Friday, April 3, 2026

Neel Pari

इस पुस्तक का किसी भी अंश का किसी  भी रूप में चाहे इलेक्ट्रॉनिक अथवा मैकेनिक तकनीक से , फोटोग्राफी द्वार या अन्य किसी प्रकार से पुनर्प्रकाशन अथवा पुनर्मुद्रण लेखक और प्रकाशक की लिखित अनुमति बिना नहीं किया जा सकता। 

कवयित्री - दीपज्योति गुप्ता  " दीप " 
© दीपज्योति गुप्ता  " दीप "
ISBN :  978-93-86933-13-3
प्रथम संस्करण - 2026
मूल्य - 250/ रुपए INR
आवरण एवं चित्र - Pexels & AI
शब्द संयोजन एवं मुद्रक : 
Publisher - PUSTKAM : No. 20/1 , 3rd Cross , Neharu Road , Guddadahalli , 
Bengaluru - 560026  , Mobile - 9900297891

CHAND SITARE : Children poetry by Deepjyoti Gupta ' Deep '

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 नाम      - दीपज्योति गुप्ता  " दीप "

जन्म दिनांक  -       21 अक्टूबर 

स्थान  -           ग्वालियर ( म. प्र. )

शिक्षा  -    स्नातकोत्तर       (अर्थशास्त्र ,  इतिहास  )    बी. एड. , कम्प्यूटर    स्नात्तकोत्तर डिप्लोमा  ।  

व्यवसाय   -  अध्यापन 

पिताजी    -  श्री गणेश लाल सोनी ,कवि एवं समाजसेवी  ( पूर्व एस. एल. आर.)

माता जी    -  श्रीमती शोभा 

काव्य विधा  -  कविता, कहानी,  गीत, ग़ज़ल , शायरी ,  मुक्तक एवं   बाल साहित्य । 

                   

प्रकाशन  - देश के प्रतिष्ठित सभी समाचार पत्रों एवं विभिन्न पत्र - पत्रिकाओं में आलेखों, कविताओं एवं गीतों का प्रकाशन । 

संप्रति  - साहित्य में निरन्तर लेखन कवि सम्मलेनों और मंचों पर सक्रिय भागीदारी ।  


संपर्क  - 515 - बी. आर. अपार्टमेंट , सुरेश नगर, थाठीपुर ग्वालियर म. प्र.  Gwalior pincode - 474011


Address -  515 , B.R. Apartment , Suresh Nagar , Thatipur Gwalior  , M.P. Pin - 474011

ई मेल  - deepjyotigupta7@gmail.com 

मोबाइल न. - 9399028356 

                   7879944816

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1

अपना घर 


महक महक महके फुलबाग़िया ,

चहक चहक चहके है चिड़िया। 


गुटर गुटर गु बोले कबूतर , 

शायद कुछ बोले ये तीतर।  


मैं.. मैं.. मैं..बोली ये बकरी ,

बहना भर लाई  है गगरी। 


अम्मा झटपट रोटी बनाती , 

बड़े प्यार से हमें खिलाती। 


अपना घर है कितना प्यारा ,

लगता  सारे जग से न्यारा  ।  

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2

पतंग 

आसमान में उड़े पतंग ,
नीली डोरी इसके सँग । 

बच्चें इससे पेंच लड़ाते  ,
हम सब इसका मज़ा उठाते । 

दूर गगन में जब उड़ जाती ,
आँखों से ओझल हो जाती । 

देख के रह जाते सब दंग ,
कितने सुन्दर इसके रंग।  
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3

नीलगगन 

कितना सुन्दर नीलगगन ,
जैसे हो फूलों का चमन । 

रोज़ ही आते इस पर तारे ,
हिलमिल कर रहते ये सारे ।  

कभी ना लड़ते कभी ना रोते ,
वक़्त वो अपना कभी ना खोते । 

सदा समय पर आते हैं ,
सदा समय पर जाते हैं। 

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4

चंदा 

बादल में इक चंदा प्यारा ,
सबसे सुन्दर सबसे न्यारा । 

वस्त्र पहनता उजले उजले ,
तारो को सँग लेकर निकले । 

आँख मिचौली खेला करता ,
बदली में चुप से छिप जाता । 

छवि है इसकी बड़ी निराली ,
जैसे हो चाँदी की थाली । 

*****
5

धूप

ताज़ी स्वच्छ सुनहरी धूप ,
सावन की शर्मीली धूप । 

कभी बादलों में छिप जाती ,
छिप कर धीरे से मुस्काती । 

सर्दी में सौ नखरे दिखाती ,
सबको अपने पास बुलाती । 

दिखलाती प्यारा -सा रूप , 
लगती बड़ी भली ये धूप । 

मानव प्रकृति सभी को प्यारी ,
धूप जगत में सबसे न्यारी। 

******
6

चूहे की शादी 

चूहे की हुई धूमधाम से 
चुहिया के सँग सगाई ,

फूलों की डोली में बैठ कर 
चुहिया ससुराल आई । 

डाल के ढोलक गले में 
भालू जी ने नाच दिखाया ,

गदहे मामा ने भी अपना 
गीत अनोखा गाया। 

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7

तितली रानी 

तितली रानी , तितली रानी 
कहो , कहाँ से आई हो ?

पंखों में इतने सारे रंग 
भर कर  कैसे लाई  हो ?

