Saturday, January 10, 2026

Friday, January 2, 2026

Laghukatha_Book_21

 नाशुक्रे  - डॉ सविता चड्ढा 


सबसे छोटे बेटे की शादी से निवृत होकर गुरविंदर पहली बार अपने सबसे बड़े बेटे के घर गई । उस दिन वे सब लोग किसी शादी में जाने के लिए तैयार हो रहे थे । माँ को अचानक आया देख बेटे ने न तो माँ को प्रणाम किया  न आदर सत्कार , बस ग़ुस्से में चीख़ा  ‘’ आने से पहले फोन तो कर लेना था ।घर में कोई नहीं रहने वाला, सब शादी में जा रहे हैं,  माँ  तुम भी ...." बेटा दाँत  पीस रहा था।  माँ का गला प्यास से सूखा जा रहा था ,पसीने से तरबतर थी लेकिन  बेटे को कोई परवा नहीं थी । गुरविंदर को याद आया, वह तो माँ है, उसे घबराना नहीं है , हिम्मत कर उसने कहा... ‘’आप सब शादी में जाओ, घर तो यही हैं न। मैं अकेली रह...।  ‘’ 

गुरविंदर की बात अभी पूरी भी नहीं हुई थी कि बेटे ने ऑनलाइन ऑटो बुक कर दिया । चंद मिनटों में ऑटो दरवाज़े पर था।   घर से निकलते हुए गुरमिंदर का गला भर आया था और उसने बेटे की आँखों में झांकते हुए कहा था ,   ‘’ माँ को प्यासा ही  भेज देगा घर से,  नाशुक्रे ! एक घूँट पानी  तो पिला देता ..."

बेटे ने झटपट ख़ामोशी से माँ की कपड़ो वाली  टोकरी ऑटो में रखी ,ड्राइवर को 100 रूपये  का नोट  और पानी की बोतल पकड़ाते हुए  कहा ‘’ इन्हें पंचकुइयां रोड छोड़ देना । -‘’

ऑटो  में बैठने की देर थी कि  गुरविंदर की  आँखों से आँसुओं के धाराएँ ऐसे बहने लगी मानो उत्तराखंड में बादल फट गया हो। उसके प्यासे होंठो  से बस इतना निकला  था  , " ऐसी नाशुक्री औलादें भगवान किसी को न दे। "

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  झुनझुना - - कृष्ण कुमार भगत

         कई दिनों बाद गाँव  की ठकुराइन से मिसराइन मिली तो बातों-बातों में पूछ बैठी,”सुना है सत्तू नई दुल्हन लाया है, कैसी है?”
       - "  दुल्हन तो ख़ूबसूरत  है, पर किसी ठाकुर के सँग  रहती तो बहोत अच्छी लगती !” उसने मन की भड़ास निकाली,”सत्तू के घर झुनझुने के सिवा भला क्या रक्खा है, उमर भर झुनझुना बजाते ई गुज़रेगी  !”
        -  “बहन, झुनझुना भी नसीब वालों के घर होवे है? अब ललाइन को देख लो, घर में सब कुछ है झुनझुने के सिवा, दिल मांगे तो बाहर जाना पड़े है के नईं!”
           “ हाँ  मिसराइन,ई तो है !” एक ठण्डी आह भर कर ठकुराइन पुनः बोली,”झुनझुने के बग़ैर  जिनगी श्मशान लगे है…सत्तू के झुनझुने की आवाज़  तो मंदिर तक आवे है सुबह-शाम और गाय-भैंस भी सुन-सुन के पगुरा जावे हैं!”

