प्रेम -प्रसंग
रेखांकित हैं मेरे पास
उन चुंबनों के घाव
जो पूर्णिमा की
शरद चाँदनी में
तुम ने
मेरी नंगी पीठ
ललाट , कपोलों व अधरों पर
दूर अमलतास के नीचे
बिखेर दिए थे।
प्रेम -प्रसंग
रेखांकित हैं मेरे पास
उन चुंबनों के घाव
जो पूर्णिमा की
शरद चाँदनी में
तुम ने
मेरी नंगी पीठ
ललाट , कपोलों व अधरों पर
दूर अमलतास के नीचे
बिखेर दिए थे।
प्रेम -प्रसंग
मेरे प्रेम जाग
आ फिर चूम लूँ तेरे दाग़
और ..और ..
फैलने दो
जंगल में आग
युगों में
एक बार
आता है फाग।
आख़िर क्या होती है
लघुकथा
जो वक़्त की क़ीमत को बेहतर
समझती है
जो अंधेरों में बिजली - सी चमकती है
पढ़ ले जिसे आप कुछ पलों में
जादू जिसका रहे सालों तक
जो उतर जाये रूह में आपकी
बस रहे न चंद ख़यालों तक,
जो काली घटा - सी आये बरसने को
और छोड़ जाये सबको तरसने को
तार तार तो होता है दामन इसका
लिखती अपने लहू से जब कोई
क़िस्सा
कभी आग कभी पानी , कभी लहरों की रवानी
मुफ़लिस की जवानी होती है लघुकथा
कुछ कविता , कुछ कहानी होती है लघुकथा।
- इन्दुकांत आंगिरस
बहुत सालों तक पिता को समझ नहीं पाया
जब ख़ुद बाप बना तो समझ आया
जलाता है जो अपने लहू से घर के चिराग़
जिसके सीने में हमशा दबी होती है एक आग
जो पत्थरों को फोड़ कर पानी निकालता है
जो जल जल कर भी मुस्कुराता है
लघुकथा - GST
" क्या हुआ दोस्त , इतना उदास क्यों बैठे हो ? "
" अरे यार , ज़ुल्म की भी हद होती है। क्रेडिट कार्ड से लोन लिया , ऋण पर ब्याज़ दे रहे हैं , लेकिन ब्याज़ पर सरकार द्वारा १८ परसेंट GST ? तुम्हीं बताओ , न कुछ ख़रीदा न बेचा लेकिन GST देना पड़ता है और वो भी ब्याज़ पर ?" दोस्त ने बिफ़रते हुए जवाब दिया।
" ज़ुल्म तो है लेकिन मुझे इस बारे में कुछ नहीं मालूम , ये सरकार जाने या राम जाने "
- कौन से राम भाई ? कौन सी सरकार की बात कर रहे हों ?
- अरे वो ही अयोध्या वाले राम , और वो ही राम मंदिर बनाने वाली सरकार , उन्हीं से पूछो कि ब्याज़ पर भी GST क्यों लगाया जा रहा है ?
-" ठीक है भाई उन्हीं से पूछता हूँ पर जवाब कब मिलेगा ये तो राम ही जाने। " - दोस्त ने अपनी बुझी हुई आँखों से आसमान की ओर निहारते हुए कहा तो दूसरे दोस्त की आँखें भी गीली हो गयीं।
लेखक - इन्दुकांत आंगिरस
लघुकथा - नौकरी
नौकरी के लिए आये उम्मीदवारों में से दो उम्मीदवारों को शार्ट लिस्ट कर लिया गया था। अंतिम निर्णय कंपनी के मालिक ने लेना था। कम्पनी के निदेशक को यह जान कर हैरानी हुई कि मालिक ने उस उम्मीदवार को चुना जो अनुभव और शिक्षा में दूसरे उम्मीदवार से कम था । आख़िर निदेशक ने झिझकते हुए मालिक से पूछा - सर , आपने एम . ए . पास वाले को नौकरी न दे कर बी . ए. पास वाले को नौकरी दे दी ?
" अरे बी . ए. पास है तो क्या हुआ। उसने सुन्दर काण्ड में सर्टिफिकेट और रामचरित मानस में डिप्लोमा कर रखा है और वो भी अमेरिका से। " - मालिक ने पुरज़ोर आवाज़ में जवाब दिया।
उनका जवाब सुन कर निदेशक का मुहँ ही नहीं , आँखें भी खुली की खुली रह गयी।
- इन्दुकांत आंगिरस
छम छम बरसे पानी देखो
पानी की रवानी देखो
भरते जाते ताल तलैया
पानी ही पानी है भैया
डूब रहे सब गाँव शहर
मिलने आई एक नहर
सुबह एक तुफ़ानी देखो
पानी की रवानी देखो
रात रात घन घन बरसे
सहमे बच्चें इस डर से
बिजली रह रह चमकी
सबको देती धमकी
बिजली की निशानी देखो
पानी की रवानी देखो