा

की छपासी कला में देखा जा सकता है


मेरी माँ धूल, धुएँ और कुएँ की पहचान है

मेरी माँ धरती, नदी और गाय का गान है

मेरी माँ भूख की भाषा है

मेरी माँ मनुष्यता की मिट्टी की परिभाषा है

मेरी माँ मेरी उम्मीद है


चढ़ते हुए घाम में चाम जल रहा है उसका

वह ईंट ढो रही है

उसके विरुद्ध झुलसाती हुई लू ही नहीं,

अग्नि की आँधी चल रही है

वह सुबह से शाम अविराम काम कर रही है

उसे अभी खेतों की निराई-गुड़ाई करनी है

वह थक कर चूर है

लेकिन उसे आधी रात तक चौका-बरतन करना है

मेरे लिए रोटी पोनी है, चिरई बनानी है

क्योंकि वह मजदूर है!


अब माँ की जगह मैं ढोता हूँ ईंट

कभी भट्ठे पर, कभी मंडी का मजदूर बन कर शहर में

और कभी-कभी पहाड़ों में पत्थर भी तोड़ता हूँ

काटता हूँ बोल्डर बड़ा-बड़ा

मैं गुरु हथौड़ा ही नहीं

घन चलाता हूँ खड़ा-खड़ा


टाँकी और चकधारे के बीच मुझे मेरा समय नज़र आता है

मैं करनी, बसूली, साहुल, सूता, रूसा व पाटा से संवाद करता हूँ

और अँधेरे में ख़ुद बरता हूँ दुख


मेरा दुख मेरा दीपक है!


मैं मजदूर का बच्चा हूँ

मजदूर के बच्चे बचपन में ही बड़े हो जाते हैं

वे बूढ़ों की तरह सोचते हैं

उनकी बातें

भयानक कष्ट की कोख से जन्म लेती हैं

क्योंकि उनकी माँएँ

उनके मालिक की किताबों के पन्नों पर

उनका मल फेंकती हैं

और उनके बीच की कविता सत्ता का प्रतिपक्ष रचती है।


मेरी माँ अब वही कविता बन गयी है

जो दुनिया की ज़रूरत है!

*


2).


चोकर की लिट्टी

________________


मेरे पुरखे जानवर के चाम छीलते थे 

मगर, मैं घास छीलता हूँ


मैं दक्खिन टोले का आदमी हूँ

मेरे सिर पर 

चूल्हे की जलती हुई कंडी फेंकी गयी

मैंने जलन यह सोचकर बरदाश्त कर ली

कि यह मेरे पाप का फल है

(शायद अग्निदेव का प्रसाद है)


मैं पतली रोटी नहीं, 

बगैर चोखे का चोकर की लिट्टी खाता हूँ


चपाती नहीं, 

चिपरी जैसी दिखती है मेरे घर की रोटी

मैं दक्खिन टोले का आदमी हूँ


मुझे हमेशा कोल्हू का बैल समझा गया

मैं जाति की बंजर ज़मीन जोतने के लिए

जुल्म के जुए में जोता गया हूँ

मेरी ज़िंदगी देवताओं की दया का नाम है

देवताओं के वंशजों को मेरा सच झूठ लगता है

मैं दक्खिन टोले का आदमी हूँ


मैं कैसे किसी देवता को नेवता दूँ?

मेरे घर न दाना है न पानी

न साग है न सब्जी

न गोइंठी है न गैस

मुझे कुएँ और धुएँ के बीच सिर्फ़ धूल समझा जाता है

पर, मैं बेहया का फूल हूँ

देवी-देवता मुझे हालात का मारा और वक्त का हारा कहते हैं

मैं दक्खिन टोले का आदमी हूँ


देखो न देव, देश के देव! 

मैं अब भी चोकर का लिट्टा गढ़ रहा हूँ, 

चोकर का रोटा ठोंक रहा हूँ

क्या तुम इसे मेरी तरह ठूँस सकते हो?

मैं भाषा में अनंत आँखों की नमी हूँ

मैं दक्खिन टोले का आदमी हूँ

*


3).


जंगल में जन्मदिन

________________


हम हैं नयी सदी के रचनाकार

हमारा जन्मदिन

ज़मीन पर नहीं,

आसमान में, करियाती गंधाती नदी में,

जल रहे जंगल में,

हमारे कद से छोटे पहाड़ पर

मनाया जाए

ताकि हम प्रकृति-प्रिय

पाठकों की पुतलियों में रहें


भले ही, असल जिंदगी में

रहें या न रहें

रचना में रहना है रहनुमा की तरह

उदार!

