Monday, November 24, 2025

पढ़े लिखे को फ़ारसी क्या

 पढ़े लिखे को फ़ारसी क्या , हाथ कंगन को आरसी क्या 


पढ़े फ़ारसी , बेचे तेल , ये देखो कुदरत के खेल 


हिसाब जौ जौ , बख़्शीश सौ सौ  


मुर्गा वो जो मुर्गियों में खेले , न कि मुर्गों में जा कर दण्ड पेले  (  मुश्ताक़ अहमद युसूफी  )


हर ख़मो-पेचे कि शुद अज़ तारे-ज़ुल्फ़े-यार शुद

दाम शुद, ज़ंजीर शुद, तस्बीह शुद, ज़ुन्नार शुद


~शाहज़ादा दाराशिकोह क़ादरी (1615-1659 ई॰, बादशाह शाहजहाँ का ज्येष्ठ पुत्र)

हर ख़मो-पेच जो कि है वह तारे-ज़ुल्फ़े-यार ही से है, चाहे दाम हो, ज़ंजीर हो, तस्बीह हो कि ज़ुन्नार हो।


शब्दार्थ


ख़मो-पेच = twist and turn.

तार = srand. ज़ुल्फ़े-यार = flowing hair of the beloved.

दाम = trap. ज़ंजीर =chain; shackles. तस्बीह = rosary. ज़ुन्नार = sacred thread worn by Hindus.

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अज़ दिल ख़ेज़द, बर दिल रेज़द   -  जो बात दिल से निकलती है वही बात दिल पर असर करती है 

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दो रोज़ा फ़ुर्सते-वहमे कि ज़िन्दगी नाम अस्त

गर अज़ हवस गुज़री, बे मलाल मी गुज़रद 

-मिर्ज़ा बेदिल देहलवी

(1644-1720 ई॰)

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शुनीदम् आशिक़ाँ रा मी नवाज़ी 

मगर मन ज़ाँ मयाँ बेरूनम् ऐ दोस्त!

~निज़ामी गंजवी (मृत्यु : 1209 ई॰)


-- ख़ुदा ---

جہاں را ز یک آب و گِل آفریدم

تو ایران و تاتار و زنگ آفریدی

जहाँ रा ज़े यक आब-ओ-गिल आफ़रीदम

तू ईरान-ओ-तातार-ओ-ज़ंग आफ़रीदी

(मैं ने यह जहान एक ही पानी और मिट्टी से पैदा किया था, तू ने इस में ईरान व तूरान व हबश बना लिए।)

من از خاک پولادِ ناب آفریدم

تو شمشیر و تیر و تفنگ آفریدی

मन अज़ ख़ाक-ए-पुलाद-ए-नाब आफ़रीदम

तू शमशीर-ओ-तीर-ओ-तुफ़ंग आफ़रीदी

(मैं ने ख़ाक से ख़ालिस फ़ौलाद पैदा किया था, तू ने इस से शमशीर व तीर व तोप बना लिए।)

تبر آفریدی نہالِ چمن را

قفس ساختی طائرِ نغمہ زن را

तबर आफ़रीदी निहाल-ए-चमन रा

क़फ़स साख़्ती ताइर-ए-नग़्मा ज़न रा

(तू ने इस से चमन के दरख़्त काटने के लिए कुल्हाड़ा बना लिया, नग़्मा गाते हुए परिंदों के लिए क़फ़स बना लिया।)

--- इंसान ---

تو شب آفریدی، چراغ آفریدم

سفال آفریدی، ایاغ آفریدم

तू शब आफ़रीदी, चराग़ आफ़रीदम

सुफ़ाल आफ़रीदी, अयाग़ आफ़रीदम

(तू ने रात बनाई मैं ने चराग़ बना लिया। तू ने मिट्टी बनाई मैं ने उस से प्याला बना लिया।)

بیابان و کہسار و راغ آفریدی

خیابان و گلزار و باغ آفریدم

बयाबान-ओ-कोहसार-ओ-राग़ आफ़रीदी

ख़ियाबान-ओ-गुल्ज़ार-ओ-बाग़ आफ़रीदम

(तू ने बयाबान, पहाड़ और मैदान बनाए। मैं ने इस में ख़ियाबान, गुल्ज़ार और बाग़ बना लिए।)

من آنم کہ از سنگ آئینہ سازم

من آنم کہ از زہر نوشینہ سازم

मन आनम के अज़ संग आईना साज़म

मन आनम के अज़ ज़हर नौशीना साज़म

(मैं वो हूँ कि पत्थर से आईना/शीशा बनाता हूँ, मैं वो हूँ कि ज़हर से शरबत/तरियाक़ बनाता हूँ।)

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