Thursday, January 22, 2026

शर्म हमको मगर नहीं आती

 शर्म हमको मगर नहीं आती 

80 मिनट की जद्दोजेहद के बाद भी प्रशासन गहरे पानी वाले गड्ढे में अपनी कार समेत गिरे युवक को बचा नहीं पाया  तो क्या हुआ  ? अंततः , उस  युवक की लाश को गड्ढे से सकुशल बाहर निकालने में तो डिजास्टर मैनेजमेंट की टीम सफल हो ही  गयी थी।  यह भी अपने आप में बड़ी उपलब्धि थी।  युवक की  लाश को उसके पिता को सौंपते हुए अधिकारी ने गर्व से कहा था , " ये लीजिए अपने बेटे की  साबुत लाश। "

जवान बेटे  की साबुत लाश को देखकर ग़मगीन बाप  बाप के मुँह से इतना भर निकला था , शुक्रिया जनाब ! , शर्म हमको मगर नहीं आती। "


इन्दुकांत आंगिरस 

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