लगती हो तुम परियों जैसी , 
सुघड़ , मनोहर , मतवाली । 

नीली , पीली , लाल , गुलाबी ,
कत्थई , भूरी और काली । 

फूल - फूल का रस पीती हो ,
उड़ - उड़ कर इतराती हो । 

जब भी तुम्हें पकड़ना चाहे ,
हाथ नहीं तुम आती हो।  

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8

दीपावली 

मुनिया बोली मम्मी से 
मम्मी आज दीवाली है  

आज सभी के घर घर में 
रौशनी होने वाली है 

चुन्नू , मुन्नू , सीता , गीता 
छोड़ेंगे बड़ा पटाखा 

आज तो ख़ूब मचेगा 
सबके घर में धूम धड़ाका 

नए नए कपडे पहनेंगे 
खाएँगे ख़ूब मिठाई 

जगमग करती दीपमालिका 
ढेरों   ख़ुशियाँ  लाई। 

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9

सुन्दर वन 

सुन्दर सा एक सुन्दर वन ,
था वो लेकिन बहुत सघन । 

मीठे मीठे फलों के ढेर ,
लगते थे अनगिनत बेर । 

तितली , चिडया और गिलहरी ,
बड़ी दोस्ती उनमें ठहरी । 

कौआ , मुर्गा और बटेर , 
भालू ,हाथी , बन्दर , शेर । 

आपस में रहते हिलमिल कर ,
कभी ना होती उनमें टक्कर । 

होली या दीवाली आती ,
घर घर जलती प्रेम की बाती।   

******
10

मेला 

लगा दशहरे पर जब मेला ,
राजू अपनी माँ से बोला । 

मैं भी मेला जाऊँगा ,
ख़ूब खिलौने लाऊँगा । 

झूले में भी झूलूँगा ,
पर मैं कभी ना भूलूँगा । 

छोड़ो कभी ना बड़ों का हाथ ,
रहो भीड़ में उनके साथ । 

वरना तुम खो जाओगे ,  
और बहुत पछताओगे। 

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11

ख़ूब पढ़ो 

ख़ूब पढ़ो और नाम करो ,
जग में ऐसा काम करो । 

नहीं किसी से करो लड़ाई ,
सँग सभी के करो भलाई । 

दीन दुखी का दुःख हर लो , 
सच्चाई दिल में भर लो । 

देश का मान रखना है ,
देश के लिए ही मरना है। 


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12

चाँद और सूरज 

चाँद और सूरज दोनों गो,
काम बड़े करते अनमोल। 

एक सभी को गर्मी देता ,
दूजा शीतलता भर देता। 

दोस्त हैं दोनों प्यारे प्यारे ,
काम जगत में करते न्यारे। 

धरती इनसे पाती अन्न ,
पाकर हम हो जाते धन्य। 

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13

कोयल 

कोयल काली काली है ,
फिर भी बड़ी निराली है ।

मीठा गीता सुनाती है ,
सबका मन हर्षाती है ।

इस डाली से उस डाली पर ,
फुदक फुदक इतराती है ।

कुहू की जब तान छेड़ती , 
मीठा रस बरसाती है ।

अमराई पर बौर खिले ,
सबको ये बतलाती है ।

तुम भी सबसे मीठा बोलो ,
यही पाठ सिखलाती है ।

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14

कहानी 

मुझे सुनाओ एक कहानी ,
उसमें हो परियों की रानी। 

सुन्दर सा एक बग़ीचा हो ,
बहता हो झरने का पानी। 

प्यारे प्यारे फूले खिले हों ,
पंछी करते हो मनमानी। 

सुनूँ कहानी सो जाऊँगा ,
फिर सपनों में खो जाऊँगा।   

बात कहीं ना जाऊँ भूल ,
सुबह जाना है स्कूल। 
 
*******

15

नदिया 

नदिया बहती जाती है ,
सीख यही सिखलाती है। 

कभी ना जीवन में रुकना ,
कभी नहीं डरकर झुकना। 

तूफ़ानों को चीर सहज ,
सदा ही आगे को बढ़ना। 

कितनी ही मुश्किल आये ,
कभी ना तुम पीछे हटना। 

यही बात सबसे कहना ,
चलना और चलते रहना। 

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16
तारे 

आसमान में तारे ,
लगते कितने प्यारे । 

तोड़ लाऊँ इनको धरती पर ,
झिलमिल करते सारे । 

चंदा के सँग आँख मिचौली ,
खेला करते सब मिलकर । 

चाँदी की थाली सा लगता ,
कितना प्यारा ये अम्बर । 


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17

चंदा 

चंदा तुम हो गोल गोल ,
उजले उजले प्यारे से । 

तुम चाँदी की थाली हो ,
क्या , लगते बड़े सितारे से । 

रोज़ रात को आ जाते हो ,
सुबह कहाँ छिप जाते हो । 

कितना भी पूछूँ   तुमसे ,
बात नहीं बतलाते हो । 

अपना दोस्त बना लूँ तुमको ,
फिर मुझको तुम बतलाना । 

खेलेंगे हम दोनों मिलकर ,
सुबह को तुम फिर छिप जाना । 

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18

घड़ी

टिक टिक टिक टिक करें घड़ी ,
आती अपने काम बड़ी। 

रात और दिन बतलाती ,
नखरे कभी ना दिखलाती। 

इसे देख शाला जाते , 
दस की टिक पर सो जाते। 

अगर घड़ी दे जाये जवाब , 
पूरा दिन हो जाये ख़राब। 

शाला को फिर होंगी देर ,
बनेंगे फिर मुर्गा या बटेर। 

घड़ी सदा चलती रहती ,
बढ़ते रहो ,सब से कहती । 

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19

मुन्ना  मुन्नी 

मुन्ना मुन्नी निकले घर से ,
गए नहीं पर वो स्कूल। 

बग़ीचे में खाना खाया ,
लगे खेलने झूला झूल। 

सही समय पर घर पहुँचे ,
सोचा किसी को कहाँ पता। 

मास्टर जी ने घर पर जाकर ,
माँ को सब कुछ दिया बता। 

माँ ने ख़ूब पिटाई की और ,
पापा ने भी फ़टकारा। 

स्कूल पहुँचे अगले दिन तब ,
मास्टर जी ने भी मारा। 

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20

सुबह सवेरे 

उठकर सुबह हाथ जोड़ो तुम , 
ईश्वर का फिर ध्यान करो। 

मात - पिता के चरणों को छूकर ,
सदा ही उनका मान करो। 

गुरुजन की बात मानकर ,
जीवन में तुम ज्ञान भरों। 

बड़ों के आगे ग़लत ना बोलो ,
किसी का मत अपमान करो। 

अगर चाहिए तुमको इज़्ज़त ,
तो सबका सम्मान करो। 

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बाल गीत  संग्रह 
                        चाँद - सितारे  

" आओ मिलाकर ख़ुशी मनाएँ 
   नाचे गाएँ , धूम मचाएँ 
आसमान में निकले सारे 
चम चम चमके चाँद सितारे 

                       एक छोटी - सी पाती 
  प्रिय पाठकों ,
         मुझे    अपने बाल - गीतों का ताज़ा संग्रह "  चाँद - सितारे   " आप सभी  को सौंपते हुए अत्यंत हर्ष हो रहा है।  
बाल गीतों का यह संग्रह विश्व के तमाम बच्चों को समर्पित है।  आशा है  "  चाँद - सितारे   " के गीतों को पढ़कर   बच्चें  प्रेरित होंगे  और अपनी  सृजनात्मक परिकल्पना का विकास कर पाएँगे ।  बच्चों को जानवरों और पक्षियों से विशेष लगाव रहता है। शब्दों को पढ़ने के  साथ साथ  चित्रों को देखने  और समझने में बच्चों का आंनद दुगना हो जाता है। इसलिए मैंने इस बाल गीत  संग्रह में उनके बाल मनोभावों को समझकर उन्हें प्रकृति से जोड़ने का  एक छोटा - सा प्रयास किया है। 
 टेक्नोलॉज़ी के इस युग में बच्चों का किताबों से जितना अधिक जुड़ाव रहेगा बच्चों में उतना ही सृजनात्मक क्षमता का  विकास होगा।  मेरा ऐसा  मानना है कि एक अच्छी किताब किसी भी व्यक्ति के सम्पूर्ण जीवन को प्रभावित करती है। मुझे विशवास है कि बच्चों के साथ साथ सभी आयु वर्ग के पाठक    " चाँद - सितारे  " बाल गीत संग्रह के गीतों का लुत्फ़ उठा पाएँगे। अपनी  बहुमूल्य प्रतिक्रियाओं से ज़रूर अवगत कराये। 
                                  शुभकामनाओं के साथ 
                                           आपकी 
                                      दीपज्योति  ' दीप '
                                      ग्वालियर , भारत

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Saturday, March 21, 2026

Paryaavaran Editorial

" हमारा पर्यावरण और आपका स्वास्थ्य " राष्ट्रीय  साझा संकलन के प्रकाशन पर प्रधान सम्पादक डॉ सैयद अली अख़्तर नक़वी को  अनेकानेक शुभकामनएं । इस पुस्तक में प्रकाशित रचनाओं के लेखकों को अपना स्नेहिल प्रेम प्रेषित  करता हूँ। 

यूँ तो पर्यावण की समस्या सम्पूर्ण संसार में ही व्याप्त है लेकिन भारत के सन्दर्भ में यह समस्या अधिक  गंभीर है।  दूषित पर्यावरण के चलते हर वर्ष लाखों लोग प्रभावित होते हैं। पर्यावरण की सुरसा मुँह खोले खड़ी है  और हैरान आँखों से दुनिया की अंधी दौड़ को देख रही है। मनुष्य  ने  जब जब प्रकृति के साथ खिलवाड़ किया  है तब तब प्रकृति ने अपना विकराल रूप दिखाया है।  वास्तव में देखा जाए तो मनुष्य ने अपने स्वार्थ के लिए प्रकृति  के कण कण को कलुषित किया है।  अफ़सोस तो इस बात का है कि मनुष्य को अपनी इस ग़लती का अहसास भी नहीं। प्रकृति के साथ साथ मानवीय मूल्यों का भी हनन बहुत रफ़्तार से हो रहा है। आगे बढ़ने की दौड़ में सब पीछे छूटते जा रहे हैं।  मनुष्य की कलुषित आत्मा को भी ताज़ा हवा और संवेदनाओं  की नदी चाहिए। मुझेआशा ही नहीं पूर्ण विशवास है कि जिस प्रयोजन से इस पुस्तक का प्रकाशन किया जा रहा है उससे इस संसार में  निश्चय ही कुछ बदलाव ज़रूर  आएगा।  इस पुस्तक की सार्थकता इसी बात में निहित है कि इसमें शामिल बेहतरीन कविताएँ , लघुकथा , गीत , ग़ज़ल , आलेख आदि पाठकों को सोचने पर विवश करेंगी और हम सब मिलकर एक बेहतर साफ़ , निर्मल , स्वच्छ और  संवेदनशील दुनिया बनाते हुए ना सिर्फ  पर्यावण को बचाएंगे अपितु सूखती हुए संवेदनाओं को भी प्रेमजल से सींचेंगे। 


सादर 

इन्दुकांत आंगिरस 

नई दिल्ली 

Monday, March 9, 2026

उत्साह तोली वार्षिक रिपोर्ट : 2024 -25

उत्साह टोली - वार्षिक रिपोर्ट  : 2024-25


प्रस्तावना -

उत्साह टोली की परिकल्पना  सरल अवधारणाओं पर आधारित है। मसलन एक अवधारणा ये है कि  अगर कोई बच्चा जीवन भर काम आने वाला  कोई एक संस्कार  या सॉफ्ट स्किल सीख ले, तो बस इतना ही काफी है। 

