शर्म हमको मगर नहीं आती
80 मिनट की जद्दोजेहद के बाद भी प्रशासन गहरे पानी वाले गड्ढे में अपनी कार समेत गिरे युवक को बचा नहीं पाया तो क्या हुआ ? अंततः , उस युवक की लाश को गड्ढे से सकुशल बाहर निकालने में तो डिजास्टर मैनेजमेंट की टीम सफल हो ही गयी थी। यह भी अपने आप में बड़ी उपलब्धि थी। युवक की लाश को उसके पिता को सौंपते हुए अधिकारी ने गर्व से कहा था , " ये लीजिए अपने बेटे की साबुत लाश। "
जवान बेटे की साबुत लाश को देखकर ग़मगीन बाप बाप के मुँह से इतना भर निकला था , शुक्रिया जनाब ! , शर्म हमको मगर नहीं आती। "
इन्दुकांत आंगिरस
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