*


4).


रंगोत्सव

________________


परिंदें गा रहे हैं फाग

कितने क़ीमती हैं

स्पर्श-सुख रूप-रस रव-राग?


पेड़ो!

पतझड़ में उदास मत होना

जो गंध हवा की सवारी कर रही है

उसने जीवन की कथा कही,

फूल मुरझाते हैं

रंग नहीं।

*


5).


उम्मीद की उपज

_______________


उठो वत्स!

भोर से ही

जिंदगी का बोझ ढोना

किसान होने की पहली शर्त है

धान उगा

प्राण उगा

मुस्कान उगी

पहचान उगी

और उग रही

उम्मीद की किरण

सुबह सुबह

हमारे छोटे हो रहे

खेत से….!

*


6).


थ्रेसर

_______________


थ्रेसर में कटा मजदूर का दायाँ हाथ

देखकर

ट्रैक्टर का मालिक मौन है

और अन्यात्मा दुखी

उसके साथियों की संवेदना समझा रही है

किसान को

कि रक्त तो भूसा सोख गया है

किंतु गेहूँ में हड्डियों के बुरादे और माँस के लोथड़े

साफ दिखाई दे रहे हैं


कराहता हुआ मन कुछ कहे

तो बुरा मत मानना

बातों के बोझ से दबा दिमाग

बोलता है / और बोल रहा है

न तर्क , न तत्थ

सिर्फ भावना है

दो के संवादों के बीच का सेतु

सत्य के सागर में

नौकाविहार करना कठिन है

किंतु हम कर रहे हैं

थ्रेसर पर पुनः चढ़ कर -


बुजुर्ग कहते हैं

कि दाने-दाने पर खाने वाले का नाम लिखा होता है

तो फिर कुछ लोग रोटी से खेलते क्यों हैं

क्या उनके नाम भी रोटी पर लिखे होते हैं

जो हलक में उतरने से पहले ही छिन लेते हैं

खेलने के लिए


बताओ न दिल्ली के दादा

गेहूँ की कटाई कब दोगे?

*


©गोलेन्द्र पटेल 


संपर्क :

डाक पता - ग्राम-खजूरगाँव, पोस्ट-साहुपुरी, जिला-चंदौली, उत्तर प्रदेश, भारत।

पिन कोड : 221009

व्हाट्सएप नं. : 8429249326

ईमेल : corojivi@gmail.com


लिंक:- https://youtu.be/VG40YQrFOuY?si=lv_UOKH9K9iq_UJH


Wednesday, October 9, 2024

Flash Back _ Tamil _ गुल्लक - உண்டியல்.

 गुल्लक 


 உண்டியல்.


 குழந்தைப் பருவத்தில் உண்டியல்

 நிரம்பும் முன்பே உடைக்கப்படும்.

சிலசமயங்களில் 

 பட்டம் வாங்க

 மாஞ்சா நூல் வாங்க.

 இன்று வங்கிக் கணக்கில் பல லட்சம் ரூபாய்கள்

தேவைப்படும் போது

 செலவு செய்யலாம்.

 ஆனால் மண் உண்டியலில் 

 சேமித்த பணம்

 உண்டியலை உடைத்து 

 பட்டம் மாஞ்சா வாங்க

 எடுத்த போது 

 இருந்த இன்பம் 

 இன்று 

 ஆயிரம் ரூபாய் 

 கடைக்கு சென்று 

 பொருள் வாங்குவதில் இல்லையே.

+++++++++++

Sunday, October 6, 2024

Flash Back _ Tamil _ बुढ़िया के बाल। பஞ்சு மிட்டாய்.

 बुढ़िया के बाल।

 பஞ்சு மிட்டாய்.


 ஆம்,

 பஞ்சு மிட்டாய் 

இதுதான் மனம் விரும்பும் மிட்டாய்.

 பல வண்ணங்களில் 

 கிடைக்கும் பஞ்சு மிட்டாய்.

 ஒரு வட்டவடிவ பாத்திரம் 

 நடுவில் சக்கரம்

 சக்கரம் சுற்றப்படும்.

பிறகு 

பஞ்சு மிட்டாய் 

 சாப்பிட தயாராக.


