Friday, April 3, 2026

Neel Pari

 नाम      - दीपज्योति गुप्ता  " दीप "

जन्म दिनांक  -       21 अक्टूबर 

स्थान  -           ग्वालियर ( म. प्र. )

शिक्षा  -    स्नातकोत्तर       

              (अर्थशास्त्र ,  इतिहास  )                        

              बी. एड. , कम्प्यूटर    

              स्नात्तकोत्तर डिप्लोमा 

व्यवसाय   -  अध्यापन 

पिताजी    -  श्री गणेश लाल सोनी                       

                ( पूर्व एस. एल. आर.)

                 कवि एवं समाजसेवी 

माता जी    -  श्रीमती शोभा 

काव्य विधा  -  कविता, कहानी, 

                 गीत, ग़ज़ल , शायरी    

                  मुक्तक एवं   बाल साहित्य 

                   

प्रकाशन  - देश के प्रतिष्ठित सभी समाचार पत्रों एवं विभिन्न पात्र पत्रिकाओं में आलेखों, कविताओं एवं गीतों का प्रकाशन 

संप्रति  - साहित्य में निरन्तर लेखन कवि सम्मलेनों और मंचों पर सक्रिय भागीदारी 


समर्क सूत्र - 515 - बी. आर. अपार्टमेंट , सुरेश नगर, थाठीपुर ग्वालियर म. प्र. 484011

ई मेल  - deepjyotigupta7@gmail.com 

मोबाइल न. - 9399028356 

                   7879944816

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अपना घर 


महक महक महके फुलबाग़िया ,

चहक चहक चहके है चिड़िया। 


गुटर गुटर गु बोले कबूतर , 

शायद कुछ बोले ये तीतर।  


मैं.. मैं.. मैं..बोली ये बकरी ,

बहना भर लाई  है गगरी। 


अम्मा झटपट रोटी बनाती , 

बड़े प्यार से हमें खिलाती। 


अपना घर है कितना प्यारा ,

लगता  सारे जग से न्यारा  ।  

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पतंग 

आसमान में उड़े पतंग 
नीली डोरी इसके सँग
बच्चें इससे पेंच लड़ाते  
हम सब इसका मज़ा उठाते 
दूर गगन में जब उड़ जाती 
आँखों से ओझल हो जाती 
देख के रह जाते सब दंग
कितने सुन्दर इसके रंग।  
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नीलगगन 

कितना सुन्दर नीलगगन 
जैसे हो फूलों का चमन 
रोज़ ही आते इस पर तारे 
हिलमिल कर रहते ये सारे 
कभी ना लड़ते कभी ना रोते
वक़्त वो अपना कभी ना खोते 
सदा समय पर आते हैं 
सदा समय पर जाते हैं। 

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चंदा 

बादल में इक चंदा प्यारा 
सबसे सुन्दर सबसे न्यारा 
वस्त्र पहनता उजले उजले 
तारो को सँग लेकर निकले  
आँख मिचोली खेला करता 
बदली में चुप से छिप जाता  
छवि है इसकी बड़ी निराली 
जैसे हो चांदी की थाली 

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