लघुकथा - सन्यासी
लघुकथा - सन्यासी
टावर के अधिकारी ने अपने चीफ़ से पूछा , " सर , मैं समझ नहीं पा रहा हूँ कि पालकी में पधारे रहे 92 वर्षीय सन्यासी ने टावर से महिला गार्ड्स को हटाने के लिए क्यों कहा ? सन्यासी तो मोह - माया का त्याग करके ही सन्यासी बनते हैं।"
चीफ़ ने मुस्कुराते हुए अधिकारी से कहा , " सिर्फ केसरी चोला पहनने से कोई सन्यासी नहीं बनता। इन्होंने सिर्फ चोला बदला है , औरत का बदन इनके दिमाग़ से कभी नहीं निकला। इसीलिए दुनिया के सामने नज़र तक मिलाने से घबराते हैं। आख़िर है तो पुरुष ही .....
इन्दुकांत आंगिरस
9900297891
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