लगातार प्रयासों के सफल होने में  हम हमेशा पूर्ण विश्वास से लैस होकर  चुनौतियों का सामना करते हुए अडिग खड़े रहे हैं। यह बेवजह नहीं है। एक छोटा सा उदाहरण हमारी दृढ़ता को बेहतर ढंग से समझा सकता है। उच्च प्रदर्शन करने वाले बच्चों में भी ये पाया गया कि उनकी एकाग्रता पहले से घट रही थी । यह सर्वविदित था कि वे मोबाइल फोन पर लंबा समय बिता रहे थे। हमने एक गहन सत्र का आयोजन किया जिसमें हमने बच्चों से  अनौपचारिक रूप से इस विषय पर  बातचीत की और उन्हें मोबाइल के स्क्रीन समय का हमारे  मस्तिष्क पर प्रभाव की तस्वीरें, जानकारी और आँकड़े दिखाए। यहाँ तक कि कुछ चुटकुले भी साझा किये गए  कि हम जल्द ही फिर से चार पैरों पर चलने लगेंगे । एक महीने बाद, हमने यह जानने के लिए बच्चों से हाथ उठाने को कहा कि कितने बच्चों ने अपने मोबाइल फोन के उपयोग का समय कम किया था। कुछ बच्चों ने हाथ उठाए, जिनमें से तीन बच्चों ने प्रतिदिन आधे घंटे से भी कम समय तक उपयोग किया था। 

यही बिंदु  उत्साह टोली टीम की अंतर्निहित भावना और प्रयास को बनाए रखता है। हमेशा प्रयास करें, कभी हार न मानें। हमारा काम प्रत्येक क्षेत्र में हर उपलब्धि को चुनकर वर्ष दर वर्ष आगे बढ़ना है। इसके लिए हम अपने सभी समर्थकों और दानकर्ताओं , विशेष रूप से सर शोभा  सिंह ट्रस्ट, के प्रति सदैव आभारी और कृतज्ञ हैं, जो इस कार्य को संभव बनाते हैं।

जैसे ही आप नौवें वर्ष की रिपोर्ट को  पढ़ेंगे , हम आपको दसवें वर्ष में अपनी यात्रा के बारे में बताने के लिए उत्सुक रहेंगे ।

धन्यवाद

नीलिमा माथुर 


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संदर्भ :


नवें वर्ष में, उत्साह टोली परियोजना ने उत्तराखंड के नौकुचियाताल और उसके आसपास के बच्चों में महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक, सामाजिक-सांस्कृतिक और शैक्षिक पहलुओं को सफलतापूर्वक संबोधित करना जारी रखा  है । पर्यटक-चालित अर्थव्यवस्था के अपरिवर्तनीय प्रभाव को अल्पकालिक लाभ के लिए कृषि भूमि की अनियंत्रित बिक्री ने और भी बढ़ा दिया है। अधिकांश ध्यान देने योग्य व्यवहार पैटर्न पॉप कल्चर और सोशल मीडिया से प्रभावित पाए गए हैं।

हमने यह भी देखा है कि 10 साल तक के छोटे स्कूल बच्चों द्वारा सृजनात्मक AI ( कृत्रिम बुद्धिमत्ता )प्लेटफ़ॉर्म के उपयोग में वृद्धि हुई है।

MIT द्वारा प्रकाशित हालिया अध्ययन के परिणाम, जो आलोचनात्मक सोच का आकलन करते हैं, आश्चर्यजनक नहीं हैं। 

तीन समूहों से OpenAI, Google खोज और किसी भी एप्प का  उपयोग किए  बिना निबंध लिखने के लिए कहा गया। EEG रिकॉर्ड्स ने दिखाया कि ChatGPT उपयोगकर्ता तंत्रिका, भाषाई और व्यवहारिक स्तरों पर लगातार कम प्रदर्शन कर रहे थे और उनकी मस्तिष्क सहभागिता सबसे कम थी।

इस परिदृश्य में, केवल  ( IQ ) आईक्यू स्तर ही नहीं बल्कि एक मजबूत भावनात्मक गुणांक (EQ) विकसित करने की आवश्यकता को कम करके नहीं आंका जा सकता। उत्साह टोली परियोजना ने घर और स्कूल के बाहर इस तीसरे क्षेत्र में अपने प्रयासों को पुनः रेखांकित करते हुए अधिक विकसित किया । सीमित परिस्थितियों में जीवन भर सीखने के अवसरों, भाईचारे की भावना, सहभागी और सामूहिक निर्णय लेने, सार्वजनिक शिष्टाचार, अधिकारों/कर्तव्यों, जिज्ञासा और विश्लेषणात्मक कौशल, विभिन्न सॉफ्ट स्किल्स, रचनात्मकता और बाहरी दुनिया से परिचय के लिए यथासंभव अधिकतम खिड़कियाँ खोलना।

इस संदर्भ में, भारत के दिल्ली विश्वविद्यालय के लेडी इरविन कॉलेज के मानव विकास एवं बाल्यकाल अध्ययन विभाग की सहायक प्रोफेसर, डॉ. डिंपल रंगीला, पीएच.डी. से एक रिपोर्ट प्राप्त करना संतोषजनक था। (उन्होंने एक टीम बिल्डिंग कार्यशाला आयोजित की।)

वह कहती हैं:

" उत्साह टोली टीम द्वारा अपनाए गए मूल दर्शन और प्रथाएँ बाल विकास के प्रमुख सिद्धांतों और अवधारणाओं के अनुरूप हैं, जिनमें शामिल हैं:

बाल-केंद्रित दृष्टिकोण: यह स्वतंत्रता और स्व-निर्देशित सीखने को बढ़ावा देता है, व्यक्तिगत सीखने की गति का सम्मान करता है और अंतर्निहित प्रेरणा तथा संज्ञानात्मक सहभागिता को प्रोत्साहित करता है।

बच्चे की सक्रिय भूमिका का मूल्यांकन: सीखने की प्रक्रिया में बच्चों की सक्रीय सहभागिता को पहचानना ; यह दृष्टिकोण निर्णय लेने, जिम्मेदारी और आत्म-कुशलता को बढ़ावा देने में मदद करता है है, जो संज्ञानात्मक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

संदर्भात्मक शिक्षण: समझ और स्मरणशक्ति को बढ़ाने के लिए शिक्षण को संदर्भात्मक और सांस्कृतिक रूप से प्रासंगिक बनाया जाता है। यह विधि नई जानकारी को मौजूदा ज्ञान से जोड़ती है जिससे गहरी संज्ञानात्मक सहभागिता को बढ़ावा मिलता है।

सहकर्मी मार्गदर्शन:सहकर्मियों के साथ मिलकर सीखने की प्रक्रिया  आपसी ज्ञान को सीखने और साझा करने के लिए प्रोत्साहित करती  है। सहकर्मी मार्गदर्शन साझा रूप से सीखना और सामाजिक कौशल को बढ़ावा देकर सामाजिक और संज्ञानात्मक विकास को बढ़ाता है।   

ये सभी सिद्धांत " उत्साह टोली "द्वारा आयोजित गतिविधियों में गहराई से समाए हुए थे और इन्हें लगातार अपनाया जाता रहा। " 

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पद्धति


डॉ. डिंपल ने आगे कहा, "  उत्साह टोली परियोजना की एक महत्वपूर्ण ताकत इसका बाल-केंद्रित दृष्टिकोण है। बच्चों को उनकी गतिविधियों में कई विकल्प दिए जाते हैं जिससे यह सुनिश्चित होता है कि उनकी बात सुनी जाए और उनकी सक्रिय भागीदारी को स्वीकार किया जाए। यह दृष्टिकोण न केवल उनके आत्मविश्वास को बढ़ाता है बल्कि जिम्मेदारी और स्वतंत्रता की भावना को भी पोषित करता है।"

" उत्साह टोली "  के संदर्भ में, डॉ. डिंपल ने Piaget के संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत और रचनात्मकता सिद्धांत, Vygotsky' के निकटवर्ती विकास क्षेत्र और सामाजिक-सांस्कृतिक सिद्धांत, तथा Garner  के बहुबुद्धिमत्ता सिद्धांत का उल्लेख किया है। 

उत्साह टोली में, सहज रूप से विकसित समग्र दृष्टिकोण के समग्र प्रभाव ने बच्चों में निम्नलिखित परिणाम दिखाए हैं:

*  अपने विचार व्यक्त करने की क्षमता के साथ आत्मविश्वास में वृद्धि

*  अन्य दृष्टिकोणों की  चर्चा और समायोजन 

*   ग़ैर -आक्रामक सामूहिक समझौता

• 'उनकी जगह' के लिए बढ़ी हुई स्वामित्व भावना  


वर्ष भर, मार्गदर्शक धैर्य और तर्क के साथ बच्चों का मार्गदर्शन करने के लिए निरंतर प्रयास करते रहते  हैं।