Needs clarification  about dialogue speakers - 


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बुरका - कुमार शर्मा ’अनिल’

                भिखारिन - सी दिखने वाली वह जवान मंदबुद्धि लड़की पिछले दस दिन से कस्बे के बाज़ार में घूम रही थी। ’समझ’ की बात छोड़ दें तो शरीर के मामले में वह अपनी उम्र की तमाम लड़कियों से ज्यादा सम्पन्न थी और यही कारण था कि बाज़ार के सभी दुकानदारों के अलावा अन्य लोगों के लिए भी वह आकर्षण का केन्द्र थी। एक दूसरे की नज़रें बचा कर दुकानदार उसे कुछ न कुछ खाने-पीने का सामान देते ही रहते । इसके पीछे सहानुभूति कम अपने मन और शरीर में उसे देर तक देखे जाने से पैदा होने वाली सुखद अनुभूति ज्यादा थी ।

                 आज सुबह जब दुकानदार बाज़ार में अपनी दुकानें खोल ही रहे थे कि एक दुकान के खोके के पीछे वह भिखारिन निपट निर्वस्त्र लेटी हुई मिली। उसके कपड़े तह कर उसके सिरहाने रखे हुए थे और पास ही एक खाली बोतल और दो गिलास रखे हुए थे। थोड़ी देर में वहाँ मजमा इकट्ठा हो गया। सभी उसके निर्वस्त्र जिस्म के तमाशबीन बने हुए थे। एक बुजुर्ग दुकानदार ने उसे पास पड़े उसके कपड़े पहनने को कहा तो वह अस्पष्ट भाषा में लड़खड़ाती जुबान में शराब की बोतल हाथ में लहराती बोली - "और चाहिये, मुझे और चाहिए।’’ स्पष्ट था कि वह शराब के नशे में थी ।

          इसी बीच किसी ने पुलिस को भी फोन कर दिया। तमाशबीनों को लग रहा था कि उसके साथ बलात्कार भी हुआ है। जिस दुकान के  के सामने वह लेटी हुई थी वह दुकान बूढ़े सिराज अहमद की थी परन्तु उस पर ज़्यादातर  उनकी जवान बेगम बुरका पहन कर ही बैठती थी। जिसकी दो ख़ूबसूरत आँखों और गुलाबी हाथों के लोग दीवाने थे। आँखों और हाथों के अलावा किसी ने उसके शरीर का कोई अंग नहीं देखा था। तभी वहाँ सिराज अहमद भी अपनी बेगम के साथ दुकान खोलने पहुँच गया। बेगम ने जब उस मंदबुद्धि लड़की को वहाँ निर्वस्त्र बैठे देखा तो बिना एक पल की देरी किये अपना बुरका उतारा और उस लड़की को पहना दिया। उस लड़की ने भी ख़ुशी -ख़ुशी वह बुरका पहन लिया। भीड़ की प्रशंसा भरी आँखें अब सिराज अहमद की बेइंतहा ख़ूबसूरत बेगम को देख रही थीं। परन्तु यह प्रशंसा उस मंदबुद्धि लड़की के जिस्म को ढकने के कारण नहीं थी ।
भीड़  अब सिराज अहमद की बेइंतहा ख़ूबसूरत बेगम को बिना बुरके के देख रही थीं लेकिन उन आँखों में आज जिस्म की भूख न देखकर बेइंतिहा ख़ुश बुरका भी हैरान था।

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सफ़ेद कुत्ते  - डॉ सविता चड्ढा 



गली में हर रोज़  एक कुत्ते के रोने की आवाज़ से गीता का मन बहुत परेशान था । रात की नींद तो खराब होती ही , अपशकुन का अंदेशा भी रहता। उस रात उसने ठान  लिया कि  उस कुत्ते को ज़रूर ढूंढेगी जो हर रात रोता है , आख़िर क्या दुःख है उसे ? 
 उसने बड़ी वाली टॉर्च उठाई और घर के बाहर आ गई। अभी थोड़ी दूर ही गई थी कि  उसने  देखा एक सफ़ेद  रंग का कुत्ता आसमान की तरफ मुँह उठाके रो रहा है, बहुत ही दर्दीली आवाज़  में । वह सोचने लगी यह क्यों रो रहा, उसे कोई तकलीफ तो नहीं।  गीता को अपने पास आता देखकर सफ़ेद कुत्ता  खाने की इच्छा ज़ाहिर करर्ते हुए अपनी पूंछ हिलाने लगा। 
गीता  समझ गई, आजकल हर व्यक्ति,  केवल काले कुत्तों  को ही दूध पिलाता है । गलियों में घूमने वाले सफ़ेद और भूरे रंग के कुत्ते इसी प्रकार आसमान की तरफ मुँह  उठाकर रोते हैं और पूछते हैं भगवान से, "  तूने हमें काला बनाकर क्यों नहीं भेजा ? "  

