" हमारा पर्यावरण और आपका स्वास्थ्य " राष्ट्रीय साझा संकलन के प्रकाशन पर प्रधान सम्पादक डॉ सैयद अली अख़्तर नक़वी को अनेकानेक शुभकामनएं । इस पुस्तक में प्रकाशित रचनाओं के लेखकों को अपना स्नेहिल प्रेम प्रेषित करता हूँ।
यूँ तो पर्यावण की समस्या सम्पूर्ण संसार में ही व्याप्त है लेकिन भारत के सन्दर्भ में यह समस्या अधिक गंभीर है। दूषित पर्यावरण के चलते हर वर्ष लाखों लोग प्रभावित होते हैं। पर्यावरण की सुरसा मुँह खोले खड़ी है और हैरान आँखों से दुनिया की अंधी दौड़ को देख रही है। मनुष्य ने जब जब प्रकृति के साथ खिलवाड़ किया है तब तब प्रकृति ने अपना विकराल रूप दिखाया है। वास्तव में देखा जाए तो मनुष्य ने अपने स्वार्थ के लिए प्रकृति के कण कण को कलुषित किया है। अफ़सोस तो इस बात का है कि मनुष्य को अपनी इस ग़लती का अहसास भी नहीं। प्रकृति के साथ साथ मानवीय मूल्यों का भी हनन बहुत रफ़्तार से हो रहा है। आगे बढ़ने की दौड़ में सब पीछे छूटते जा रहे हैं। मनुष्य की कलुषित आत्मा को भी ताज़ा हवा और संवेदनाओं की नदी चाहिए। मुझेआशा ही नहीं पूर्ण विशवास है कि जिस प्रयोजन से इस पुस्तक का प्रकाशन किया जा रहा है उससे इस संसार में निश्चय ही कुछ बदलाव ज़रूर आएगा। इस पुस्तक की सार्थकता इसी बात में निहित है कि इसमें शामिल बेहतरीन कविताएँ , लघुकथा , गीत , ग़ज़ल , आलेख आदि पाठकों को सोचने पर विवश करेंगी और हम सब मिलकर एक बेहतर साफ़ , निर्मल , स्वच्छ और संवेदनशील दुनिया बनाते हुए ना सिर्फ पर्यावण को बचाएंगे अपितु सूखती हुए संवेदनाओं को भी प्रेमजल से सींचेंगे।
सादर
इन्दुकांत आंगिरस
नई दिल्ली
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