 வாரத்தில் இரு நாட்கள் 

 கட்டாயம் ஷா சாப்பிடுவேன்.


 சக்கரையில் முக்கிய

 சற்றே பிசுபிசுப்புடன்.


 பல வண்ண பஞ்சு மிட்டாய்கள்.

 இப்போது எல்லா இடங்களிலும் கிடைப்பதில்லை.

 நான் சாப்பிட்ட 

பஞ்சு மிட்டாய் கடைகள்.

 பல வருடங்கள் 

 கடந்து விட்டன.

Saturday, October 5, 2024

Flash Back _ Tamil _काली मस्जिद। கருப்பு பள்ளிவாசல்.

 கருப்பு பள்ளிவாசல்.

काली मस्जिद।

 பழைய தில்லியில் 

 என் பாட்டி 

(அம்மா அம்மா)

 வீட்டின் மாடியில் 

 பல நினைவுகள்.

 மாலை நேரங்கள் மாடியில் கழியும்.

மாடியில் இருந்து ஹம்தர்த் மருந்தகம்.

 ஜாமா மசூதியின் சுவர்கள்.


குருத்வாரா வின் கோபுரம்.

மிக அருகில் 

துர்க்மான் நுழைவாயில் 

 கருப்பு மசூதி..

அதன் தொழுகை வீட்டில் கேட்கும்.


அருகில் இருப்பதால் அதன் கோபுரங்கள் 

 எனக்கு அறிமுகம்.

 உண்மையில் பள்ளி செல்லும் போதும் வரும் போதும் 

 கருப்பு மசூதியின் மிக அருகில் 

எங்களது குதிரை வண்டி செல்லும்.

தெருவின் நுழையும் போதே கருப்பு மசூதி தெரியும்.

 பலமுறை உள்ளை செல்லும் ஆசை.

 ஒரு முறை  சென்றேன்

 படிகளில் ஏற முடியவில்லை.

 திரும்பி விட்டேன்.

 என்னை யாராவது தடுத்தார்களா ?

 என்ற நினைவில்லை.

Thursday, October 3, 2024

Magyarul

 drMáriás


A belső emigráció képei


Megnyitó: 2024. október 9-én 19 órakor

Megnyitja: Bukta Imre és Szurcsik József


Miután egy éve kiállítása azonnali bezárását követelte egy képviselő, majd letiltották közösségi oldalát, valamint további helyekről ki- és betiltották, drMáriás eldöntötte, hogy jó útra tér, s ahogy a rendes művészek, úgy ő sem fest többé olyan képeket, amelyek nyugtalanság, harag, felháborodás és botrány kiváltására alkalmasak, hanem olyanokat, amelyek megnyugtatnak, elgondolkodtatnak, értékes gondolatokkal töltenek fel és áldásos hatással vannak a szépérzékeinkre.
De mit fessen a belső emigrációba vonult festő? drMáriás olyan művészszemélyiségek portréit és történeteit alkotta meg, akik maguk is belső vagy külső emigrációba kényszerültek, vagy akár börtönbe zárták őket az alkotótevékenységük miatt. Olyat, akit kivégzőosztag előtt állítottak, mégis túlélte, börtönbe vetettek, mire ott megírta élete legfontosabb művét, filozofált, amiért raktárosi pozícióba űzték, forradalmár volt, de a többi forradalmárnak túl forradalmi, polgár volt, ezért nem volt hajlandó szocializmusban élni, orvos, aki a morfiumát arra használta, hogy elmeneküljön a valóságból, vagy éppen kifinomultan álmodozott, mire a származása miatt agyonverték.
Így jelennek meg De Sade márki, Oscar Wilde, Bulgakov, Dosztojevszkij, Márai Sándor, Szerb Antal, Hamvas Béla, Kassák Lajos és mások többek között Csontváry, Rippl-Rónai, Berény, Baselitz, Basquiat, Adami és mások műtermeiben.
Csak semmi politika! – mondanánk, mire kiderül, hogy az mindenhol és mindenben ott van.

A kiállítás megtekinthető november 16-ig keddtől péntekig 10 és 14, szombaton 10 és 13 óra között.


Godot Galéria
1114 Budapest, Bartók Béla út 11-13.


A meghívó képekkel: https://www.godot.hu/post/drmariasbelsoemigracio

A megnyitó facebook eseménye: https://www.facebook.com/events/887102883359540