पिछले कुछ वर्षों की तरह गतिविधियों को 4 प्राथमिक क्षेत्रों में समूहित किया गया।

*  संज्ञानात्मक विकास और आलोचनात्मक सोच

*  कार्यशालाओं सहित विशेष गतिविधियाँ 

*  शिल्प और कला  

* ख़ुशहाल दिन 

 * व्यवहार परिवर्तन (सामाजिक और नागरिक जिम्मेदारी)


वर्षों के दौरान, आंतरिक मूल्यांकन स्वाभाविक रूप से विकसित हुआ है और आवश्यकतानुसार हमेशा संशोधित किया गया है। 

इस वार्षिक चक्र में, जैसे-जैसे टीम को अधिक सशक्त बनाया गया, मूल्यांकन के लिए एक से अधिक औपचारिक विधि लागू की गई। इसे भी पहले , प्रथम  तिमाही में एक रूप में अपनाया गया और बाद में शेष तीन तिमाहियों के लिए  संशोधित रूप में । 


इस वर्ष के दौरान, बच्चों को निम्नलिखित प्रयोजनों  के लिए मदद उपलब्ध कराई गयी :

* 10  विद्यालय विषय

* 11 गतिविधियाँ

* 6 प्रतियोगिताएँ

* 3 कार्यशालाएँ

* 2 विशेष प्रदर्शन 

* 1 वार्षिक टूर 


संज्ञानात्मक विकास और आलोचनात्मक सोच 

संज्ञानात्मक विकास और आलोचनात्मक सोच के लिए गतिविधियों की एक विस्तृत श्रृंखला को समग्र रूप से संयोजित किया जाता है जो व्यक्तिगत रूप से, छोटी टीमों में, बड़े समूहों में या सामूहिक रूप से क्षमता निर्माण की एक श्रृंखला को भी सक्षम बनाती है।

STEM-उन्मुख खेल समग्र विकास के लिए एक मौन लेकिन प्रभावी उपकरण बन गए हैं।


* तर्कशक्ति का संवर्धन 

*  विश्लेषणात्मक और तार्किक कौशल

*  रचनात्मकता और कल्पना

* वस्तु पहचान 

*  हाथ और आँख का समन्वय

*  स्मृति निर्माण

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*  मोटर कौशल, रंग और आकार की पहचान

*  स्थानिक कौशल

*  ध्यान अवधि का निर्माण

*  समस्या समाधान

* जिज्ञासा  संवर्धन 

*  विश्लेषण और आलोचनात्मक सोच

*  समय प्रबंधन

* एकाग्रता और स्मृति कौशल

*  समस्या समाधान की क्षमताओं को बढ़ाने के लिए आँख-हाथ का समन्वय

*  आईक्यू (IQ) बढ़ाना


शैक्षणिक सहयोग

वर्णमाला और संख्यात्मक साक्षरता के मौलिक कौशलों को कुछ अधिक केंद्रित रणनीतियों के साथ संबोधित किया गया। दैनिक गणितीय समस्याएँ, स्मृति अभ्यास दोहराना, पुनः स्मरण और रंगीन क़लम से लिखावट  (पिछली वार्षिक रिपोर्ट देखें) के अलावा, अतिरिक्त प्रभाव के लिए निम्नलिखित शामिल किए गए:

*  लकड़ी की तख्ती  पर सामान्य और कर्सिव दैनिक लेखन अभ्यास जिसे बाद में नोटबुक में लिखा जाता है। 

*  पेन/पेंसिल को पकड़ने और काग़ज़  पर बिना दबाव डाले लिखने पर विशेष ध्यान।

*  धीमी / कमजोर सीखने वालों के लिए: वर्णमाला और संख्याओं को उल्टा लिखना और समर्थित उल्टा चलना (मस्तिष्क के बाएँ और दाएँ गोलार्ध को मजबूत करना)

*  मिलकर  सीखना और साझा करना एक प्रभावी और ख़ुशहाल सीखने की प्रक्रिया के लिए एक सफल साधन बना रहा।

शैक्षणिक सहयोग  इस प्रकार प्रदान किया गया

उमा चनोटिया - टीम लीडर  

कक्षा -  V से  VIII तक 

बालिका - 12  , बालक - 15

कुल - 27

गणित , विज्ञान , अँगरेज़ी , अर्थशास्त्र , रसायनशास्त्र ,  भौतिकी , जीवविज्ञान  


नीमा कर्नाटक - वरिष्ठ मार्गदर्शक 

कक्षा - V से  VIII  तक 

बालिका - 7 , बालक - 9

कुल - 16

हिन्दी , अँगरेज़ी , संस्कृत , पर्यावरण विज्ञान , गणित , विज्ञान  


डिजिटल साक्षरता 

हिन्दी और अँगरेज़ी टाइपिंग सीखने के लिए नियमित निगरानी प्रणाली जारी रही। सर सोभा सिंह ट्रस्ट द्वारा दान किए गए चार लैपटॉप इस प्रयास का मुख्य आधार थे। जहाँ चार-चार बच्चों के समूह लगभग प्रतिदिन बारी-बारी से 45 मिनट तक अभ्यास करते थे।

कम्प्यूटर : रेनू भट्ट / नीलिमा माथुर   

आयु सीमा - 13  से  17 वर्ष तक 

बालिका - 9  , बालक - 5

कुल - 14


प्रतियोगिताएँ ( वाद - विवाद , स्क्रैबल , कैरम  ) 

प्रतियोगिताएँ आक्रामक प्रतिस्पर्धात्मक गतिविधि की अपेक्षा  अधिक मनोरंजक गतिविधि बन गईं। यह भावनात्मक बुद्धिमत्ता (EQ) के विकास के मूल सिद्धांत के अनुरूप है। प्रतियोगिताएँ आयोजित करने का उद्देश्य यह धारणा स्थापित करना है कि जीतने से अधिक महत्वपूर्ण भागीदारी है। बच्चों ने इस विचार को अपनाने की इच्छा दिखाई। इसका परिणाम यह हुआ कि प्रतियोगिताएँ  'मैं तुमसे बेहतर हूँ'  जैसी आभा के बजाय एक सामूहिक सहभागी आयोजन बन गईं। उदाहरण के लिए 'विजेताओं' की कोई अवधारणा न होने के कारण बच्चे इस रोमांचक निर्णय में शामिल हुए कि उन्हें किसकी बात सबसे अधिक पसंद आई। 

इसके अतिरिक्त, इस वर्ष प्रतियोगिताओं की प्रणाली को परिष्कृत किया गया ताकि बहसों के लिए लंबे मार्गदर्शित प्रारंभिक 'चिंतन' चरण और स्क्रैबल तथा कैरम के अभ्यास शामिल किए जा सकें। कुल प्रतियोगिताओं की संख्या को मापा गया और संबंधित मार्गदर्शन को लंबी अवधि के सीखने/अभ्यास के दौरान बनाए रखा गया।  

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वाद - विवाद 

विपरीत दृष्टिकोणों की सराहना करने के अलावा आत्मविश्वास और आत्मसम्मान बनाने का सार बरकरार रहा। इस वर्ष, अग्रिम पठन और शोध के लिए पर्याप्त समय आवंटित करने के महत्व को समझने पर अधिक जोर दिया गया। . इससे विश्वसनीय जानकारी तक पहुँचने, झूठी ख़बरों  के खतरों को समझने और कृत्रिम बुद्धिमत्ता ( AI ) पर निर्भर रहने के बजाय अपनी विश्लेषण क्षमता का उपयोग करने की एक फलदायी प्रक्रिया शुरू हुई।
विषयों का मार्गदर्शन और चर्चा  मार्गदर्शकों द्वारा की गई। बच्चों को भाषा के चयन और बहस प्रतियोगिताओं में पक्ष/विपक्ष के लिए स्वतंत्र विकल्प जारी रखने दिया गया।
विवाद प्रतियोगिताओं के दो दौर थे, जिनके विषय थे :
 • लोकतंत्र
 • पात्रता

