कुछ अश'आर
१- घड़ी तो हाथ में सबके है लेकिन
पकड़ में एक भी लम्हा नहीं है
२-
ज़रा सी बात थी और कशमकश ऐसी कि मत पूछो
भिखारी मुड़ गया पर जेब से सिक्का नहीं निकला
३- उनको तो मंदिर- मस्जिद से वोट की खेती करनी थी
हम आपस में लड़ना सीखे, लेना एक न देना दो
४-
भूल जाएगा किसी दिन अपने पाँवों का वजूद
किसने दे रक्खी हैं उसके हाथ में बैसाखियाँ
ओमप्रकाश यती
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