Friday, September 11, 2026

लघुकथा - सन्यासी

  लघुकथा - सन्यासी 


 लघुकथा - सन्यासी 


                           टावर के अधिकारी ने अपने चीफ़ से पूछा , " सर , मैं समझ नहीं पा  रहा हूँ कि पालकी में पधारे रहे 92  वर्षीय सन्यासी ने  टावर से महिला गार्ड्स को हटाने के लिए क्यों कहा ? सन्यासी तो मोह - माया का त्याग करके ही सन्यासी बनते हैं।" 

चीफ़ ने मुस्कुराते हुए अधिकारी से कहा , " सिर्फ केसरी चोला पहनने से कोई सन्यासी नहीं बनता। इन्होंने सिर्फ चोला बदला है , औरत का बदन इनके दिमाग़ से कभी नहीं निकला। इसीलिए दुनिया के सामने  नज़र तक मिलाने से घबराते हैं।  आख़िर है तो पुरुष ही ..... 


इन्दुकांत आंगिरस 

9900297891


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