ये विकल्प बच्चों के साथ अचानक हुई बातचीत से उत्पन्न हुए जिनमें कुछ घटनाएँ अधिकारों और दायित्वों के मुद्दों तथा स्वतंत्रता दिवस समारोहों को दर्शाती थीं।  एक चौंकाने वाला खुलासा यह था कि कक्षा पाँच का एक बच्चा भी जानकारी और हिंदी-अँगरेज़ी अनुवाद के लिए ChatGPT/AI से कितनी जल्दी परिचित हो गया है और इसका बेरोकटोक उपयोग कर रहा है।  'ब्रेन पावर' और सोच बनाम AI के उपयोग का मामला गंभीरता से लिया गया और पूरे वर्ष लगातार संबोधित किया गया। इससे स्क्रीन टाइम से होने वाले मस्तिष्क क्षति पर कुछ सत्र भी आयोजित हुए। परिणामस्वरूप, कुछ बच्चों ने अपने मोबाइल फोन के उपयोग को स्वयं नियंत्रित करना शुरू कर दिया।

स्क्रैबल 

यह उन लोगों के लिए एक दैनिक गतिविधि बन गई जिन्होंने प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए स्वयं को नामांकित किया था। इसे 'दिन का शब्द' के माध्यम से सीखने की एक श्रृंखला द्वारा समर्थन  किया गया था। इसमें दो या अधिक बच्चों द्वारा हिंदी में एक वाक्य तैयार करना, शब्दकोश का उपयोग करके अँगरेज़ी शब्द खोजना और फिर अँगरेज़ी में वाक्य तैयार करना शामिल था। इसे मार्गदर्शक द्वारा व्याख्याओं के साथ और संशोधित किया गया। 

इस प्रक्रिया ने शब्दकोश का उपयोग न केवल स्क्रैबल खेलने और उसमें प्रतिस्पर्धा करने के लिए बल्कि रोज़मर्रा की ज़िंदगी में भी स्वाभाविक बना दिया है।

कैरम

यह अधिकांश बच्चों का सबसे पसंदीदा खेल है। इसके लिए किसी प्रेरणा की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन व्यवहार और नियमों में अच्छे अभ्यास पर बहुत ध्यान देना होता है। 


प्रतियोगिताएँ 

वाद - विवाद 
आयु : 10  से   17 वर्ष 
कक्षा :  V से  XII तक 
बालिकाएँ : 5; बालक : 5
कुल : 10


स्क्रैबल 
आयु : 10  से  17 वर्ष 
कक्षा : V से  XII तक 
बालिकाएँ : 5;बालक : 3
कुल : 8

कैरम
आयु : 8 से  17 वर्ष 
कक्षा :  III से XII  तक 
बालिकाएँ : 9;बालक : 8
कुल : 17

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विशेष उपलब्धि 


 " उत्साह टोली "   में बोलचाल की अंग्रेज़ी और पुस्तकालय का उपयोग हमारे प्रयासों का अभिन्न हिस्सा बने रहे। इनके माध्यम से बच्चे वैश्विक नागरिक बनने के लिए आवश्यक कौशल सीखते हैं। 


बोल चाल की अँगरेज़ी 


पिछले वर्ष में बोली जाने वाली अँगरेज़ी के लिए विकसित नमूने मॉडल को आगे बढ़ाया गया और बच्चे रविवार तथा दैनिक सत्रों दोनों में उत्साहपूर्वक शामिल हुए। दैनिक सत्र पिछले वर्ष की टीम लीडर की प्रतिक्रिया के आधार पर शुरू किए गए और उन्होंने अधिक प्रत्यक्ष रूप से व्याकरण पर अधिक ध्यान केंद्रित किया। 


विद्यालयों में भाषा माध्यम और आयु वर्ग के बीच की खाई को पाटने के लिए विभिन्न तकनीकों का और अधिक उपयोग किया गया। एक नई गतिविधि 'दिन का शब्द' शुरू की गई। बच्चे टीमों में काम करते हैं, हिन्दी में एक वाक्य लिखते हैं, शब्दकोश से संबंधित अँगरेज़ी शब्द ढूंढते हैं, अँगरेज़ी वाक्य बनाते हैं, जिसे फिर मार्गदर्शक द्वारा संशोधित किया जाता है।

बोली जाने वाली अँगरेज़ीऔर 'दिन का शब्द', स्क्रैबल तथा दैनिक एवं रविवार सत्रों के बीच एक चक्र बनाया गया। इस प्रक्रिया में प्रत्येक सत्र में स्तर धीरे-धीरे बढ़ाया गया। प्रत्येक इच्छुक बच्चे को सोचने और प्रतिक्रिया देने के लिए हमेशा पर्याप्त समय दिया गया।

रविवार सत्र 


*  'an', 'en', 'in', 'on', 'un' वाले शब्द – नए शब्द + वाक्य 


* वाक्यों के लिए ट्रिगर शब्द


* वाक्यों के लिए गडमड शब्द 


उदाहणार्थ :  Srinagar, J&K, capital, holds, of, Festival, Tulip, and, Shikara, region’s, beauty, showcase, Festival, the, the, the, to

वाक्य : Srinagar, the capital of J&K, holds the Tulip Festival and the Shikara Festival to showcase the region’s beauty. 

•  वाक्यों में प्रयुक्त शब्दों का पुनः स्मरण 

*  समूहों  में बातचीत का निर्माण – किसी संदर्भ को पूरी तरह से समझाने के लिए अच्छे लेखन हेतु 5Ws + 1H की अवधारणा का परिचय

*  गडमड शब्दों को जोड़कर नए वाक्य बनाना, संबंधित शब्दों को जोड़ना

दैनिक सत्र

*  व्याकरण-आधारित – संज्ञा, क्रिया, सर्वनाम, लिंग

*  कुछ बुनियादी ट्रिगर शब्दों वाले वाक्य

* नए शब्द 

ये भी देखें :

 भविष्य की उच्च शिक्षा /पेशे से सम्बंधित  विकल्पों के लिए व्यापक परामर्श साप्ताहिक आधार पर एक-एक सत्रों में आयोजित किया गया।
 कई बच्चों ने रक्षा बलों में रुचि दिखाई, लेकिन वे बड़ी तस्वीर के बारे में कम जानकारी रखते थे। एक बाहरी स्थान पर दो वरिष्ठ सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों: वाइस-एडमिरल अवनीश राय टंडन और कर्नल अनुराग चंद्रा के साथ एक विशेष सत्र आयोजित किया गया। उन्होंने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी की प्रक्रिया और इसके भविष्य से परिचय कराया। प्रस्तुति के बाद बच्चों के साथ एक लंबा संवादात्मक प्रश्नोत्तर सत्र हुआ। 

  शतरंज को औपचारिक रूप से सिखाने के लिए एक विशेष प्रयास किया गया और कुछ चुनिंदा बच्चों ने खिलाड़ी स्तर तक प्रगति की है। 

  पुस्तकालय में और किताबें जोड़ी गईं। इसका उपयोग करने की प्रेरणा बनी रही और बच्चे खाली समय में किताब उठाने के आदी हो गए। 

   लेक रिज़ॉर्ट में पास के एक स्थान पर चित्रकारों का एक गहन कलाकार शिविर आयोजित किया गया था। कला में रुचि रखने वालों को स्थल भ्रमण के लिए ले जाया गया। उन्हें औपचारिक स्कूल के चित्रकारों और लोक कलाकारों के साथ बातचीत करने का मौका मिला। इतने करीब से संचालित होते  रचनात्मक कार्य को देखने का  जीवन में अनोखा  अवसर था। बच्चे एक-दूसरे के बीच प्रत्येक पेंटिंग पर गहन चर्चा करते हुए देखे गए। संगीत में गहरी रुचि रखने वाले दो बच्चों को शिविर के दौरान एक शाम  सरोद और तबले के कार्यक्रम के लिए ले जाया गया। यह पहली बार था जब बच्चों को इस अज्ञात कला की दुनिया को इतनी करीब से देखने का मौका मिला। यह उनके लिए एक अविस्मरणीय अनुभव था। 

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इसके अतिरिक्त, चार कार्यशालाएँ  आयोजित की गयी ; प्रत्येक समूह के लिए एक -

फोटो कार्यशाला, स्पार्कल कार्यशाला, गाथा कार्यशाला, टीम-बिल्डिंग कार्यशाला।


कार्यशालाएँ

फोटो कार्यशाला

यह कार्यशाला फोटोग्राफर और फ़िल्म  निर्माता जॉयदीप दास द्वारा आयोजित की गई थी। यह चार दिन ऊर्जावान और आकर्षक रहे। बच्चों ने अच्छी तस्वीर के लिए बुनियादी नियम और सावधानियाँ, परिदृश्य, फोटो निबंध और पोर्ट्रेट (प्रकाश के साथ) सीखे। उन्हें प्रशिक्षक की देख -रेख में बाहर जाकर कुछ कैंडिड फोटोग्राफी करने का अवसर मिला। रिपोर्ट संलग्न है।

