Thursday, August 31, 2023

गीत - सावन की रतियों में , मत जा रे बलम छोड़ के

 सावन की रतियों में , मत जा रे बलम छोड़ के 


तोरण से मैं द्वार सजाऊँ 

चन्दन बंदन हार बनाऊँ

बिरहन सी सूनी आँखों में

तारों के मैं दीप जलाऊँ


सावन की रतियों में , मत जा रे नयन मोड़ के 


तोड़ के सारे बंधन आ जा 

प्रेम को मेरे  चन्दन कर जा 

सूने प्राणों में रंग भर कर 

आज मुझे  फाल्गुन कर जा  


सावन की रतियों में , मत जा रे क़सम  तोड़ के 


बैरन रतिया मोह तड़पाए 

आहट पे हर दिल घबराए

साथ हमारा जन्मों का यूँ 

कान्हा के सँग राधा गाए 


सावन की रतियों में , मत जा रे भरम तोड़ के 



कवि - इन्दुकांत आंगिरस 

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1


सावन की रतियों में , मत जा रे बलम छोड़ के



तोरण  से मैं  द्वार सजाऊँ 


चन्दन  बंदन  हार  बनाऊँ


बिरहन सी सूनी आँखों में


तारों के  मैं  दीप  जलाऊँ


सावन की रतियों में , मत जा रे नयन मोड़ के 



तोड़  नेह के  बंधन ना  जा 


प्रेममयी घन बन उर छा जा 


सूने   मन  में   रंग   सुनहरे 


आज डाल के अंग लगा जा 


सावन की रतियों में , मत जा रे क़सम  तोड़ के 


बैरन रतिया मोह तड़पाए 

आहट पे हर दिल घबराए

साथ हमारा  जन्मों का यूँ 

कान्हा के सँग  राधा गाए 

सावन की रतियों में , मत जा रे भरम तोड़ के




                          2


सावन की रतियों में मत जा, बलम मुझे (मोय )यूँ छोड़ के 


तोरण  से  मैं  द्वार  सजाऊँ 

चन्दन का नित  हार बनाऊँ

बिरहन सी  सूनी  आँखों में

तारों  के  मैं   दीप  जलाऊँ


अरे चाँदनी रातों में क्यूँ ,जाय नयन तू मोड़ के 


तोड़  नेह के  बंधन ना  जा 

प्रेममयी घन बन उर छा जा 

सूने   मन  में   रंग   सुनहरे 

आज डाल के अंग लगा जा 


जाके तो तू देख पिया रे! पकड़ तुझे ( तोय )लूँ दौड़ के 



बैरन  रतिया   बड़ी  सताए 

हर  आहट पे  दिल घबराए

साथ  हमारा  जन्मों का  यूँ 

कान्हा  के सँग  राधा  गाए 


बरसाती  बैरन  रतियों में, ना जा  कसमें तोड़ के


गीत बहुत अच्छा है। मैंने अपनी समझ से कर दिया आप अपने अनुसार देख लीजिएगा। यदि मुखड़े की दूसरी (पूरक )पंक्ति होती तो गीत और अच्छा बन पड़ता 

आपने मुझे इस लायक समझा, हृदय से बहुत बहुत आभार 👏🙏

 

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