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Thursday, January 1, 2026

Books_ advt


पुस्तकें , किताबें - BOOKS


 पुस्तकों के प्रचार - प्रसार हेतु सनद फाउंडेशन निरंतर कार्यरत है। दिल्ली के संजय कैंप चाणक्यपुरी में एक कार्यक्रम के दौरान संस्था ने पुरानी किताबें वहां के निवासियों के लिए दान करी।  आपके द्वारा दान दी गयी पुस्तकों को संस्था वृद्धाश्रम , अनाथ आश्रम और ग़रीबों की बस्तियों में पहुँचाती है  जिससे कि लोगो में पुस्तकों के प्रति रूचि जागृत हो सके। भविष्य में संस्था द्वारा गांवों में पुस्तकालय खोलने की भी योजना है। इसलिए आप सभी से निवेदन है कि आप अपनी पुरानी पुस्तकें कबाड़ी वाले को न देकर संस्था को दान करें। 


आपको जानकर हर्ष होगा कि 2025 में सनद  फाउंडेशन ने निम्नलिखित महानुभावों से पुरानी पुस्तकें दान स्वरूप प्राप्त करी। 

श्री  देवेंद्र मांझी - दिल्ली 

सुश्री  अनीता वर्मा - बैंगलोर 

सुश्री  चंदा प्रहलाद -  कोलकाता  

कर्नल तिलकराज - जालंधर 


संस्था सभी पुस्तक दानियों की आभारी है और उनके उज्ज्वल भविष्य  की कामना करती है।  


सादर

इन्दुकांत आंगिरस 

संस्थापक - सनद फाउंडेशन 

Friday, December 26, 2025

Tuesday, December 23, 2025

लघुकथा _घूंघट

 घूंघट 


ग्राम पंचायत द्वारा  आयोजित  " महिला सशक्तिकरण  " कार्यक्रम में ग्रामीण महिलाओं को मंत्री जी  द्वारा सम्मानित किया जा रहा था।  एक फुट का घूंघट डाले महिला को मोमेंटो देते हुए मंत्री जी ने न जाने किस अधिकार से महिला का घूंघट उठाते हुए कहा  , " अरे , इस घूँघट को हटाओ , इसका ज़माना चला गया अब। मर्दों की बराबरी करनी है , उनके कंधे से कन्धा मिला कर समाज में आगे बढ़ना है तो घूंघट हटाना ही होगा।  "

महिला सकुचाते हुए शरमा कर रह गयी क्योंकि समाज में आगे बढ़ने की बात तो वो समझ गयी थी लेकिन यह न समझ पाई कि उसका घूँघट किस्तों में क्यों हटा  और मंत्री जी के हाथ इतने खुरदरे क्यों थे ?


इन्दुकांत आंगिरस 

Threat to Me

 [11:01 AM, 12/24/2025] Sahib Hussain: Aap jaise ghatiya mansikata wale log ki wajah se hi Nafrat fail rahi hai.

[11:42 AM, 12/24/2025] angirasik: https://www.youtube.com/watch?v=1FfaMYS9nFE

[11:43 AM, 12/24/2025] angirasik: Mein to support kar raha hu

[11:47 AM, 12/24/2025] Sahib Hussain: Ha maine bhi dekha tha ye news.

Mera bhi khoon khula tha.

Mai bhi chahta hu usko fansi ki saja ho.

Lekin iske liye sari community ko taunt marna kaha tak jayaj hai.


Aise hi hazaro news dikha dunga jisme koi bap beti ko mar deta hai kisi ladke se bat karne k shaq me.

Ghunghat na karne ki wajah se bhi kitne murder hue hai.

Iska ye Matlab thodi hai na ki sari community ko taunt mara jaye

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