स्पार्कल कार्यशाला

यह तीन दिवसीय बिना किसी लक्ष्य की कार्यशाला थी, जिसमें बच्चों को रंग, रूप, संयोजन और डिज़ाइन को स्वाभाविक रूप से खोजने का अवसर मिला। यह रंगों, चमकी , स्पार्कलर और मनकों के साथ मज़े, खेल और सृजन का समय था। बच्चों ने तीन दिन टोकरियों और पैकेटों में रखी सामग्री को खोजते हुए और चारों ओर बिखरी मिली-जुली सामग्री का आनंद उठाया । हर किसी ने अपना माध्यम चुना और जैसा चाहा वैसा काम किया। 


गाथा कार्यशाला

यह नाटकीय कहानी-लेखन पर 7-दिवसीय कार्यशाला थी। कहानी के तत्वों को समझना , बुनियादी कहानी के विचार तैयार करना (व्यक्तिगत रूप से और समूहों में), सभी विचारों को मुख्य कहानी के ट्रिगर्स के लिए विखंडित करना। पूरे दिनों में अविश्वसनीय ऊर्जा, रचनात्मक उत्साह और गहन विचार रहे। उन्होंने चरित्र-चित्रण, नायक और खलनायक, अच्छाई और बुराई पर काम किया। नौकुचियाताल के ये छोटे कथाकार एक पूर्ण सार्वभौमिक चेतना दिखा रहे थे, जिसमें महान फ़िल्मों  के ऐसे तत्व भी शामिल थे जिन्हें उन्होंने देखा भी नहीं था।


टीम-बिल्डिंग कार्यशाला / क्षमता-निर्माण कार्यशाला

यह कार्यकारी निदेशक से नीचे की टीम के लिए शीर्ष-से-नीचे प्रशिक्षण था। भारत के नई दिल्ली स्थित लेडी इरविन कॉलेज में बाल विकास की सहायक प्रोफेसर डॉ. डिंपल रंगीला ने इस प्रशिक्षण के लिए अवलोकन, संवाद और साक्षात्कार में गहन समय समर्पित किया। बच्चों की दैनिक दिनचर्या का अवलोकन करने, प्रतिक्रिया देने और तकनीकों को बेहतर व उन्नत करने के लिए प्रत्यक्ष संवादात्मक सत्र आयोजित करने के बीच यह एक अत्यंत मूल्यवान उपलब्धि थी।


स्पोकन इंग्लिश  / व्याकरण  – नीलिमा माथुर 

कक्षा :  IV से  XII तक 

आयु  : 9 – 17 वर्ष 

दैनिक समूह 

बालिकाएँ : 8; बालक :12

कुल : २०


रविवार समूह 

बालिकाएँ:16; बालक :17  

कुल : 33 ( छह माह तक )

          31 ( छह माह के बाद 2  बालक कम  हुए ) 


पेशा चयन  – पूर्व सैनिकों द्वारा रक्षा बलों की प्रस्तुति 

सौजन्य  वाइस एडमिरल अवनीश राय टंडन और कर्नल अनुराग चंद्र

आयु: 14 से 17 वर्ष

बालिकाएँ: 7; बालक: 3

कुल: 10 


शतरंज –वरुण  माथुर

आयु: 9 से 17 वर्ष

बालिकाएँ: 4; बालक: 7

कुल: 11

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लेक रिसॉर्ट में कलाकारों का शिविर

सौजन्य: रसाजा फाउंडेशन, दिल्ली

आयु: 13 से 15 वर्ष

बालिकाएँ: 3;बालक: 3

कुल: 6


फोटो कार्यशाला – जोयदीप  दास

आयु: 9 से 15 वर्ष

बालिकाएँ: 13; बालक: 9

कुल: 22


स्पार्कल कार्यशाला – नीलिमा माथुर, वरुण  माथुर

आयु: 8 से 17 वर्ष

कक्षा III से XII

बालिकाएँ: 9; बालक: 10

कुल: 19


गाथा कार्यशाला – वरुण माथुर, नीलिमा माथुर

आयु: 8 से 17 वर्ष

कक्षा : III से XII

बालिकाएँ: 8;बालक: 9

कुल: 17


टीम-बिल्डिंग कार्यशाला – डॉ. डिंपल रंगीला

टीम प्रतिभागी: नीलिमा माथुर , वरूण माथुर , उमा चनोटिया , भावना चनोटिया ,

हेमा राउतेला, रेणु भट्ट .


शिल्प और कला

हस्तशिल्प – मकरामे / एपन ( Aipan )

मकरमे, एपन लोक कला, राखी बनाना, करवा चौथ, जन्माष्टमी और दीवाली से संबंधित शिल्पों पर काम पिछले वर्षों की तरह जारी रहा। बच्चों के लिए रंगों, डिज़ाइन और संयोजन के विचारों की रचनात्मक खोज " उत्साह टोली " में होने का रोमांचक और संतोषजनक हिस्सा बनी हुई है।

इस वर्ष स्थानीय लोक कला एपन ( Aipan ) पर काम करने पर विशेष ध्यान दिया गया। रेखाओं और आकृतियों के लिए रूलर के माप और ज्यामितीय परकार जैसे सरल उपकरणों का उपयोग करके डिज़ाइन में सटीकता और शुद्धता विकसित करने पर जोर दिया गया।


सिलाई और बुनाई भी जारी रही।

क्राफ्ट और मकरामे – भावना चनोटिया

आयु: 12 से 16 वर्ष

बालिकाएँ: 12;  बालक: 3

कुल: 15


एपन – हेमा राउतला

आयु: 9 से 15 वर्ष

लड़कियाँ: 13; बालक: 1

कुल: 14


सिलाई – भावना चनोटिया

आयु: 11 से 16 वर्ष

बालिकाएँ: 7;बालक: 2

कुल: 9


बुनाई – नीमा कर्नाटक

बालिकाएँ: 10

आयु: 11 से 15 वर्ष

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ललित कलाएँ

बच्चों के एक समर्पित समूह ने ललित कलाओं / उन्नत रचनात्मक कौशलों, विशेष रूप से कथक, गिटार, चित्रकला / स्केचिंग की औपचारिक तकनीकों और सुलेख ( Calligraphy ) में शुरुआती स्तर में अपनी रुचि बनाए रखी।

कथक साप्ताहिक सत्र

सिद्धांत और नियमित नृत्य अभ्यास पूरे वर्ष जारी रहा। बच्चों के एक समूह ने कथक के औपचारिक शिक्षण का एक पूरा वर्ष सफलतापूर्वक संपन्न    किया।


कथक – दीक्षिका आर्य

आयु: 9 से 15 वर्ष

बालिकाएँ: 7;बालक : 1

कुल: 8


गिटार साप्ताहिक सत्र

दो नए गिटार और नियमित रूप से ऑनसाइट उपलब्ध एक प्रशिक्षक के साथ, गिटार की कक्षाएँ  दैनिक कार्यक्रम का हिस्सा बन गईं। हालांकि कई बच्चों ने सीखने के लिए आवेग में क़दम  उठाया, लेकिन दो लड़के समर्पित शिक्षार्थी बन गए और नियमित अभ्यास के साथ विभिन्न स्तरों पर आगे बढ़े।


गिटार – वरुण माथुर

आयु: 11 से 17 वर्ष

बालिकाएँ: 2; बालक: 9

कुल: 11


रेखाचित्र  चित्रकारी 

कुछ बच्चों ने पेंटिंग में अपने कौशल को बढ़ाने के लिए रेखाचित्र  / चित्रकारी  की औपचारिक तकनीकें सीखने में गहरी रुचि विकसित की। अन्य बच्चों के लिए, सुलेख में सुधार करना कैलीग्राफी सीखने का एक प्रेरक कारण था। सभी ने प्रक्रिया का चरण-दर-चरण पालन करने के लिए आवश्यक धैर्य का प्रदर्शन किया।


रेखाचित्र  और चित्रकारी  – वरूण माथुर

आयु: 11 से 15 वर्ष

बालिकाएँ: 9; बालक : 1

कुल: 10


हैप्पी डेज़

ख़ुशहाल दिनों की यादें  जीवन भर का उपहार हैं और " उत्साह टोली " के ये आनंदमय दिन हमेशा यादगार बने रहते हैं। इसलिए, जन्मदिन, स्वयं आयोजित कार्यक्रम, ट्रीट्स, छात्रों का सम्मान, वार्षिक यात्रा, सब कुछ वैसे ही जारी रहा जैसे हमेशा से रहा है।


जन्मदिन

यह उन सभी बच्चों के लिए हर 3-4 महीने में मनाया जाता है जिनका जन्मदिन उस अवधि में आता है। उन्हें एक छोटा -सा उपहार मिलता है और सभी अपने पसंदीदा केक और कुछ नाश्ते के साथ पार्टी कर पाते हैं।


कार्यक्रम के दिन (राष्ट्रीय दिवस / त्योहार / कोई अन्य)

यह पसंदीदा आत्म-प्रेरित उत्सव का उत्साह जारी रहा, हालांकि इसमें थोड़ा बदलाव किया गया। बॉलीवुड के रुझानों की नकल करने की प्रवृत्ति के जवाब में, उत्सव कार्यक्रमों की संख्या कुछ विशिष्ट आयोजनों तक सीमित कर दी गई और नृत्य को विकल्प के रूप में शामिल नहीं किया गया, जब तक कि वह कथक-शैली पर आधारित न हो। इसलिए उत्सव भाषणों/कविताओं/नाट्य-प्रस्तुतियों पर केंद्रित रहा। इसे बच्चों द्वारा कुछ मार्गदर्शन के साथ योजनाबद्ध और कार्यान्वित किया गया।

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 मनाए गए उत्सव  :

शिक्षक दिवस, बाल दिवस, जन्माष्टमी, क्रिसमस। लगभग सभी बच्चों को किसी न किसी रूप में भाग लेने के लिए प्रेरित किया गया। क्रिसमस जन्मदिनों के आने और क्रिसमस पोस्टर प्रतियोगिता के साथ एक भव्य आयोजन था। 


विशिष्ट  अतिथिगण 

" उत्साह टोली " में अतिथि हमेशा विशेष होते हैं। दिन का आयोजन अतिथि की सुविधानुसार किया जाता है। लेखिका सुश्री माला दयाल, जो सर सोभा सिंह ट्रस्ट की एक ट्रस्टी हैं ने उत्साह टोली केंद्र का दौरा किया। यह एक संक्षिप्त लेकिन बहुत ही सौहार्दपूर्ण मुलाक़ात थी। तनुश्री सेनगुप्ता और कुमुद-शिरिश माथुर ने भी इस परियोजना में रुचि दिखाकर इसे गौरवान्वित किया।


वार्षिक यात्रा

इस बार, बच्चों ने मुक्तेश्वर की यात्रा पर सहमति व्यक्त की। यह एक ऐसी जगह है जहाँ से हिमालय की पंचचूली पर्वत श्रृंखला का 180-डिग्री का दृश्य दिखाई देता है, जिसमें नंदा देवी, नंदा कोट, नंदा घुंटी, त्रिशूल और पंचचूली चोटियाँ शामिल हैं। दाता, तनुश्री सेनगुप्ता की बदौलत, बच्चों ने घर लौटते समय  स्वादिष्ट पेट भरने वाला दोपहर का भोजन किया।


बालिकाएँ: 14; बालक : 11

कुल: 25


व्यवहार में बदलाव (सामाजिक और नागरिक जिम्मेदारी)

सामाजिक और नागरिक जिम्मेदारी विकसित करने पर दिए गए ध्यान के प्रभाव से बच्चों के व्यवहार और व्यक्तित्व में एक स्पष्ट बदलाव देखा गया है। " उत्साह टोली "आने के कुछ ही हफ़्तों  के भीतर, अधिकांश बच्चों ने अच्छी आदतों को अपना लिया है।


इसी के लिए, सभी गतिविधियों को लगन से जारी रखा गया:

• जूते-चप्पल और स्कूल बैग को व्यवस्थित तरीके से रखना

• खेलने या टैबलेट के लिए छीनना नहीं, बल्कि अनुरोध करना

• ट्रीट प्लेटों के लिए हाथ नहीं बढ़ाना, बल्कि अपनी बारी की  प्रतीक्षा  करना

• सत्रों में बोलने के लिए हाथ उठाना और अपनी बारी की  प्रतीक्षा  करना

• मार्गदर्शकों से बात करने के लिए धैर्यपूर्वक किनारे पर  प्रतीक्षा करना / 'क्षमा कीजिए' कहना

• दूसरों की बात न टोकना, शारीरिक या मौखिक दुर्व्यवहार और दूसरों के बारे में शिकायत करने से बचना

• सफाई टीम द्वारा केंद्र परिसर की सफाई और सजावट करना


इसके अतिरिक्त, केंद्र, समुदाय और राष्ट्रीय स्तर पर होने वाली घटनाओं से नागरिकता पर बातचीत शुरू होती है। इन अवसरों का उपयोग लंबे संवादात्मक सत्रों के लिए किया जाता है, जहाँ बच्चों को समाज में अपनी भूमिका, उनके विकास और भविष्य के लिए महत्वपूर्ण आंतरिक मूल्यों के बारे में सोचने और जागरूक होने के लिए प्रेरित किया जाता है और साथ ही उन्हें अपने आस-पास की दुनिया के काम करने के तरीके को समझने में मदद की जाती है। 


सफ़ाई टीम

आयु: 8 से 17 वर्ष

बालिकाएँ: 14; बालक: 7

कुल: 21


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Saturday, March 7, 2026

Women's Day

 " Give to Gain "  

Theme of the International Women's Day 2026 is " Give to Gain " . The slogan is little tricky but fortunately it supports the dreams of women . Who has to give and who is gaining  ? The government , the system need to provide more and more facilities to women , they need to educate them so as to gain in return .Once the women are educated , once they are skilled , we can find them at many spheres of life . Gone are the days when women used to live as prisoners  only inside the walls of the houses . For centuries women were being suppressed in this manly world. But with the passage of time women worked harder , fought for their rights of equality and today we can find women in different spheres of life . Today's women are equipped not only with knowledge but also with courage. Not to mention we can find working women in different professions viz : doctor , lawyer , astronaut , sailor , army officer , IAS , IPS , accountant , driver, hairdresser , tailor etc 

For years women are struggling for the equality . Many NGOs and socities are working hard to make women stronger and stronger . The slogan " Give to Gain " clearly depicts the message that more we give to women , more we will gain . The message is simple and thought provoking . If we need to develop our culture and society , we must give more and more to women in the form of education and skill .  Ultimately the Manly world has understood the power of women . Women are enriching our society not only culturally and socially but also economicaly . The current development of this world would never have been possible without the contribution of women . We must collectively work on giving more and more to women to make this world more beautiful . Ameen . 


I K Angiras 

9900297891

Friday, March 6, 2026

Czech WORD - explanation

 The spelling "cz" comes from older Czech and Latin spelling traditions. In the 15th century, the Czech spelling system started to shift to a diacritical spelling system (suggested by Jan Hus). For example, digraphs like cz or rz were replaced by the letters č and ř.

Polish, unlike Czech, didn't adopt this diacritical system, so cz still represents the sound /č/ there. When the English name "Czech" was adopted (through Latin), this older spelling was kept, even though English normally writes this sound as "ch."

We say Terezka (most common), also Terezinka, Terezička, or Terinka. Terka is common too (the same style as with my name, Zuzka from Zuzana)

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@CzechwithHana replied: "In Czech, the noun "ovoce" is a collective noun; it does not have a standard plural form and is always used in the singular. Please ask me anything if you have more questions!"
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Můj = For masculine Moje = For Feminine









Thank you for the question! The meaning is the same for both. It means "my" or "mine". To make it simple, "můj" is used before masculine nouns and "moje" before feminine or neuter
"
Thank you for the question! The meaning is the same for both. It means "my" or "mine". To make it simple, "můj" is used before masculine nouns and "moje" before feminine or neuter







Saturday, February 14, 2026

कब आओगे प्राण प्रिय _Original

 इस मन के सूने आँगन में

कब आओगे प्राण प्रिय 


रीत गयी चंदा की किरणें , बुझने लगे सितारे भी 

दरिया की लहरों से अब , मिलते नहीं किनारे भी 

पतझड़ भी अब रूठ गया , रूठी यहाँ बहारें  भी 


बंजर मन में ख़ुश्बू बन   , कब छाओगे प्राण प्रिय 



दिल की उजड़ी नगरी से ,  रूठी अब तन्हाई भी 

ग़म में डूबे  नग़मों की  ,  रीति अब  शहनाई  भी  

राख़ हुआ चन्दन मन   ,धुआँ  बनी  परछाई भी 


इन दर्दीले गीतों को  , कब  गाओगे प्राण प्रिय 



शाम ढली डूबा सूरज  , नागिन सी डसती  रतियाँ 

पनघट भी अब छूट गया  , छूट गयी सगरी सखियाँ 

गिनते गिनते युग बीते  , बीत गयी कितनी सदियाँ


किरनों का सतरंगी रथ , कब लाओगे प्राण प्रिय 


Wednesday, February 11, 2026

Surat # 1 # Swerg Residency / Pasodra Patiya

 Swerg residency (pasodra patiya)

1 BHK Flat for Sale (Ready to Move)

Project: Maruti developer

1 Bedroom 1 Bathroom Hall + Kitchen

Area: 720 sq.ft (Carpet/Built-up)

Floor: 3 / Total : 5

Furnishing: Semi-Furnished

️ Parking: Available

24x7 Water Supply

Security: Yes

Lift: Yes

Good ventilation & sunlight

Nearby: Market / School / Hospital / Main Road

Price: ₹15,00,000 (Negotiable)

Call

Direct Owner Genuine buyers only

Sunday, February 1, 2026

Hungarian Language Advertisement

# Indians in Hungary , Indian in Budapest , Learn Hungarian , Hindi Hungarian , Hungarian teacher, Hungarian Interprter , Hungarian Translator , Hungarian freelancer , Learn Hindi through Hungarian

Saturday, January 31, 2026

Pran Priy _Geet

 ग़म में डूबा साज़ भी कोई  यहां  गाता नहीं 

आँख में ठहरा  हुआ आंसू कही जाता नहीं 

दिल मिरा वीरान फिर आबाद हो सकता है पर

दिलजला  कोई सनम रहने यहां आता नहीं




इस मन के सूने आँगन में

कब आओगे प्राण प्रिय 


रीत गयी चंदा की किरणें , बुझने लगे सितारे भी 

दरिया की  लहरों से अब , मिलते नहीं किनारे भी 

पतझड़ भी अब रूठ गया  , रूठी यहाँ बहारें  भी 


बंजर मन में ख़ुश्बू बन   , कब छाओगे प्राण प्रिय 


दिल की उजड़ी नगरी से   रूठी अब तन्हाई भी 

ग़म में डूबे  नग़मों की रीति अब शहनाई भी 

राख़ हुआ चन्दन मन   ,धुआँ  बनी  परछाई भी 


इन दर्दीले गीतों को   , कब  गाओगे प्राण प्रिय 


शाम ढली डूबा सूरज  , नागिन सी डसती  रतियाँ 

पनघट भी अब छूट गया   , छूट गयी सगरी सखियाँ 

गिनते गिनते युग बीते  , बीत गयी कितनी सदियाँ


किरनों का सतरंगी रथ  , कब लाओगे प्राण प्रिय 




कवि - इन्दुकांत आंगिरस      

Friday, January 30, 2026

Czech Conversation

 Také Vám přeji pěkný den. Děkuji!"  - Have a nice day too 


Není zač! Děkuji za komentář. - You're welcome! Thank you for your comment.

Wednesday, January 28, 2026

Linguist - Czech

 Život - Life - जीवन , ज़िंदगी , जीना


Prach - Dust : राख

Sunday, January 25, 2026

GREEK Vocabulary

 Nouns -


μητέρα - Mother

πατέρας - Father

σύζυγος Wife/ Husband

κόρι - Daughter

γιος - Son

παιδί - Child

φίλος - Friend

Friday, January 23, 2026

Thursday, January 22, 2026

शर्म हमको मगर नहीं आती

 शर्म हमको मगर नहीं आती 

80 मिनट की जद्दोजेहद के बाद भी प्रशासन गहरे पानी वाले गड्ढे में अपनी कार समेत गिरे युवक को बचा नहीं पाया  तो क्या हुआ  ? अंततः , उस  युवक की लाश को गड्ढे से सकुशल बाहर निकालने में तो डिजास्टर मैनेजमेंट की टीम सफल हो ही  गयी थी।  यह भी अपने आप में बड़ी उपलब्धि थी।  युवक की  लाश को उसके पिता को सौंपते हुए अधिकारी ने गर्व से कहा था , " ये लीजिए अपने बेटे की  साबुत लाश। "

जवान बेटे  की साबुत लाश को देखकर ग़मगीन बाप  के मुँह से इतना भर निकला था , शुक्रिया जनाब ! ", शर्म हमको मगर नहीं आती। 


इन्दुकांत आंगिरस 

Wednesday, January 21, 2026

Karnataka Hindi Prachar Samiti

 Karnataka Hindi Prachar Samiti  , Jayanagar , Bangalore - 560 011

Joint meeting of the Executive and the Education Council 


The Joint meeting of the Executive committee  and the Education Council was held successfully in the Samiti Bhavan on Sunday 28th December 2025 at 11.00 a.m. under the presidentship of Shri  C R Janardhan .


Meeting attended by following committee members :

1 Shri C. R. Janardhan                   7  Dr. M S Ganesh Kini

2 Dr V. R. Devgiri                          8  Dr K Basavrajappa 

3  Dr A Haanumayya                     9   Shri Shauqatali Nvadgikar 

4 Shri R K Chavan                         10 Dr T. Ravindran  

5 Shri Srinivas Reddy                    11 Dr. G. G. Hegde

6 Shri Wajid Khan


Absentees :

Shri S. Shantraju , Dr. Girija Kumar , Shrimati Swarnlata Shanbagh ,

Dr. B. Y . Tondiyal 


Meeting attended by following committee members of educational council :

1 Dr V.R.Devgiri                        6 Shri Santosh Kumar

2 Shri Ashok Kumar                   7 Shri S.S.Medegar

3 Shri S. Nandeesh                      8 Shri D.A Badiger

4 Shri H.C. Rameshkumar          9 Shri J.M.Ramesh

5 Dr N.G.Bagli


Condolence :

Smt. Shardabai , wife of Dr V.R.Devgiri , Vice - president of the committee , died of an  heart attack on 31st October ' 2025 . She was a religious , social and cultured lady who always welcomed the guests with refreshments . Two minutes silence was observed in the meeting to offer prayers to the God to give peace to the soul of the deceased and give patience and strength to the mourning members of the family .

Agenda - 1 - Reinforcement  of the details of previous committee and educational council 

Proposal : The secretary appraised about the Minutes of the previous meeting and the actions taken . The proposal for the confirmation was unanimously accepted.

Agenda -2 : Cancelation of the memership of three disqualified selected members .

Proposal : After a long discussion three selected members were disqualified . It was agreed unanimously .

Agenda - 3 : Reinforcement and appointment of members in place of three disqualified members .

Proposal : Three vacant positions has been fulfilled with three members of previous committee namely as Dr G G Hegde , Dr B .Y . Tondiyal and Shri Shuqatali Nvaadgeekar. It is agreed unanimously .

Agenda - 4 : Shri Srinivas Reddy invited to join education council .

Proposal : President of executive committee Shri C. R. Janardhan has appointed Shri Shrinivas Reddy as the President of Education Council . It is agreed unanimously .

Agenda - 5 : Dr S. Somshekhar and Shri D.B.Chaneganv invited to join Executive Committee.

Proposal : When President seconded the names of Dr S. Somashekhar and Shri D.B. Chaneganv as Guest members of the  Executive Committee , everyone approved the proposal unanimously.

Agenda - 6 : Consideration of complaint letters against the Secretary

Proposal :  Consideration of two complaint letters received against the methodology of the secretary Dr A . Hanumayya has been postponed till next meeting of the committee. This postponement by the president was accepeted unanimously.


Agenda - 7 : Discussion over school related PTA 

Proposal : A suit has been filed in the court in respect of school related PTA. Things are motionless because of Court holidays . Agreed unanimously .


Agenda - 8 : Consideration on Lingma's case

Proposal : Judicial case of fourth grade Lingma is under consideration .Things are motionless because of Court holidays .Agreed unanimously .


Agenda - 9 : Discussion on Examination Questioner Board   and exams.

Proposal : Vice President Dr V.R. Devgiri informed that the list of Questioner Board has been  prepared to run 2026 examinations smoothly . It is agreed unanimously .

Agenda - 10 : " Lekhan Vidhayen " book released.

Proposal : " Lekhan Vidhayen " , the book authored by Shri Wajid Khan and Dr V.R.Devgiri , released in presence of all committee members .

Agenda 11 : Any other Issue with President's permission 

Proposal : Nothing.

Meeting was concluded after Thanks Given by Shri Wajid Ali 


Tuesday, January 20, 2026

SANADONATION

 SELF - 11111/ 

Dr Savita Chadha -  1100/

Shivan Lal - 1100/ ( 500 paid to Temple 600/ recived Cash )

Mitra Sharma - 1500/ Cash 

Anita Verma - 2500/

Gurdeep Gul - 2100/ transfer to Indu Kant sharma 










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Registration